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विधानसभा में कहा था एक महीने में दूर करेंगे डॉक्टर्स की कमी, ढाई महीने बीते, भूले मंत्रीजी

Burhanpur News - भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट। बुरहानपुर उनके प्रभार का जिला। वे तीन...

Nov 15, 2019, 07:45 AM IST
Burhanpur News - mp news it was said in the assembly that in a month the shortage of doctors will be overcome two and a half months have passed the minister has forgotten
भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर

प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट। बुरहानपुर उनके प्रभार का जिला। वे तीन बार जिला अस्पताल में बदहाली देख चुके हैं। जिला अस्पताल सहित जिले में डॉक्टर्स की कमी से वाकिफ हैं। यहां तक कि विधायक ठाकुर सुरेंद्र सिंह ढाई महीने पहले विधानसभा सत्र के दौरान विधानसभा में भी डॉक्टर्स की कमी का मुद्दा उठा चुके हैं। तब स्वास्थ्य मंत्री ने एक महीने में डॉक्टर्स की कमी दूर करने का अाश्वासन दिया था लेकिन वे ढाई महीने में ही इसे भूल गए। उनका आश्वासन कोरा वादा ही रहा।

जिलेभर में आज भी 63 डॉक्टर्स की कमी है। इस कारण सरकारी अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों काे इलाज नहीं मिल पा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री के प्रभार का जिला होने के बावजूद यहां प्रथम और द्वितीय श्रेणी के 63 डॉक्टर्स की कमी है। पिछले सप्ताह स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश में 79 नए डॉक्टर्स की नियुक्ति की लेकिन बुरहानपुर जिले के खाते में एक भी डॉक्टर नहीं आया। स्वास्थ्य मंत्री बनने के बाद तुलसी सिलावट को जिले का प्रभारी बनाया गया था। उन्होंने जिला अस्पताल के पहले ही निरीक्षण में डॉक्टर्स की कमी दूर करने की बात कही थी। यह बात वे अपने करीब तीनों दौरों में कह चुके हैं लेकिन यह कोरी बात ही रही।

विधायक ठाकुर सुरेंद्रसिंह ने ढाई महीने पहले विधानसभा सत्र के दौरान उठाया था मुद्दा

जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी से मरीजों को निजी अस्पतालों में इलाज कराना पड़ रहा है।

जिले के 34 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, आधों में डॉक्टर ही नहीं

जिले में 34 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं लेकिन इनमें से आधे केंद्रों पर डॉक्टर ही नहीं है। इस कारण यहां मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। मामूली बीमारी में वे निजी डॉक्टर्स के यहां महंगा इलाज करा रहे हैं लेकिन गंभीर मरीजों को परिजन बुरहानपुर सहित अन्य शहरों में ले जाने को मजबूर हैं।

जिले में यह है डॉक्टर्स की स्थिति

स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड के अनुसार जिले में प्रथम श्रेणी के करीब 39 और द्वितीय श्रेणी के 61 डॉक्टर्स के पद स्वीकृत हैं। इनमें से प्रथम श्रेणी के 14 और द्वितीय श्रेणी के 23 ही डॉक्टर पदस्थ हैं। प्रथम श्रेणी के 25 और द्वितीय श्रेणी के 38 डॉक्टर्स की कमी है। जिला अस्पताल में ट्रामा सेंटर सहित करीब 58 डॉक्टर्स के पद स्वीकृत हैं, लेकिन यहां 25 ही डॉक्टर कार्यरत हैं। यहां आर्थोपेडिक, ईएनआई, मनोवैज्ञानिक, चर्म रोग, निश्चेतन, रेडियोलॉजिस्ट, पैथालॉजिस्ट, दंत रोग, नाक, कान, गला विशेषज्ञ और पैथालॉजी व िशेषज्ञ डॉक्टर्स नहीं हैं।

जिला अस्पताल में रोजाना 600 से ज्यादा आ रहे सर्दी-बुखार के मरीज

जिला अस्पताल में आमतौर पर रोजाना 600 ओपीडी हो रही है। मौसमी बीमारियों के असर दिखाने पर यह दोगुना हो जाती है। ऐसे में ओपीडी में बैठने वाले डॉक्टर परेशान होते हैं। अस्पताल में करीब 25 डॉक्टर हैं लेकिन ये काफी कम हैं। हर वार्ड में राउंड लगाने, 24 घंटे एमरजेंसी ड्यूटी और ऑपरेशन के लिए यहां और डॉक्टर्स की तैनाती जरूरी है। ट्रामा सेंटर के लिए भी आज तक स्टाफ बढ़ाया नहीं गया है।

इधर... 2 साल पहले बने 28 करोड़ के अस्पताल में पड़ने लगीं दरारें

सिविल सर्जन ने संयुक्त संचालक को पत्र लिखकर बताई भवन की स्थिति, निर्माण एजेंसी पीआईयू को भी लिखेंगे पत्र

भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर

28 करोड़ रुपए से दो साल पहले ही बनकर तैयार हुए जिला अस्पताल के दो मंजिला भवन में कई जगह दरारें पड़ने लगी हैं। बारिश होने पर कई वार्डों में पानी टपकता है। इससे दीवारों में सीलन आ जाती है। समस्या को लेकर सिविल सर्जन ने स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त संचालक को पत्र लिखकर भवन की स्थिति से अवगत कराया है। पीआईयू को भी इसके लिए पत्र लिखा जाएगा। बारिश के दौरान निरीक्षण के लिए आए तत्कालीन कलेक्टर उमेेश कुमार ने भी दीवारों में सीलन सहित भवन की बदहाली देखकर नाराजगी जताई थी। पीआईयू के संबंधित ठेकेदार को नोटिस देकर व्यवस्था ठीक कराने के निर्देश दिए थे।

जिला अस्पताल के नए भवन का निर्माण पीआईयू ने कराया है। यहां अस्पताल शुरू होने से पहले ही भवन की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे थे, क्योंकि निर्माण के दौरान ही छत का प्लास्टर गिरने लगा था। बाद में इसकी मरम्मत कराई गई थी। पिछले साल पहली बारिश में भी कई वार्डों में छत से पानी टपका था। इसको लेकर विभागीय अफसरों से शिकायत की गई थी लेकिन पहली बारिश होने का हवाला देते हुए उन्होंने भी पल्ला झाड़ लिया था। आज भी अस्पताल की हालत ऐसी ही है।

मरम्मत कराना पीआईयू की जिम्मेदारी : बनाने के बाद नियमानुसार तीन से पांच साल तक भवन की देखरेख पीआईयू को करना है लेकिन दीवारों में दरारें आने, प्लास्टर गिरने और पानी टपकने की शिकायतें मिलने के बाद भी विभाग के अफसर इसे देखने तक नहीं पहुंचे, जबकि कलेक्टर ने भी विभाग को संबंधित ठेकेदार से अस्पताल की मरम्मत कराने के निर्देश दिए थे।


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