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ज्ञानेश्वर पाटील काे मप्र पावरलूम बुनकर संघ अध्यक्ष पद से हटाया, उपाध्यक्ष संभालेंगे काम

एक वर्ष पहले
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राज्य सहकारिता आयुक्त ने मप्र पावरलूम बुनकर संघ अध्यक्ष पद से ज्ञानेश्वर पाटील को हटा दिया है। क्योंकि अध्यक्ष पद चुनाव के वक्त उन पर सिटीजन को-ऑपरेटिव बैंक का 70.90 लाख रुपए बकाया था। ऐसे में सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 की धारा 50-ए/क (2) के अंतर्गत यह पद रिक्त घोषित किया है। पाटील भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष व सांसद नंदकुमारसिंह चौहान के करीबी हैं। भोपाल से 3 मार्च 2020 को आयुक्त ने आदेश जारी किया। भोपाल कार्यालय से यह आदेश 6 मार्च को जारी हुआ है। यह आदेश अब तक अध्यक्ष को नहीं मिल पाया है। जिला सहकारिता उपायुक्त को आदेश मिल चुका है।

मप्र पावरलूम बुनकर संघ संचालन के विभिन्न बिंदुओं पर करीब दो साल पहले आरटीआई कार्यकर्ता राकेश सेईवाल ने शिकायत की थी। एक साल पहले तक भाजपा सरकार होने के कारण जांच को गंभीरता से नहीं लिया गया था। मप्र में कांग्रेस की सरकार बनी और मामले की जांच तेज गति से शुरू हो गई। 29 मई 2019 को खंडवा सहकारिता उपायुक्त ने जांच प्रतिवेदन तैयार किया। इसमें स्पष्ट हुआ कि 18 फरवरी 2017 को पाटील अध्यक्ष निर्वाचित हुए। 10 फरवरी 2017 की स्थिति में सिटीजन को-ऑपरेटीव बैंक का उन पर 71 लाख 85 हजार 517 रुपए बकाया था। एकमुश्त समझौता योजना की गणना अनुसार बकाया में से 46 लाख 3 हजार 81 रुपए की छूट दी। बकाया 25 लाख 55 हजार 436 रुपए उन्हें एक साल में चार समान किस्त में भरना थी। समझौते के दिन पहली किस्त 6 लाख 38 हजार 859 रुपए जमा कर चुके थे। इसके बाद उन पर 19 लाख 16 हजार 577 रुपए बकाया थे। पाटील मेसर्स प्रियम केला सप्लायर्स बुरहानपुर के प्रोप्राइटर हैं। इस फर्म पर सिटीजन बैंक का 10 फरवरी 2017 की स्थिति में 1 करोड़ 56 लाख 85 हजार 242 रुपए 83 पैसे बकाया था। एकमुश्त समझौता योजना की गणना अनुसार 87 लाख 86 हजार 878 रुपए की छूट दी गई। बाकी 68 लाख 98 हजार 365 रुपए उन्हें चार समान किस्तों में देना थे। पहली किस्त के रूप में 17 लाख 24 हजार 591 रुपए जमा किए। इसके बाद उन पर 51 लाख 73 हजार 774 रुपए बकाया थे।

आयुक्त ने मध्यप्रदेश सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 की धारा 50-ए/क(2) के अंतर्गत रिक्त घोषित किया अध्यक्ष का पद

ये है नियम मप्र सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 की धारा 50-ए/क (2) में प्रावधान है कि किसी सोसायटी के किसी पद पर निर्वाचित किया गया कोई व्यक्ति ऐसा पद धारण करने से प्रविरत हो जाएगा यदि वह उस सोसायटी या किसी अन्य सोसायटी के प्रति 12 माह से अधिक की कालावधि के लिए उसके द्वारा लिए गए किसी उधार या अग्रिम के लिए व्यक्तिक्रमी रहता है। ऐसे में रजिस्ट्रार उसके स्थान को रिक्त घोषित करेगा।

दोनों पक्षों के तर्क - 5 सुनवाइयों में प्रकरण में संलग्न अभिलेखों व अधिवक्ताओं के तर्क के अनुशीलन के बाद स्पष्ट हुआ कि अध्यक्ष का तर्क था कि धारा 50-ए/क के प्रावधान उन पर लागू नहीं है। क्योंकि निर्वाचित संचालकों के लिए धारा 48-कक के प्रावधान लागू हाेते हैं। आयुक्त के तर्क थे कि यह मान्य योग्य नहीं है, क्योंकि धारा 50-ए/क ही स्पष्ट प्रावधान है कि किसी सोसायटी के किसी पद पर निर्वाचित किया गया व्यक्ति, ऐसा पद धारण करने से प्रविरत हो जाएगा। यदि वह उस सोसायटी या किसी अन्य सोसायटी के प्रति 12 माह से अधिक की कालावधि के लिए उसके द्वारा लिए गए किसी उधार या अग्रीक के लिए व्यक्तिक्रमी रहता है। यहां निर्वाचित किया गया व्यक्ति से स्पष्ट आशय है कि यदि कोई व्यक्ति निर्वाचित किया जा चुका है, यदि व्यक्तिक्रमी पाया जाता है तो पद धारण करने से प्रविरत हो जाएगा।

ये बोले जिम्मेदार

जेएल बर्डे, उपायुक्त, सहकारिता विभाग

-राकेश सेईवाल, शिकायतकर्ता

-ज्ञानेश्वर पाटील, अध्यक्ष, पावरलूम बुनकर संघ मप्र
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