शहर के ऐतिहासिक महल गुलआरा के पास जलसंरक्षण के लिए नहीं किया गहरीकरण

Burhanpur News - 350 साल पुराना महल जर्जर हो रहा है। इनसेट में बारिश से भरने लगा पानी, लेकिन नीचे से रपटा हो रहा खतिग्रस्त। 350 साल...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 08:45 AM IST
Nepanagar News - mp news the historic palace of the city did not make the deepening for water conservation near gulera
350 साल पुराना महल जर्जर हो रहा है। इनसेट में बारिश से भरने लगा पानी, लेकिन नीचे से रपटा हो रहा खतिग्रस्त।

350 साल पुराना है महल

भारत पाटील ने बताया महल करीब 350 साल पुराना है। शाहजहां ने गुलआरा रानी के नाम पर महल काे नाम दिया था। महल की संरचना राजगीरी शैली की है। महल का अंदरूनी हिस्से में सुंदर कलाकारी की गई है। महल को देखने के लिए हजारों पर्यटक आते हैं। पुरातत्व विभाग इसकी निगरानी कर रहा है। लेकिन सही मायने में इसकी देखरेख नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों और पंचायत ने कलेक्टोरेट सहित पुरातत्व विभाग को कई बार शिकायत की। जनसुनवाई में आवेदन लगा चुके हैं। इसके बाद भी क्षेत्र की प्राचीन धरोहर पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

दो साल पहले कलेक्टर ने किया था निरीक्षण

14 मई 2017 को कलेक्टर दीपकसिंह ने अफसरों के साथ महल का निरीक्षण किया। इतिहास जानकर अफसरों से चर्चा की। महल को जर्जर देखकर चिंता जताई थी। मरम्मत और सुधार के निर्देश दिए थे। पर्यटन विभाग को सौंदर्यीकरण और तालाब के गहरीकरण के लिए कहा था। गहरीकरण से ज्यादा मात्रा में पानी जमा होगा। इससे गांव सहित आसपास पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध रहेगा।

सैकड़ों लोगों की होती है आवाजाही

जिला मुख्यालय से 25 किमी की दूर महल गुलआरा है। देखरेख नहीं होने से बारिश की मार के कारण दीवारें बदहाल हो गई है। कई जगह दरारे पड़ गई है। मलबा गिर रहा है। दो महलों को जोड़ने के लिए बीच में रपटा बना है। साथ ही पानी रोकने के लिए दीवार बनाई गई है। बारिश में इस दीवार से झरना बहता है। मनोरम दृश्य निहारने के लिए सैकड़ों पर्यटक आते हैं। रपटे के बीच का हिस्सा जर्जर हो गया है। इस कारण पानी बह जाता है। इस साल भी पानी कम हो गया है। ग्रामीणों ने कहा पानी ठहरने से गांव का जलस्तर बना रहता है। पिछले साल लोगों ने श्रमदान कर बोरी बंधान किया था। ग्रामीणों ने कहा पर्यटन विभाग को इस ओर ध्यान देना चाहिए।

पत्थरों का हिस्सा गिरा

महल से जुड़ा पत्थर से बना एक बड़ा हिस्सा गिर गया है। इससे महल की सुंदरता को नुकसान पहुंचा है। समय पर ध्यान नहीं देने के कारण एक हिस्सा जर्जर हो गया है। पर्यटकों ने कहा पूरे महल की मरम्मत की जाना चाहिए। पुराने स्वरूप में लाना चाहिए। इसके अलावा रेत माफियाओं ने महल के आसपास उतावली नदी में रेत का अवैध खनन कर आसपास बड़े-बड़े गड्ढे कर दिए थे।

मार्च से ही खत्म होने लगा था पानी

मार्च माह के आरंभ से ही गर्मी के तीखे तेवर से महल के पास बने रपटे का पानी सूखकर खत्म हो गया। हालात यह हो गए थे की लोग नदी के किनारे पर तीन फीट तक गड्ढा खोद कर इसमें झिर लगने पर पानी भरते थे। गांव में जलस्तर करीब 700 फीट से भी अधिक नीचे चला गया। तीन माह तक क्षेत्र में पानी की भारी किल्लत रही। नए बोरिंग भी फैल हो गए। इसके बाद भी जिम्मेदारों ने वर्तमान में रपटे के सुधार और नदी के गहरीकरण के लिए कोई प्रयास नहीं किए। बारिश का पानी भी बह जाएगा। जो आने वाली गर्मी में फिर से लोगों के लिए परेशानी खड़ी करेगा।

300 फीट लंबा है रपटा

महलों के बीच बना रपटा 300 फीट लंबा है। बारिश में 30 फीट गहराई तक पानी जमा हो जाता है। पानी से आसपास के 12 गांव में जल स्तर बना रहता है। किसानों के लिए यह काफी उपयोगी है। हर साल क्षेत्र में जलस्तर गिर रहा है। अब तक अफसरों ने तालाब का गहरीकरण नहीं करवाया है। कलेक्टर के निर्देश के बाद सीमांकन किया गया था। इसके बाद आगे की कार्रवाई नहीं की गई।

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