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हम हक के लिए लाठी खाने व जेल जाने को तैयार, तीन घंटे घेरे रखा कलेक्टोरेट

शहर में आदिवासियों की विरोध रैली निकाली। भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर जल जंगल जमीन कोनी छे हमरी छे हमरी छे, हम...

Danik Bhaskar | Sep 11, 2018, 03:26 AM IST
शहर में आदिवासियों की विरोध रैली निकाली।

भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर

जल जंगल जमीन कोनी छे हमरी छे हमरी छे, हम नहीं तो जेल सही... के नारे लगाते हुए 6 जिलों से आए पांच हजार से भी ज्यादा आदिवासियों ने रैली निकालकर कलेक्टोरेट का घेराव किया। जागृत आदिवासी दलित संगठन पूरे निमाड़ में आदिवासियों के अधिकारों और वनाधिकार पट्‌टों के लिए आंदोलन कर रहा है। संगठन ने मंगलवार को शहर में रैली िनकालकर विरोध किया।

दोपहर 1 बजे रैली कृषि उपज मंडी से शुरू हुआ। आदिवासी दो कतार में निकले। रैली डेढ़ किलोमीटर लंबी थी, जिसे शनवारा से गुजरने में ही 20 मिनट से ज्यादा का समय लगा। रैली के दौरान हाईवे पर आवागमन रोकना पड़ा। रैली कलेक्टोरेट पहुंची और तीन घंटे घेराव हुआ। विरोध के बाद जब कलेक्टर उनसे मिलने पहुंचे तो आदिवासियों ने कहा- हम हक के लिए लाठी खाने और जेल जाने को तैयार है। सरकार ने जो कानून बनाए, अधिकारी-वन विभाग उनको नहीं मानता। जो आदिवासी दशकों से जंगल में रह रहा है, उसे बेदखल किया जा रहा है।

15 साल से एक ही सरकार के भरोसे, अब बदलाव जरूरी

बालसिंह बड़वानी ने कहा- सरकार ने कानून बनाया लेकिन सरकार ही इसका पालन नहीं कर रही है। अगर ऐसा चलता रहा तो हम आंदोलन करेंगे और जब हम आएंगे तो एक दिन भी काम नहीं करने देंगे। 15 साल से एक ही सरकार के भरोसे है, अब बदलाव जरूरी है। सरकार हमारे बारे में नहीं सोच रही है, हम क्यों सरकार की सोंचे। आदिवासियों को रतनसिंह अवास्या, मांगीलाल, कोटवाल, आशाबाई, काशीराम पटेल, बलीराम, रियालीबाई व भूरीबाई ने संबोधित किया।

एक घंटे कलेक्टर को खड़े रखा, पूछे सवाल

आदिवासियों की समस्या सुनने पहुंचे कलेक्टर सतेंद्रसिंह को आदिवासियों ने एक घंटे तक खड़े रखा और जवाब मांगे। संगठन की माधुरी बेन ने बताया सरकार आदिवासियों के नाम पर योजनाएं चला रहा है लेकिन जमीनी स्तर पर लाभ नहीं मिल रहा। 2008 में वनाधिकार अधिनियम लागू हुआ। इसमें 2005 के पहले तक वन भूमि पर काबिज आदिवासियों को पट्‌टे मिलना थे लेकिन वन विभाग उन्हें अतिक्रमणकारी बता रहा है। आदिवासी फाल्या, मजरो-टोलो तक बिजली नहीं पहुंची, सड़क नहीं है। इन सभी का जवाब आदिवासी मांग रहें है।

इन मुद्दों पर हो रहा आंदोलन