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बेरहमी से पिता की हत्या करने वाले पुत्र को उम्रकैद व एक हजार का जुर्माना

किराना व्यापारी को रास्ते में रोककर कट्टे की नोंक पर लूट करने के मामले में प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश आरके गुप्त की...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 02:00 AM IST
किराना व्यापारी को रास्ते में रोककर कट्टे की नोंक पर लूट करने के मामले में प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश आरके गुप्त की अदालत ने फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मामले के दो लुटेरो को 7-7 साल कैद के साथ 15-15 हजार रुपए के जुर्माना की सजा दी है। मामले में शामिल तीसरे दोषी को 7 साल की कैद के साथ 20 हजार रुपए के जुर्माना की सजा सुनाई है।

10 सितंबर 13 की रात 10 बजे फरियादी खजुराहो का नितिन अग्रवाल सुरई के पास की किराने दुकान बंद कर अपनी बाइक पर सवार होकर राजनगर की ओर जा रहा था। वह जैसे की माता मंदिर के पास पहुंचा पीछे से 25 से 30 साल के बीच के तीन युवक बाइक से आए और उसे रुकने की आवाजा लगाई। नितिन ने पीछे मुड़कर देखा तभी एक युवक ने उसकी बाइक में पैर मार दी। बाइक में पैर मारने से नितिन बाइक से गिर गया। तीनो युवक उसकी कॉलर पकड़कर रोड किनारे खाई में ले गए। वहां पर एक युवक ने नितिन के सिर में लोहे की रोड मारकर घायल कर दिया। नितिन ने चिल्लाने की कोशिश की तो दूसरे युवक ने नितिन के सिर में कट्ट अड़ा दिया। इसके बाद उसकी जेब में रखे 20 हजार रुपए, गले से डेढ़ तोले सोने की चैन, नोकिया कंपनी का मोबाइल लूटकर भाग गए। घायल नितिन चिल्ला रहा था। तभी रास्ते से गुजर रहे राहगीरों ने उसे खजुराहो अस्पताल पहुंचाया। नितिन की रिपोर्ट पर खजुराहो थाना में तीन अज्ञात बदमाशो के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। एडवोकेट लखन राजपूत ने बताया कि मामले की विवेचना के दौरान पुलिस ने मोबाइल की कॉल डिटेल के आधार पर आरोपी काशीप्रसाद उर्फ काशीराम कुशवाहा, रज्जन उर्फ दुर्गेश सेन निवासी कदारी और नंदू उर्फ नंदकिशोर कुशवाहा निवासी पुरानी बस्ती खजुराहो को हिरासत में लेकर पूछताछ की। इसके बाद फरियादी नितिन से आरोपियों की पहचान कराई।

मंदिर से लौटते समय की थी लाठी से हमला कर पिता की निर्मम हत्या

भास्कर संवाददाता | लवकुशनगर

पिता की बेरहमी से हत्या करने के बहुचर्चित मामले में अदालत ने मंगलवार को फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश भारत सिंह रावत की अदालत ने हत्यारे पुत्र को दोषी करार देकर उम्रकैद के एक हजार रुपए के जुर्माना की सजा दी। कोर्ट ने सजा सुनाने के बाद हत्यारे पुत्र को जेल भेज दिया।

लवकशुनगर थाना क्षेत्र के तहत रामूपुरा गांव में रहने वाले ब्रदीप्रसाद कुशवाहा ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसके भाई चिरंजीलाल की मौत हो गई है। चिरंजीलाल के बेटे अमरचंद्र कुशवाहा ने घटना के संबंध में पुलिस को बताया कि वह अपने पिता चिरंजीलाल के साथ भड़ार के शारदा मंदिर गया था। वापस लौटते समय पिता चिरंजीलाल भड़ार गांव में रुक गए थे। वह वापस गांव आ गया था। चिरंजीलाल अभी तक घर नहीं आए। बद्रीप्रसाद अपने भतीजे अमरचंद्र और बेटे के साथ भड़ार हार रेलवे पुल के पास पहुॅचा। सड़क पर चिरंजीलाल खून से लथपथ हालत में पड़ा हुआ था। चिरंजीलाल का शव देखने से दुर्घटना होना लगा रहा था। चौकी पठा में जानकारी देने पर आकाल मृत्यु की सूचना दर्ज की गई।

न्यायाधीश अमरचंद को निर्मम हत्यारा बताया : अभियोजन की ओर से एजीपी प्रवीण द्विवेदी ने पैरवी करते हुए मामले के सभी सबूत और गवाह कोर्ट के सामने पेश किए। अपर सत्र न्यायाधीश भारत सिंह रावत की अदालत ने आरोपी अमरचंद्र को अपने पिता की बर्बरतापूर्ण निर्मम हत्या करने के आरोप का गुनाहगार ठहराया। कोर्ट ने आरोपी अमरचंद्र को आईपीसी की धारा 302 में कठोर आजीवन कारावास के एक हजार रुपए के जुर्माना की सजा सुनाई।

बयानों की पड़ताल की तो हुआ खुलासा

थाना लवकुशनगर ने तत्कालीन थाना प्रभारी कमलेश साहू ने चिरंजीलाल की हत्या का शक होने के कारण मृतक के पुत्र अमरचंद्र से पूंछतांछ की। अमरचंद्र ने पुलिस को बताया कि वह 15 जनवरी 2015 को अपने पिता के साथ भड़ार शारदा मंदिर गया था। रास्ते में प्रीतम मिला था। मंदिर से जब वह घर आ रहे थे। रात करीब 7 बजे रेलवे पुल के पास पहुॅचे तो प्रीतम दूर खड़ा था। उसके पिता चिरंजीलाल बाथरुम करने लगे। अमरचंद्र ने बताया कि उसके पिता उसे देवी देवताओं के यहां ले जाते थे। इससे वह बहुत परेशान हो गया था। चिरंजीलाल कहते थे कि तुम मुझे मार डालो तभी तुम्हें खुशी होगी। यही बात अमरचंद्र के दिमाग में चल रही थी। पिता चिरंजीलाल जैसे ही बाथरुम करके उठा पीछे से अमरचंद्र ने लाठी से जान लेवा हमला कर दिया। प्रीतम बचाने आया तो अमरचंद्र ने उसे जान से मारने की धमकी देकर भगा दिया। अमरचंद्र ने पिता के सीने में चढ़कर मारपीट करके उसकी हत्या की थी। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तार करके अदालत में पेश किया।

व्यापारी से लूट करने 3 बदमाशों को 7-7 साल की कैद

न्यायाधीश आरके गुप्त की कोर्ट ने सुनाया फैसला : अभियोजन की ओर से एजीपी अरुणदेव खरे ने पैरवी करते हुए मामले के सभी सबूत और गवाह कोर्ट में पेश किए। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश आरके गुप्त की अदालत ने फैसला सुनाया कि ऐसे लूट के अपराधों से समाज में असुरक्षा का माहोल निर्मित हुआ है। कोर्ट ने आरोपी काशीप्रसाद, नंदकिशोर और रज्जन को दोषी ठहराते हुए दोषियों को 7-7 साल की कैद के साथ 15-15 हजार रुपए के जुर्माना की सजा सुनाई है। साथ ही आरोपी रज्जन को अवैध कट्टे रखने पर आर्म्स एक्ट की धार 15(1बी)ए में एक साल की कठोर कैद के साथ 5 हजार रुपए के जुर्माना की सजा सुनाई है।