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छतरपुर जिले को है मौका, जनप्रतिनिधि और जनता आगे आए तो मिलेगा मेडिकल कॉलेज

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 02:15 AM IST

बजट-2018 को लेकर हुए टॉक शो में गुरुवार को दैनिक भास्कर के छतरपुर कार्यालय में हुआ। टॉक शो में शहर के एक्सपर्ट,...
बजट-2018 को लेकर हुए टॉक शो में गुरुवार को दैनिक भास्कर के छतरपुर कार्यालय में हुआ। टॉक शो में शहर के एक्सपर्ट, समाजसेवी और प्रोफेसरों सहित व्यवसायियों ने स्पष्ट कहा कि अब छतरपुर को मेडिकल हासिल करने का मौका है। सिर्फ जनप्रतिनिधि जागें तो सालों पुरानी लंबित मांग पूरी हो सकती है। उनका कहना है कि तीन संसदीय क्षेत्र के बीच में एक मेडीकल कॉलेज स्वीकृत करने की नई नीति का एलान किया गया है। छतरपुर जिले पहले ही तीन संसदीय क्षेत्रों में विभाजित है। तीनों क्षेत्रों में से किसी में भी मेडिकल कॉलेज नहीं है।

इस नीति के तहत अब छतरपुर को मेडिकल कॉलेज मिलने की पूरी संभावनाएं है, लेकिन जिले में दखल करने वाले जनप्रतिनिधियों को जागना होगा। सांसद विधायक आगे आएंगे तो सरकार को मेडिकल कॉलेज देना ही होगा। इसमें लोगों ने जहां बजट को किसानों और गरीबों पर केंद्रित बताया तो वहीं मध्यम वर्ग की उपेक्षा करने की भी बात कही। सभी वक्ताओं ने मेडिकल कॉलेज की मांग को पुरजोर तरीके से उठाने के लिए पूरे शहर को एकजुट होने की अपील भी की है।

बजट किसानों की मदद करने वाला

बजट में मैंने देखा कि जो रोजमर्रा की चीजें है। उन पर टैक्स बढ़ा है। जनता जिसको उपयोग कम करती है, उस पर कम हुआ है। इसमें अब आम जनता को परेशान तो होना ही है। किसान खेत में कितनी मेहनत कर रहा, खाद और बीज के दाम देखाें, पर उस हिसाब से दाम नहीं मिल रहा। इससे किसान परेशान है। लुभावना बजट दिया है, यह ऊपर से बहुत खूबसूरत है, लेकिन अंदर से चाबुक लगते है। राजेंद्र अग्रवाल, किसान नेता

बुंदेलखंड को लेकर कुछ खास नहीं

बजट पेश हुआ है, लेकिन इसमें कुछ खास न रहा। बुंदेलखंड को लेकर विशेष तौर पर कोई प्रयास नहीं किए गए, जिससे बजट में बुंदेलखंड को कुछ भी नहीं मिलने की उम्मीदें है। आम आदमी से जुड़ी हुई चीजों पर टैक्स बढ़ाया जा रहा है, जिससे आमजन परेशान हैं। बजट से ऐसा लगा है कि जहां व्यक्ति खड़ा है। संजय शर्मा, अधिवक्ता/समाजसेवी

अब कोर्ट का रास्ता भी खुला

मैंने अभी देखा है बजट, उसमें ऑपरेशन ग्रीन करके एक नया प्रावधान लाया गया। इसमें तीन चीजों में आलू, प्याज और टमाटर को 500 करोड़ का प्रावधान किया गया। इससे लगता है कि यह सब चुनाव को देखते हुए किया गया है क्योकि आज तक ऐसा देखने को नहीं मिला है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा घोषित नीति के बाद भी यदि सरकार नहीं मानी तो अब कोर्ट का दरबाजा भी खटखटाया जा सकता है। - डॉ. जेपी मिश्रा, कॉमर्स विभाग एचओडी

आयकर में छूट की उम्मीद पर निराशा

- पिछले एक साल में हुए आर्थिक बदलाव से सरकार के कल कलेक्शन में इजाफा हुआ है। इस कारण लोगों को आयकर में रियायत की बहुत उम्मीद थी। पर सरकार ने कोई रियायत न देकर मध्यवर्ग विशेषकर कर्मचारी वर्ग को बहुत निराश किया है। आयकर स्लैब को 50 हजार तक बढ़ाया ही जाना चाहिए था। बीके अग्रवाल, आर्थिक विश्लेषक

शिक्षा का स्तर उठाने वाला कदम नहीं

मध्यम वर्ग के लिए एक भी कुछ भी नहीं दिया गया है। सरकारी स्कूलों में न मध्यान्ह भोजन की जरुरत है, न ही कोई योजनाओं कि। सरकार अब स्कूलों में योजनाओं का संचालन बस कर रही है, शिक्षा का स्तर बढ़ाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जा रहा। यदि बजट में शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए कोई प्रयास किए जाते, तो यह बजट रीड़ होती। एकलव्य योजना ठीक है, वाकी सब फिजूल में चला रहे है। - विपिन अवस्थी, स्कूल संचालक

किसानों को पानी और बिजली मिले

किसान को लाइट और पानी मिल जाए। तो उसे किसी की जरुरत नहीं है। किसान अपने आप ऊपर उठेगा और देश की अलग पहचान बनेगी। लेकिन हमारे मध्यप्रदेश में बिजली के इतने अधिक रेट है, कि बेचारा किसान बिजली के बिल ही नहीं चुका पाता है। पानी के लिए संसाधनों की व्यवस्था नहीं कर पा रहा है। किसान कैसे ऊपर उठेगा। सुरेंद्र अग्रवाल, व्यवसायी

स्वास्थ्य पर दिया गया है जोर

बजट में आम आदमी के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया गया है। दुनिया की सबसे बड़ी बीमा योजना शुरू की जा रही है। रेलवे में सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है। यह सभी पहल लोगों को दूरगामी लाभ देंगे। बजट में किसानों को विशेष फोकस किया गया है। इससे भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। जिससे विकास को भी रफ्तार मिलेगी। डॉ सुमति प्रकाश जैन, वाणिज्य एक्सपर्ट

बजट से महिलाओं को हुई निराशा

इस बजट से महिलाओं को कोई उम्मीद नहीं है। इसमें उन्होंने महिलाओं के लिए कुछ भी नहीं सोचा। न ही कोई टैक्स में छूट दी। 2.50 लाख रुपए में तो घर परिवार का खर्च चलेगा, लेकिन इससे ज्यादा टर्नओवर पर उन्होंने टैक्स लगने काे कहा। आज की महंगाई देखी जाए, तो घर परिवार का इतने में खर्च नहीं चल सकता। - अंजू अवस्थी, समाज सेवी

केंद्र सरकार ने बजट में तीन संसदीय क्षेत्रों के बीच नए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत करने की नीति का एेलान खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट के जरिए किया है, छतरपुर उतर सकता है हर मापदंड पर खरा

छतरपुर। टाॅक शो में आए सभी लोग बजट के बारे में चर्चा करते हुए।

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Web Title: छतरपुर जिले को है मौका, जनप्रतिनिधि और जनता आगे आए तो मिलेगा मेडिकल कॉलेज
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