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हाथ देने पर रुक जाती है ‘अद्दा ट्रेन’, 35 मिनट में पूरा करती है 13 किमी का सफर

आम बजट में रेलवे को 1.48 लाख करोड़ रुपए दिए गए। सबसे ज्यादा फोकस सेफ्टी और ट्रैक मेंटेनेंस पर किया गया। 4000 अनमैन्ड...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 02:15 AM IST

आम बजट में रेलवे को 1.48 लाख करोड़ रुपए दिए गए। सबसे ज्यादा फोकस सेफ्टी और ट्रैक मेंटेनेंस पर किया गया। 4000 अनमैन्ड रेलवे क्रॉसिंग को बंद किया जाएगा। ट्रेनों में सीसीटीवी कैमरे फिट किए जाएंगे। पर बुंदेलखंड में एक ऐसी ट्रेन है जो पैसेंजर्स के हाथ देने पर ही रुक जाती है। कोई पैसेंजर अगर छूट जाता है तो भी ट्रेन को रोक दिया जाता है। 35 मिनट में सिर्फ 13 किलोमीटर का सफर तय करने वाली ये ट्रेन पिछले 115 सालों से चल रही है। बुंदेलखंड के जालौन जिले में चलने वाली ‘अद्दा ट्रेन’ कोंच-एट कस्बों को जोड़ती है। नार्थ सेंट्रल रेलवे के झांसी-कानपुर रेलमार्ग पर एट जंक्शन से कोंच रेलवे स्टेशन 13 किलोमीटर दूर है। पिछले 115 सालों से चल रही इस ट्रेन में सिर्फ 3 डिब्बे हैं। यह ट्रेन 35 मिनट में सिर्फ 13 किलोमीटर का सफर तय करती है। इस स्टेशन में सिर्फ यही ट्रेन दौड़ती है, कोई दूसरी नहीं है। इसका सफर छोटा जरूर है, लेकिन रोचक है। कई बार लोग इसे सिर्फ देखने ही आते हैं। ट्रेन को पकड़ने के लिए दूरदराज गांवों के लोग कई घंटों पहले कोंच पहुंचकर खाली रखे डिब्बों में बैठ जाते हैं। खाना तक इसी ट्रेन में बैठकर खाते हैं। ट्रेन चलने में देर होती है तो इसी में सो भी जाते हैं। अददा नाम से मशहूर यह ट्रेन लगभग एक शताब्दी से लोगों के लिए ‘लाइफ लाइन’ बन चुकी है। स्थानीय निवासी देवेंद्र याज्ञिक ने बताया, ‘’एट और कोंच दोनों ही कस्बे हैं। सड़क का रास्ता कच्चा है, इसलिए आने-जाने के लिए लोग इसी ट्रेन का इस्तेमाल करते हैं।

बुंदेलखंड के जालौन जिले में चलने वाली पांच डिब्बाें की अद्दा ट्रेन तीन डिब्बों के साथ अपना रोमांचक सफर पूरा करती है

कांच-ऐटा के बीच चलती है अद्या ट्रेन 35 मिनट में सिर्फ 13 किलोमीटर का सफर तय करती है।

50 से 100 टिकट की होती है बिक्री

एटा जंक्शन के स्टेशन मास्टर वीके त्रिपाठी का कहना है कि 50 से 100 टिकट एक बार के चक्कर में बिक जाते हैं। एक टिकट 5 रुपए का होता है, फिर भी ज्यादातर पैसेंजर बिना टिकट ही बैठ जाते हैं। यह ट्रेन एट रेलवे स्टेशन से कोंच तक सुबह 5:40 से लेकर रात 9:55 पर 5 चक्कर लगाती है। 1 मार्च 2018 से इसका समय बदल दिया जाएगा, इसके आदेश हो चुके हैं। नए समय सुबह 7: 40 बजे चलकर 8:15 पर कोंच पहुंचेगी। वहीं, आखिरी चक्कर शाम 6.40 पर होगा।ट्रेन के संचालन से नहीं निकलती स्टेशन मास्टर, गार्ड की भी सैलरी अंग्रेजों नें 1902 में 3 डिब्बे वाली कोंच-एट शटल की शुरूआत माल ढोने के लिए की थी। जालौन जिले का कोंच कस्बा कभी देश का मुख्य कपास उत्पादन और बिक्री का बहुत बड़ा केन्द्र हुआ करता था। एट में पहले से झांसी-कानपुर को जोड़ती हुई रेल लाइन थी। इसीलिए अंग्रेजी हुकूमत ने कोच मंडी तक रेल लाइन बिछाई। मंडी से अंग्रेज कपास की गांठें, गेहूं और अन्य सामान को कलकत्ता और मुंबई भेजा करते थे। इसे मानचेस्टर भेजकर उम्दा किस्म का कपड़ा बनाकर ब्रिटेन और व भारत के बाजारों में बेचा जाता था।

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