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मप्र के पांच पिछड़े जिलों के विकास की नीति पर कल से नीति आयोग की सीधी नजर होगी

देश के 101 पिछड़े जिलों में मप्र के कई जिलों से छत्तीसगढ़ के जिले बेहतर काम कर रहे हैं। नीति आयोग की सूची में छग के तीन...

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 02:15 AM IST
देश के 101 पिछड़े जिलों में मप्र के कई जिलों से छत्तीसगढ़ के जिले बेहतर काम कर रहे हैं। नीति आयोग की सूची में छग के तीन जिले क्रमशः राजनांदगांव (रैंक-2), महासमुंद (रैंक-7) तथा कोरबा (रैंक-9) हैं जबकि मप्र का राजगढ़ इनके बाद के क्रम पर 15वें स्थान पर है। पिछड़े जिलों में से 30 जिलों को नीति आयोग माॅनिटर करेगा जबकि 50 को मंत्री समूह देखेगा। नीति आयोग की सीधी देखरेख वाले जिलों में मप्र के 5 जिले दमोह, सिंगरौली, विदिशा, बड़वानी व खंडवा शामिल हैं।

शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, इनफ्रास्ट्रक्चर, वित्तीय समावेशन के जिन पांच सेक्टर्स में पिछड़े जिलों की स्थिति जांची गई, उसमें मप्र का छतरपुर छग के कांकेर से भी पीछे रहा है। विदिशा, गुना, खंडवा व बड़वानी कभी सबसे पिछड़े माने जाने वाले बस्तर से भी पीछे हैं।

नीति आयोग द्वारा हाल ही में जारी पिछड़े जिलों की सूची वाले सभी जिलों के अधिकारी 1 अप्रैल से रियल टाइम प्रगति के आंकड़े दर्ज करना शुरू करेंगे। इन आंकड़ों का डैशबोर्ड बनेगा। पिछड़े जिलों की सूची में मप्र के 8 व छग के 10 जिले शामिल हैं जिनमें से 7 बस्तर रीजन के हैं। रिपोर्ट में इन्हें विकास के आकांक्षी जिले कहा गया है। वैसे इसमें देश के सबसे पिछड़े 115 जिलों को शामिल किया जाना है। नीति आयोग की रिपोर्ट इसे प्रधानमंत्री के नया भारत 2020 विजन का हिस्सा बताती है। इसके मुताबिक इन जिलों के विकास की गति को बढ़ाकर जहां इनमें रहने वालो लोगों का जीवन स्तर विकसित जिलों की तरह बेहतर बनाया जा सकता है वहीं देश के मानव विकास सूचकांक को सुधार जा सकेगा। संयुक्त राष्ट्र की 2016 की रिपोर्ट में भारत 188 देशों में 131वंे स्थान पर था।

101 पिछड़े जिलों को विकास के पांच सेक्टर्स में 49 पैमानों पर आंका गया है। पिछड़े जिलों की सूची में देश की बात करें तो विशाखापटनम सबसे ऊपर तथा हरियाणा का मेवात सबसे नीचे रहा है। मप्र का सिंगरौली 99वे क्रम पर है।

मप्र-छत्तीसगढ़ के कौन से जिले को कौन सी रैंक जानें...

 मप्र  छत्तीसगढ़

राजनांदगांव

राजगढ़

महासमुंद

दमोह

कोरबा

छतरपुर

खंडवा

विदिशा

कांकेर

गुना

बस्तर

बीजापुर


कोंडागांव

बड़वानी

विदिशा पीछे, रमन का राजनांदगांव आगे

स्वास्थ्य में छग का कोरबा पिछड़े जिलों में दूसरे स्थान पर आकर बेटर टॉप 20 जिलों में शुमार है तो मप्र का विदिशा 98वां सथान पाकर बॉटम 20 जिलों में है। स्वास्थ्य के लिए 100 में से 30% अंक निर्धारित किए थे जिसमें मातृ स्वास्थ्य, नवजात की सुरक्षा, बच्चों के विकास व स्वास्थ्य सुविधाओं जैसे 22 अलग-अलग मापदंड रखे थे। मप्र के सीएम शिवराज सिंह विदिशा से सांसद रहे हैं तो राजनांदगांव छग के सीएम रमन सिंह का गृहजिला है। राजनांदगांव बुनियादी ढांचे के विकास में ऊपर से तीसरे क्रम पर (बेटर टॉप 20 में ) है। महासमुंद इससे ऊपर है। वित्तीय समावेशन में तो टॉप 5 में छग के ही चार जिले राजनांदगांव, महासमुंद बीजापुर, कांकेर शामिल हैं। विदिशा स्किल डेवलपमेंट में टॉप-5 में शामिल है। इस सेक्टर के लिए 100 में से 5 प्रतिशत अंक रखे गए थे।

दंतेवाड़ा

सिंगरौली