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समूह की महिलाओं ने बचाई बच्ची की जान,अब स्वास्थ है

राजनगर-महोबा रोड पर स्थित ग्राम नांद में समूह की महिलाओं ने एक बच्ची की जान बचाई और अब उसी देखभाल भी महिलाएं...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 02:15 AM IST

राजनगर-महोबा रोड पर स्थित ग्राम नांद में समूह की महिलाओं ने एक बच्ची की जान बचाई और अब उसी देखभाल भी महिलाएं एकजुटता के साथ पूरी तरह से कर रहीं हैं। इस गांव में अधिकाशंतः यादव परिवार के लोग निवास करते हैं।

गांव में दर्शना महिला कल्याण समिति छतरपुर के द्वारा संचालित तेजस्विनी ग्रामीण महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम के अंतर्गत ओमप्रकाश यादव द्वारा अब तक 9 स्वसहायता समूहों का गठन किया जा चुका है।

समूहों के मीटिंग के दौरान ओमप्रकाश यादव द्वारा शासकीय योजनाओं की जानकारी बताई जाती है आैर साथ-साथ सामाजिक मुद्दों पर चर्चा करते हैं। ग्राम नांद के कछियाना मुहल्ले में परिवर्तन तेजस्विनी महिला स्वसहायता समूह का गठन किया गया है। इसी मुहल्ले में एक मानसिक रूप से कमजोर बेटीबाई कुशवाहा, जो समूह से नहीं जुडी हैं।

उसके चार बच्चे हैं और आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि वह अपने बच्चों को भरपेट खाना भी नहीं खिला सकती, न ही बच्चों के स्वास्थ्य की देखरेख कर पाती है। उसकी एक बच्ची जिसका नाम संपत है, 14 माह की हो गई है एवं कुपोषित है। उसका वजन 3 किग्रा था। वह न खड़ी हो पाती है एवं न ही चल पाती है।

मदद

राजनगर-महोबा रोड पर स्थित ग्राम नांद में महिलाओं ने एक बच्ची की जान बचाई और अब देखभाल भी कर रहीं हैं

समूह की महिलाओं का मिला भरपूर सहयोग

समूह के सदस्यों ने बेटीबाई के घर जाकर पोषण आहार के बारे में बताया एवं प्रेरित किया, लेकिन मानसिक रूप से कमजोर होने के कारण उसे अपनी बच्ची की परवाह नहीं थी। इस पर परिवर्तन समूह की महिलाओं ने स्वयं उस बच्ची को गोद लिया। जिस दिन बच्ची को गोद लिया गया, उस समय उसका वनज 3 किग्रा था। समूह की महिलाएं समय-समय पर उसे आंगनबाड़ी केंद्र ले जाकर अपने हाथों से पोषण आहार खिलाने लगीं। अब समूह की सदस्य बारी-बारी से बच्ची को केंद्र में ले जाकर पोषण आहार खिलाती हैं अौर उसे घर छोड़ती हैं। समय-समय पर उसका वजन करवाती हैं। आज की स्थिति में बच्ची अपने पैरों पर खड़ी हो जाती है तथा कुछ चल लेती है। आज उसका वजन 7 किग्रा हो गया है। यह देखकर बच्ची के माता-पिता एवं गांव के लोग खुश हैं। जिंदगी और मौत से लड़ रही बच्ची आज समूह के सहयोग से स्वास्थ्य है तथा समूह की महिलाओं सेे उस बच्ची का लगाव बढ़ गया है और वह उन्हें मां के समान चाहने लगी है।

अब पूर्ण रुप से स्वास्थ्य है बच्ची

समाज में परिवार केवल अपने परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी निभाता है, लेकिन ग्राम के समूह की महिलाओं ने सामाजिक क्षेत्र में बहुत बड़े बदलाव की मिसाल पेश की है। इसके तहत ग्राम की ही मानसिक रुप से विक्षिप्त महिला, जिसकी एक आठ माह की बच्ची थी जो शारीरिक रुप से कुपोषित थी। समूह की महिलाओं ने इस बच्ची के भरण पोषण की जवाबदारी ली। प्रतिदिन कोई न कोई सदस्य इस बच्ची को सुबह का नाश्ता, दूध एवं अन्य पोषक पदार्थ लेकर बच्ची को अपने हाथों से खिलाती थी। यह प्रक्रिया 6 से 8 माह तक चली। महिलाओं के इस अथक प्रयास के द्वारा बच्ची कुपोषित श्रेणी के बाहर आ गई आज बच्ची शारीरिक एवं मानसिक रुप से स्वास्थ्य है। यह कहना गलत न होगा कि परिवर्तन समूह परिवार, समाज एवं गांव में परिवर्तन लाने के लिए प्रयासरत है।

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