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यूपी के जामनी डेम से पानी मिल जाए तो बुझ सकती है टीकमगढ़ की प्यास

टीकमगढ़ में पानी के हालात अभी से खराब हैं। आने वाले समय में लोगों को कहां से पानी नसीब होगा। तालाब, कुएं सूख गए हैं,...

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 02:15 AM IST
टीकमगढ़ में पानी के हालात अभी से खराब हैं। आने वाले समय में लोगों को कहां से पानी नसीब होगा। तालाब, कुएं सूख गए हैं, हैंडपंप जवाब देने लगे हैं। पीने के पानी का बड़ा ही गंभीर संकट है। यदि गर्मी तेज पड़ी तो बरीघाट का पानी भी सूख सकता है। ऐसी स्थिति में यूपी के जामनी डैम से पानी लाया जा सकता है।

नगर पालिका बरीघाट के आठों गेट बंद कर देगी। गेट बंद होने से पानी का बहाव रुक गया है। नगर पालिका अध्यक्ष लक्ष्मी गिरि का कहना है आने वाले समय में जल स्रोत सूख सकते हैं। इससे निपटने के लिए एक्शन प्लान तैयार किया गया है। जिले की सीमा से सटे उत्तरप्रदेश के ग्राम केवलाई, पठा, भदौरा, बानपुर सहित कई अन्य ग्रामों के दर्जनों की संख्या में किसान नदी से पानी चोरी कर चुके हैं। इस कारण बरीघाट का जल स्तर कम हो गया है। शहर में 55 लाख लीटर पानी की सप्लाई की जा रही है। नगर पालिका ने बारीघाट पर फिल्टर प्लांट लगा रखा है। यहां से दो दिन में एक बार पानी की सप्लाई की जा रही है।

ललितपुर के जामनी डैम से लिया जा सकता है पानी : यूपी के ललितपुर जिले में 1973 के आसपास जामनी डैम का निर्माण कराया गया था। इसके बाद 1974 में एमपी और यूपी के बीच एक संधि पर करार हुआ था। इसके तहत डैम की भराव क्षमता के हिसाब से 17 फीसदी पानी टीकमगढ़ को दिया जाएगा। अब यदि पानी की जरुरत पड़ती है तो ललितपुर जिला प्रशासन से पानी की मांग की जा सकती है।

किसी वार्ड में 3 तो किसी में 5 दिन के अंतराल से पेयजल सप्लाई : पानी की कमी को देखते हुए किसी वार्ड में 3 तो किसी वार्ड में 5 दिन के अंतराल से पेयजल सप्लाई की जा रही है। चकरा में रहने वाले पीयूष दीक्षित का कहना है कि शहर में पेयजल सप्लाई नाममात्र की जा रही है। लोगों को पीने के लिए भरपूर पानी तक नहीं मिल रहा है। वार्ड नंबर 27 के मुईन सिद्दकी ने बताया कि 3 से 4 दिन के अंतराल से नल खुल रहे हैं। सीएमओ ओपी दुबे का कहना है कि इस बार बारिश की स्थिति बहुत ही खराब रही है। औसत से आधी बारिश भी नहीं हो सकी है। बरीघाट में पानी की चोरी हो रही है। इस कारण दिनों दिन पानी घट रहा है। पानी चोरी रोकने के लिए जिला प्रशासन को पत्र लिखा है।

11 कराेड़ की योजना पर पानी फिरा : पेयजल समस्या से निपटने के लिए ग्रामीण यांत्रिकी विभाग ने 11 करोड़ की कार्ययोजना तैयार की है। यदि यह प्रस्ताव पास हो जाता है तो दो चरणों में काम कराया जाएगा। पहला चरण 1 अक्टूबर से 31 मार्च तथा दूसरा चरण 1 अप्रैल से 30 जून तक चलेगा।

पहले चरण में उन गांवाें काे शामिल किया गया है, इनमें 312 बसाहटें शामिल हैं। विभाग के कार्यपालन यंत्री जितेंद्र मिश्रा का कहना है कि योजना मंजूर होते ही काम शुरु कर दिया जाएगा। सरकार ने योजना तो मंजूर कर लिए लेकिन बजट में कटौती कर दी है। अभी तक आधी राशि भी नहीं मिली है।

टीकमगढ़। हैंडपंप से पानी भरते लोग।

नल जल योजनाओं

पर काम शुरु

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने बंद पड़ी नल जल योजनाओं को सुधरना चालू कर दिया है। दो लाख रुपए से कम सुधार लागत वाली बंद नल जल योजनाओं का संधारण, सुधार, मरम्मत संबंधित काम ग्राम पंचायत द्वारा ही कर लिया जाता है। नल से जल, आज और कल कार्यक्रम के तहत सागर संभाग के 6 पीएचई खण्डों क्रमशः सागर, खुरई, दमोह (सागर मण्डल) एवं पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ (पन्ना मण्डल) में राज्य सरकार द्वारा 600 नल जल योजनाओं की एकमुश्त प्रशासकीय मंजूरी जारी की गई है। इन 600 नल जल योजनाओं की लागत 72 करोड़ 27 लाख रुपए है। टीकमगढ़ खंड में 3000 मीटर केसिंग पाइप और 200 सब मर्सिबल पंप की जरूरत है।

किसानों ने नहीं की

बोवनी

पानी की कमी के चलते कई किसानों ने बोवनी नहीं की है। सिंचाई के लिए पानी नहीं है। माडूमर के रामलाल कुशवाहा का कहना है कि नलकूप खनन पर पाबंदी लगा दी गई है। गांव के नदी, तालाब सूख चुके हैं। खेत में सिंचाई के अन्य साधन नहीं है। ऐसे में बोवनी नहीं की जा सकती है। नयाखेड़ा के अजुद्दी का कहना है कि खेत सूख रहे हैं। सिंचाई के लिए पानी नहीं है। हम लोग पानी कहां से लाएं।