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दो साल पहले स्वीकृत 52 उपस्वास्थ्य केंद्रों को नहीं मिल पा रही जमीन

जिले में इन दिनों मेडिकल कॉलेज की मांग को लेकर सरगर्मी जोरों पर है, लेकिन यहां तो दो साल पहले स्वीकृत हुए 52...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 02:25 AM IST
जिले में इन दिनों मेडिकल कॉलेज की मांग को लेकर सरगर्मी जोरों पर है, लेकिन यहां तो दो साल पहले स्वीकृत हुए 52 उपस्वास्थ्य केंद्रों को प्रशासन जमीन उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में उपस्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण नहीं हो पा रहा है, जिससे डिलेवरी सहित अन्य मामलों में ब्लॉक या जिला मुख्यालय पर ग्रामीणों को जाना पड़ रहा हैं। जिले में स्वास्थ्य सुविधाअों की हकीकत किसी से छिपी हुई नहीं है। ग्रामीण अंचलों में हालात और बदतर बने हुए है। ऑटो और अस्पताल पहुंचते ही गेट पर डिलेवरी होने के कई मामले आए दिन प्रकाश में आते रहते है, इसका यहीं कारण है कि गांव में ही उपस्वास्थ्य केंद्र नहीं खुल पा रहें।

गौरतलब है कि राज्य शासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सके। इसके लिए प्रदेशभर में 2000 उपस्वास्थ्य केंद्र खोलने की स्वीकृति 2016 में प्रदान की थी, जिसमें 52 गांव छतरपुर जिले के शामिल थे, जहां पर उपस्वास्थ्य केंद्र खोले जाने थे। लेकिन यहां प्रशासन अब तक इन केंद्रों के लिए जमीन ही उपलब्ध नहीं करा सका, ताे उपस्वास्थ्य केंद्र खुलेंगे। 2016 में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा कलेक्टर और सीएमएचओ को पत्र जारी करते हुए व्यवस्थाएं जुटाने के लिए कहा था। लेकिन इन उपस्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण को लेकर जिले का स्वास्थ्य अमला बिलकुल भी गंभीर नहीं है।

किराए के भवन में संचालित करने का किया था आदेश : 2016 में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग मंत्रालय के उप सचिव उपेंद्र नाथ शर्मा ने कलेक्टर और सीएमएचओ को एक पत्र जारी कर कहा था कि अभी इन उपस्वास्थ्य केंद्रों को खोलने के लिए भवन नहीं है। उपसचिव श्री शर्मा ने कहा है कि किराए के भवनों की व्यवस्था कर इन उप स्वास्थ्य केंद्रों का यथाशीघ्र संचालन प्रारंभ होगा। विभाग द्वारा निर्धारित किराया भवन मालिक को विभाग अदा करेंगा। लेकिन विभाग दावा भी खोखला साबित हुआ और 52 में से किसी भी उपस्वास्थ्य केंद्रों को किराए के भवन में नहीं चलाया गया, इससे कि ग्रामीणों को सुविधा मिले। इस मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अफसर बिलकुल भी गंभीर नहीं हैं।

जमीन पर नहीं मिलता कब्जा: स्वास्थ्य विभाग की निर्माण शाखा में पदस्थ इंजीनियर अंशुल खरे का कहना है कि जमीन मिलने से क्या होता है, यहां से भले ही आवंटन कर दिया जाता है, लेकिन मौका स्थल पर किसी न किसी का कब्जा होता है। इससे हमें निर्माण करने में दिक्कत होती है। हम पूरी तरह से जमीन देखकर और कब्जा लेने के बाद ही प्रक्रिया करते है। अभी करीब 20 उपस्वास्थ्य केंद्रों के लिए हम जमीन देख चुके है और 10 के टेंडर भी लग चुके है।

इन स्थानों पर स्वीकृत है उपस्वास्थ्य केंद्र

विकासखंड: छतरपुर : बंधीकलां, ढड़ारी, छिरावल, मौराहा, गंगायच।

विकासखंड: गौरिहार : किशनपुरा, हनुखेड़ा, बहादुरपुर, धवारी, सीलप, घटरा, कंदेला, नेहरा, परेई, महवारा।

विकासखंड: बड़ामलहरा : हलावनी, बैल्दा, बूदौर, बमनीघाट, सरकनां, सिगरामपुरा, धरमपुरा, सूरजपुरकलां, देवपुर, सतपारा, सूरजपुरा रोड-रंजिता

विकासखंड: बिजावर : पिपट, मामौन, गुढा, जटाशंकर, बम्हौरी।

विकासखंड: राजनगर : - पहरा, बैनीगंज, पीरा, इमलाहा, गौमाकलां, बरा।

विकासखंड: नौगांव : - बन्छौरा, डिलनिया, बैदार, जोरन, सहानिया, मलका, सिगरावनकलां, खुर्दा।

विकासखंड: बकस्वाहा : - निमानी, ढमरवा।

विकासखंड: लवकुशनगर : पीरा, अंधियारीबारी, हरद्वार, हथौहा, बैरागियापुखरी।

जैसे-जैसे जमीन मिल रही, वैसे ही लग रहे टेंडर

प्रभारी सीएमएचओ डॉ बीएस बाजपेई का कहना है कि राजस्व विभाग द्वारा जैसे-जैसे जमीन उपलब्ध कराई जा रही है, वैसे ही हम टेंडर प्रक्रिया के लिए उच्चाधिकारियों को लेख कर रहे है। अभी तक 10 उपस्वास्थ्य केंद्रों के टेंडर लग चुके है।

पत्र मिलते ही प्रक्रिया शुरू कर देते हैं

अपर कलेक्टर दिनेश कुमार मौर्य का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्राें को खोलने के लिए गांव में जहां भी सरकारी जमीन है, उपलब्ध कराई जा रही है। हमें जैसे ही पत्र प्राप्त हो रहे हैं, हम नियमानुसार कार्रवाई कर रहे हैं।