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अन्य स्थानों की अनुमति और धसान नदी के घाटों में पनडुब्बी व मशीनों से निकाल रहे रेत

प्रशासन रेत के उत्खनन पर कोई भी नीति बनाए, लेकिन नदी से रेत निकालने की जो नीति और नियति रेत माफियाओं ने बना रखी है,...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 02:25 AM IST
प्रशासन रेत के उत्खनन पर कोई भी नीति बनाए, लेकिन नदी से रेत निकालने की जो नीति और नियति रेत माफियाओं ने बना रखी है, रेत माफिया ठीक उसी नीति और नियति पर धसान नदी के घाटों पर अवैध तरीके से रेत का अवैध उत्खनन कर रहे हैं। नई नीति के तहत शासन ने मशीनों के द्वारा नदियों से रेत निकालने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके बावजूद गर्रौली क्षेत्र से निकली धसान नदी का सीना चीरकर नदी के घाटों में लगभग 15 जगहों पर पनडुब्बी लिफ्टर मशीन एवं टू-20 मशीन लगाकर रेत का अवैध उत्खनन जारी है।

मजे की बात तो यह है कि शासन ने जिस खदान की लीज दी हुई है, माफियाओं के द्वारा उन घाटों से दो किमी अंदर दिन रात रेत का अवैध उत्खनन किया जा रहा है। घाटों से रात में रोजाना अवैध तरीके से 300 से 400 ट्रक, हाइवा, डंपर में अवैध रेत लादकर बेला, गौना के फर्जी पिटपास के जरिए नौगांव होते हुए महोबा, कानपुर लखनऊ ले जाई जा रही है। इन घाटों से पिछले कई महीने से लगातार उत्खनन किया जा रहा है, लेकिन किसी भी अधिकारी एवं पुलिस ने घाटों पर जाकर कार्रवाई नहीं की।

दो हजार रुपए हर चक्कर लगता है खर्चा: अवैध रेत का परिवहन कर रहे एक ट्रक ड्राइवर ने बताया कि रेत भरवा रहे माफियाओं को पुलिस प्रशासन के नाम पर हर चक्कर के दो हजार रुपए जमा होते हैं। दो हजार रुपए में रेत माफिया मध्यप्रदेश के नौगांव थाना, गर्रौली चौकी, अलीपुरा थाना, उत्तरप्रदेश के अजनर, कुलपहाड़, महोबा, श्रीनगर सहित 6 थानों का ठेका रेत माफिया के द्वारा लिया जाता है। रेत माफिया के द्वारा ठेका लेने के बाद अवैध रेत का परिवहन कर रहे ट्रक को सुरक्षित उत्तरप्रदेश में उनकी हद में भेजने की जिम्मेदारी रहती है।

प्रशासन की उदासीनता पर उठे सवाल :नौगांव एसडीएम, तहसीलदार के साथ राजस्व अमले ने मिलकर जिस तरह से पिछले दो दिनों में हरपालपुर जाकर अवैध रेत पर कार्रवाई की है वह काफी सराहनीय है, लेकिन दूसरी तरफ यही रेत से भरे 300 से 400 ट्रक रोजाना नौगांव नगर से निकल रहे हैं, लेकिन प्रशासन के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। प्रशासन की यह दोहरी नीति प्रशासन की कार्रवाई पर सवालियां निशान लगाती है, प्रशासन की कार्रवाई पर लोगों का तो यहां तक कहना है कि कही प्रशासन के द्वारा की जा रही कार्रवाई रेत ठेकेदार के इशारे पर तो नहीं हो रही है। प्रशासन द्वारा की जा रही कार्रवाई से प्रशासन को फायदा हो न हो रेत का परिवहन बंद हो न हो लेकिन प्रशासन की कार्रवाई से रेत के ठेकेदार को फायदा अवश्य है।

रोजाना लाखों की रायल्टी चोरी

इन अवैध रेत खदानों से रोजाना लाखों रुपए के राजस्व की चोरी हो रही है। यहां से रोजाना 300 से 400 ट्रक अवैध रेत का परिवहन फर्जी पिट्पास के जरिए किया जा रहा है। यह रेत का खेल पिछले कई महीने से चल रहा है, जिसमें रेत माफियाओं के द्वारा प्रशासन से सांठगांठ करके फर्जी एवं बिना पिट्पास के अवैध रेत का परिवहन किया जा रहा है, जिसमें हर माह शासन को लगभग 3 से 4 करोड़ के राजस्व की हानि हो रही है।

नौगांव। धसान नदी के घाटों में पनडुब्बी व मशीनों से निकाल रहे रेत।

नौगांव में परिवहन और

घाट में अवैध उत्खनन

पर प्रशासन की खुली छूट

ग्राम गर्रौली से निकली धसान नदी पर छतरपुर जिले और टीकमगढ़ जिले के घाटों से फर्जी पिट्पास के माध्यम से रोजाना रात के अंधेरे में और दिन के उजाले में अवैध उत्खनन करते हुए 3 सैकड़ा से अधिक ट्रक, डम्पर वाहन रोजाना अवैध रेत लोड करके फर्जी पिट्पास के द्वारा नगर से होकर गुजरते हुए परिवहन किया जा रहा है। यह सभी ट्रक अवैध रेत लोड करके नगर के रास्ते से होते हुए लखनऊ , कानपुर, सीतापुर जैसे महानगरों के लिए जाते हैं| नगर से होकर जाने वाले इन ट्रकों पर प्रशासन के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं जाती है, जबकि दूसरी ओर एसडीएम, तहसीलदार के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम ने बीते महीनों में कई बार हरपालपुर क्षेत्र में जाकर अवैध रेत के परिवहन में शिकंजा कसने में लगे हुए हैं। वहीं दूसरी ओर नौगांव से ही रोजाना सैकड़ों ट्रक नैगुंवा और बिलहरी होते हुए उत्तरप्रदेश की सीमा में दाखिल होते हैं। इन ट्रकों को न तो राजस्व विभाग पकड़ता और न ही पुलिस आखिर ऐसा क्या तालमेल हो जाता है।