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टीकमगढ़ में मेडिकल कॉलेज की संभावनाएं खत्म, अब केंद्र से उम्मीद

राजीव रंजन श्रीवास्तव | टीकमगढ़ केंद्र सरकार के बाद मप्र सरकार ने भी टीकमगढ़ के लोगों को झटका दे दिया है। ना तो...

Danik Bhaskar | Mar 02, 2018, 02:30 AM IST
राजीव रंजन श्रीवास्तव | टीकमगढ़

केंद्र सरकार के बाद मप्र सरकार ने भी टीकमगढ़ के लोगों को झटका दे दिया है। ना तो केंद्र ने टीकमगढ़ में मेडिकल कॉलेज की सौगात दी और ना ही प्रदेश सरकार ने। दोनों सरकारों के बजट में टीकमगढ़ शामिल नहीं है।

प्रदेश सरकार ने एक दिन पहले अपने बजट में 9 मेडिकल कॉलेज की खोलने की घोषणा की है, उनमें टीकमगढ़ क्या, बुंदेलखंड के एक भी शहर को जगह नहीं मिली है। यानी पिछड़े बुंदेलखंड को लेकर दोनों सरकारें गंभीर नहीं हैं। इससे यह तय हो गया है कि टीकमगढ़ में मेडिकल कॉलेज खोलने की संभावनाएं फिलहाल खत्म हो चुकी हैं। अब छतरपुर और दमोह के प्रतिस्पर्धा चल रही है।

प्रदेश सरकार ने बजट में दतिया और विदिशा में मेडिकल कॉलेज की बात कही है। इन दोनों शहरों को सिर्फ राजनैतिक चश्में से देखा गया है। विदिशा से भोपाल की दूरी महज 55 किलोमीटर है। दोनों शहरों को जोड़ने हाइवे है, भरपूर ट्रेनें हैं। भोपाल में मेडिकल कॉलेज के अलावा बेहतर चिकित्सा सुविधाएं पहले से हैं। ऐसे में यहां मेडिकल कॉलेज खोलने की वजह मुख्यमंत्री की दिलचस्पी के अलावा कुछ नहीं है। विदिशा से मुख्यमंत्री का गहरा नाता है। यहां से सांसद रह चुके हैं।

खेती-बाड़ी इसी जिले में है। दतिया की बात करें तो यहां से ग्वालियर की दूरी 75 किलोमीटर है। स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में ग्वालियर पहले से ही साधन संपन्न रहा है। दतिया में मेडिकल कॉलेज खोलने का कारण सरकार में खास दखल रखने वाले मंत्री नरोत्तम मिश्रा का गृह जिला होना है। इसके अलावा जिन शहरों में मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की गई। वह इसलिए की, क्योंकि स्थानीय नेताओं की राजनैतिक इच्छाशक्ति प्रबल थी।

टीकमगढ़ में इसका अभाव साफतौर पर दिखाई दे रहा है। जिले में मेडिकल कॉलेज की मांग को लेकर 15 दिन से आंदोलन चल रहा है, लेकिन अभी तक कुछ भी हाथ नहीं लगा है। संघर्ष समिति का भी राजनीतिकरण हो गया है। विधायक केके श्रीवास्तव का कहना है कि हमारी सरकार है। फिर भी सरकार उनकी नहीं सुन रही है। लगातार उपेक्षा हो रही है।

प्रदेश सरकार यहां खोलेगी मेडिकल कॉलेज

1.विदिशा 2.शहडोल

3.खंडवा 4.सिवनी

5.रतलाम 6. दतिया

7.शिवपुरी 8. सतना

राजीव रंजन श्रीवास्तव | टीकमगढ़

केंद्र सरकार के बाद मप्र सरकार ने भी टीकमगढ़ के लोगों को झटका दे दिया है। ना तो केंद्र ने टीकमगढ़ में मेडिकल कॉलेज की सौगात दी और ना ही प्रदेश सरकार ने। दोनों सरकारों के बजट में टीकमगढ़ शामिल नहीं है।

प्रदेश सरकार ने एक दिन पहले अपने बजट में 9 मेडिकल कॉलेज की खोलने की घोषणा की है, उनमें टीकमगढ़ क्या, बुंदेलखंड के एक भी शहर को जगह नहीं मिली है। यानी पिछड़े बुंदेलखंड को लेकर दोनों सरकारें गंभीर नहीं हैं। इससे यह तय हो गया है कि टीकमगढ़ में मेडिकल कॉलेज खोलने की संभावनाएं फिलहाल खत्म हो चुकी हैं। अब छतरपुर और दमोह के प्रतिस्पर्धा चल रही है।

प्रदेश सरकार ने बजट में दतिया और विदिशा में मेडिकल कॉलेज की बात कही है। इन दोनों शहरों को सिर्फ राजनैतिक चश्में से देखा गया है। विदिशा से भोपाल की दूरी महज 55 किलोमीटर है। दोनों शहरों को जोड़ने हाइवे है, भरपूर ट्रेनें हैं। भोपाल में मेडिकल कॉलेज के अलावा बेहतर चिकित्सा सुविधाएं पहले से हैं। ऐसे में यहां मेडिकल कॉलेज खोलने की वजह मुख्यमंत्री की दिलचस्पी के अलावा कुछ नहीं है। विदिशा से मुख्यमंत्री का गहरा नाता है। यहां से सांसद रह चुके हैं।

खेती-बाड़ी इसी जिले में है। दतिया की बात करें तो यहां से ग्वालियर की दूरी 75 किलोमीटर है। स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में ग्वालियर पहले से ही साधन संपन्न रहा है। दतिया में मेडिकल कॉलेज खोलने का कारण सरकार में खास दखल रखने वाले मंत्री नरोत्तम मिश्रा का गृह जिला होना है। इसके अलावा जिन शहरों में मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की गई। वह इसलिए की, क्योंकि स्थानीय नेताओं की राजनैतिक इच्छाशक्ति प्रबल थी।

टीकमगढ़ में इसका अभाव साफतौर पर दिखाई दे रहा है। जिले में मेडिकल कॉलेज की मांग को लेकर 15 दिन से आंदोलन चल रहा है, लेकिन अभी तक कुछ भी हाथ नहीं लगा है। संघर्ष समिति का भी राजनीतिकरण हो गया है। विधायक केके श्रीवास्तव का कहना है कि हमारी सरकार है। फिर भी सरकार उनकी नहीं सुन रही है। लगातार उपेक्षा हो रही है।

केंद्रीय मंत्री रहते हैं टीकमगढ़ में, पैरवी कर रहे हैं छतरपुर की

संसदीय क्षेत्र टीकमगढ़ व इसके अासपास 100 से 150 किमी की दूरी तक कोई भी मेडिकल कॉलेज नहीं है। छतरपुर जिला अस्पताल इसके लिए एक बेहतर विकल्प है। यहां के जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज में परिवर्तित किया जाए। वित्त मंत्री ने बजट में बताया है कि तीन लोकसभाओं में एक मेडिकल कॉलेज स्वीकृत होगा। इसके हिसाब से छतरपुर टीकमगढ़ए खजुराहो व दमोह लोकसभा क्षेत्रों में विभाजित है। इस हिसाब से छतरपुर जिला मेरे संसदीय क्षेत्र में सबसे अच्छा है। छतरपुर जिला अस्पताल की तारीफ के कसीदे पढ़ते हुए उन्होंने लिखा है यहां लगभग 2500 वर्ग मीटर में है। इसके साथ ही 2000 वर्ग मीटर खुला क्षेत्र है। यहां नर्सों का ट्रेनिंग सेंटर भी बना है। यहां सभी आधारभूत सुविधाएं पहले से है। इसके अलावा सबसे पिछले जिलों में भी छतरपुर जिला शामिल है। इसके अलावा बुंदेलखंड का सबसे बड़ा जिला होने के नाते छतरपुर के जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज में परिवर्तित किया जाए।

अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में

केंद्र और राज्य सरकार मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए स्वतंत्र हैं। प्रदेश सरकार ने मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए 9 शहरों का ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही नए शहरों की गुजांइश लगभग खत्म हो गई है। केंद्र सरकार ने मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए शहरों के नाम का चयन तो नहीं किया है, लेकिन मापदंड तय कर दिए हैं। इसके हिसाब से मेडिकल कॉलेज वहां खुलेगा, जहां तीन संसदीय क्षेत्र लगते हों। इस मापदंड पर छतरपुर और दमोह जिले का हटा सौ फीसदी खरा उतर रहा है। अब गेंद पूरी तरह से केंद्र सरकार के पाले में हैं। दमोह के लिए वित्त मंत्री जयंत मंत्री और सांसद प्रहलाद पटेल पैरवी कर रहे हैं। वहीं छतरपुर के लिए केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. वीरेंद्र खटीक एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं।

अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में

केंद्र और राज्य सरकार मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए स्वतंत्र हैं। प्रदेश सरकार ने मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए 9 शहरों का ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही नए शहरों की गुजांइश लगभग खत्म हो गई है। केंद्र सरकार ने मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए शहरों के नाम का चयन तो नहीं किया है, लेकिन मापदंड तय कर दिए हैं। इसके हिसाब से मेडिकल कॉलेज वहां खुलेगा, जहां तीन संसदीय क्षेत्र लगते हों। इस मापदंड पर छतरपुर और दमोह जिले का हटा सौ फीसदी खरा उतर रहा है। अब गेंद पूरी तरह से केंद्र सरकार के पाले में हैं। दमोह के लिए वित्त मंत्री जयंत मंत्री और सांसद प्रहलाद पटेल पैरवी कर रहे हैं। वहीं छतरपुर के लिए केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. वीरेंद्र खटीक एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं।