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अब निजी स्कूल संचालक 10 प्रतिशत से ज्यादा फीस नहीं बढ़ा सकेंगे, निर्देश जारी

मप्र में निजी विद्यालयों को हर साल ली जाने वाली फीस में अनियमित बढ़ोत्तरी को रोकने के लिए मध्यप्रदेश निजी...

Danik Bhaskar | Mar 02, 2018, 02:30 AM IST
मप्र में निजी विद्यालयों को हर साल ली जाने वाली फीस में अनियमित बढ़ोत्तरी को रोकने के लिए मध्यप्रदेश निजी विद्यालय विधेयक-2017 को राज्य शासन ने स्वीकृति दे दी है। यह विधेयक 22 फरवरी से लागू हो गया है। विधेयक के प्रमुख प्रावधान के अनुसार विद्यालय प्रबंधन पूर्ववर्ती वर्ष के लिए नियत फीस के लिए 10 प्रतिशत तक ही फीस में वृद्धि कर सकेगा।

फीस में 10 से 15 प्रतिशत वृद्धि कराने के लिए प्रस्ताव जिला समिति को भेजना होगा। यदि पिछले वर्ष के शुल्क के तुलना में फीस में वृद्धि 15 प्रतिशत से अधिक प्रस्तावित की गई हो तो इसके लिये आयुक्त लोक शिक्षण की अध्यक्षता में गठित राज्य समिति इसकी मंजूरी देगी। फीस तथा अन्य विषयों के लिये गठित जिला समिति निजी विद्यालय के प्रबंधन और अध्ययनरत छात्रों के फीस संबंधी नियमों के उल्लंघन और शिकायत प्रकरणों की जांच कर सकेगी। समिति अपनी जांच में यह पाती है कि संबंधित स्कूल प्रबंधन द्वारा निर्धारित नियम से अधिक फीस ली गई है तो समिति छात्र के पालक को फीस राशि लौटाने का आदेश दे सकेगी। सरकार की ओर से उप सचिव केके द्विवेदी ने इस नोटिफिकेशन में स्पष्ट रूप से कहा है कि प्राइवेट स्कूल पिछले वर्ष की तुलना में वर्ष 2018-19 में 10 प्रतिशत तक की ही फीस वृद्धि कर सकते हैं। इससे स्कूली शिक्षा कई मायनों में महंगी हो जाएगी। शिक्षा जगत से जुड़े लोगों के मुताबिक सिर्फ स्कूलों की फीस ही नहीं, बल्कि बाकी फीस व सामान की कीमतों में भी इस साल बढ़ोतरी होगी। क्योंकि, स्टेशनरी व ड्रेस मटेरियल और बस चालक भी स्कूल फीस का हवाला देकर अपने सेवा शुल्क को बढ़ाने की तैयारी में हैं।

सिर्फ फीस नहीं, हर तरह से महंगी होगी एजुकेशन फीस : नोटिफिकेशन में कहा कि सत्र 2018-19 में स्कूल प्रबंधन 10% तक फीस बढ़ा सकेंगे। 2019-20 से वृद्धि 10-15% तक होने पर कलेक्टर की कमेटी और 15% से ज्यादा वृद्धि पर आयुक्त लोक शिक्षण मंजूरी देंगे।

स्टेशनरी : बड़े स्कूलों ने अपने यहां की किताब, कॉपी व अन्य स्टेशनरी के लिए कुछ दुकानें फिक्स कर रखी हैं। स्टेशनरी मटेरियल में भी इस साल 10 प्रतिशत तक की वृद्धि होगी।

परिवहन : बच्चों के परिवहन व्यवस्था की फीस स्कूल में ही जमा होती है और बस ऑपरेटरों की मांग पर स्कूल प्रबंधन हर साल इस फीस में भी बढ़ोतरी कर देते हैं।

ड्रेस : स्कूल ड्रेस की कीमतों में भी हर साल बढ़ोतरी होती है। एक ड्रेस कारोबारी के मुताबिक इस साल भी 8 से 15 प्रतिशत तक कीमतें पिछली साल की तुलना में बढ़ेंगी।

ज्यादा फीस वसूली तो 6 लाख तक पेनाल्टी

नियमों के उल्लंघन या फिर ज्यादा वसूली पर कलेक्टर या आयुक्त लोक शिक्षण की अध्यक्षता वाली समिति स्कूल संचालक पर पेनाल्टी लगा सकेंगी। पहली गलती पर 2 लाख रुपए तक और गलती दोहराने पर 4 लाख रुपए तक पेनाल्टी लगेगी। दो बार के बाद के प्रकरणों में समिति 6 लाख रुपये तक पेनाल्टी लगा सकेगी। इसके साथ ही निजी विद्यालय की मान्यता निलंबित और रद्द करने की अनुशंसा जिला समिति सक्षम अधिकारी को कर सकेगी।

ज्यादा फीस वसूली तो 6 लाख तक पेनाल्टी

नियमों के उल्लंघन या फिर ज्यादा वसूली पर कलेक्टर या आयुक्त लोक शिक्षण की अध्यक्षता वाली समिति स्कूल संचालक पर पेनाल्टी लगा सकेंगी। पहली गलती पर 2 लाख रुपए तक और गलती दोहराने पर 4 लाख रुपए तक पेनाल्टी लगेगी। दो बार के बाद के प्रकरणों में समिति 6 लाख रुपये तक पेनाल्टी लगा सकेगी। इसके साथ ही निजी विद्यालय की मान्यता निलंबित और रद्द करने की अनुशंसा जिला समिति सक्षम अधिकारी को कर सकेगी।

भास्कर संवाददाता | छतरपुर

मप्र में निजी विद्यालयों को हर साल ली जाने वाली फीस में अनियमित बढ़ोत्तरी को रोकने के लिए मध्यप्रदेश निजी विद्यालय विधेयक-2017 को राज्य शासन ने स्वीकृति दे दी है। यह विधेयक 22 फरवरी से लागू हो गया है। विधेयक के प्रमुख प्रावधान के अनुसार विद्यालय प्रबंधन पूर्ववर्ती वर्ष के लिए नियत फीस के लिए 10 प्रतिशत तक ही फीस में वृद्धि कर सकेगा।

फीस में 10 से 15 प्रतिशत वृद्धि कराने के लिए प्रस्ताव जिला समिति को भेजना होगा। यदि पिछले वर्ष के शुल्क के तुलना में फीस में वृद्धि 15 प्रतिशत से अधिक प्रस्तावित की गई हो तो इसके लिये आयुक्त लोक शिक्षण की अध्यक्षता में गठित राज्य समिति इसकी मंजूरी देगी। फीस तथा अन्य विषयों के लिये गठित जिला समिति निजी विद्यालय के प्रबंधन और अध्ययनरत छात्रों के फीस संबंधी नियमों के उल्लंघन और शिकायत प्रकरणों की जांच कर सकेगी। समिति अपनी जांच में यह पाती है कि संबंधित स्कूल प्रबंधन द्वारा निर्धारित नियम से अधिक फीस ली गई है तो समिति छात्र के पालक को फीस राशि लौटाने का आदेश दे सकेगी। सरकार की ओर से उप सचिव केके द्विवेदी ने इस नोटिफिकेशन में स्पष्ट रूप से कहा है कि प्राइवेट स्कूल पिछले वर्ष की तुलना में वर्ष 2018-19 में 10 प्रतिशत तक की ही फीस वृद्धि कर सकते हैं। इससे स्कूली शिक्षा कई मायनों में महंगी हो जाएगी। शिक्षा जगत से जुड़े लोगों के मुताबिक सिर्फ स्कूलों की फीस ही नहीं, बल्कि बाकी फीस व सामान की कीमतों में भी इस साल बढ़ोतरी होगी। क्योंकि, स्टेशनरी व ड्रेस मटेरियल और बस चालक भी स्कूल फीस का हवाला देकर अपने सेवा शुल्क को बढ़ाने की तैयारी में हैं।

सिर्फ फीस नहीं, हर तरह से महंगी होगी एजुकेशन फीस : नोटिफिकेशन में कहा कि सत्र 2018-19 में स्कूल प्रबंधन 10% तक फीस बढ़ा सकेंगे। 2019-20 से वृद्धि 10-15% तक होने पर कलेक्टर की कमेटी और 15% से ज्यादा वृद्धि पर आयुक्त लोक शिक्षण मंजूरी देंगे।

स्टेशनरी : बड़े स्कूलों ने अपने यहां की किताब, कॉपी व अन्य स्टेशनरी के लिए कुछ दुकानें फिक्स कर रखी हैं। स्टेशनरी मटेरियल में भी इस साल 10 प्रतिशत तक की वृद्धि होगी।

परिवहन : बच्चों के परिवहन व्यवस्था की फीस स्कूल में ही जमा होती है और बस ऑपरेटरों की मांग पर स्कूल प्रबंधन हर साल इस फीस में भी बढ़ोतरी कर देते हैं।

ड्रेस : स्कूल ड्रेस की कीमतों में भी हर साल बढ़ोतरी होती है। एक ड्रेस कारोबारी के मुताबिक इस साल भी 8 से 15 प्रतिशत तक कीमतें पिछली साल की तुलना में बढ़ेंगी।

आदेश का होगा पालन


आॅपरेटर ड्यूटी पर उपस्थित नहीं हुए तो होंगे बर्खास्त

टीकमगढ़।
गेहूं उपार्जन हेतु सीपीसीटी उत्तीर्ण कंप्यूटर आपरेटरों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। गेहूं उपार्जन कार्य में संलग्न जो कंप्यूटर आॅपरेटर कार्य पर उपस्थित नहीं हो रहे हैं, उनको नोटिस देकर उनकी सेवाएं समाप्त की जाएंगी। उपायुक्त सहकारिता विभाग एसपी कौशिक ने बताया है कि इस संंबंध में अधिक जानकारी हेतु उपायुक्त सहकारिता कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि गेहूं उपार्जन कार्य में संलग्न जो कम्प्यूटर आॅपरेटर बिना किसी कारण कार्य पर उपस्थित नहीं ं हो रहे हैं, वे अगर कार्य पर वापस नही होते हैं, तो उनके खिलाफ नियमानुसार बर्खास्त की कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही शासन को अवगत कराकर इनके खिलाफ नियम के तहत कार्रवाई करने के लिए आदेश जारी किया जाएगा।