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स्व सहायता समूह में बने उत्पाद बिकेंगे शॉपिग मॉल में

भास्कर संवाददाता | बल्देवगढ़ समाज की ऐसी गरीब महिलाएं जो अपने परिवार का भरण-पोषण करने में असमर्थ हैं। उन्हें अब...

Danik Bhaskar | Mar 02, 2018, 02:30 AM IST
भास्कर संवाददाता | बल्देवगढ़

समाज की ऐसी गरीब महिलाएं जो अपने परिवार का भरण-पोषण करने में असमर्थ हैं। उन्हें अब महिला स्व-सहायता समूहों से जोड़ा जाएगा। आजीविका मिशन के तहत काम कर रहे महिला स्वसहायता समूहों की अोर से बनाए गए उत्पादों को अब शॉपिंग मॉल में बेचा जाएगा। प्रदेश सरकार महिला स्वसहायता समूहों में जुड़ने वाली गरीब महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए यह कदम उठा रही है।

प्रदेश में वर्तमान में 1.69 लाख स्व सहायता समूह काम कर रहे हैं। सभी गरीब महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़ने के लिए यह काम किया जा रहा है। इसके साथ ही स्व-सहायता समूहों की ओर से बनाए गए उत्पादों के वितरण व उनके प्रचार प्रचार की रणनीति बनाई जाएगी। बड़े शॉपिंग मॉल में स्व-सहायता समूहों के उत्पादों के लिए स्थान तय किया जाएगा। इन स्व-सहायता समूहों को स्कूल गणवेश निर्माण का कार्य देने पर विचार किया जा रहा है। सरकारी खरीदी में स्व-सहायता समूहों के उत्पादों को खरीदने की व्यवस्था की जाएगी। स्व-सहायता समूहों को माइक्रो फाइनेंस कम्पनियों और बैंकों से ऋण लेने में होने वाली दिक्कतों को दूर किया जाएगा। इसके अलावा सभी जिलों में महिला स्व-सहायता समूहों के सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।

महिला स्वसहायता समूहों में जुड़ने वाली गरीब महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए शासन उठा रही कदम

आजीविका भवन भी बनाए जाएंगे

अब ग्रामीण इलाकों की महिलाओं को लुभाने की तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार ने अगले एक साल में ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सभी विकासखंडों में लाखों की लागत से आजीविका भवन तैयार करने का फैसला किया है। प्रदेश सरकार की नजरें अब ऐसी महिलाओं पर हैं जो ग्रामीण इलाके से आने के बाद आय के साधन नहीं होने पर अपने पति या फिर परिवार के मुखिया पर निर्भर है. सरकार ने उन्हें सशक्त बनाने के साथ अब सौ करोड़ की राशि खर्च करने की तैयारी की है। इसके लिए पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग ने महिला स्व-सहायता समूह को मदद देने के साथ ही उनके बैठने के लिए हर ब्लाॅक पर सर्वसुविधायुक्त आजीविका भवन बनाने का फैसला किया है।

भास्कर संवाददाता | बल्देवगढ़

समाज की ऐसी गरीब महिलाएं जो अपने परिवार का भरण-पोषण करने में असमर्थ हैं। उन्हें अब महिला स्व-सहायता समूहों से जोड़ा जाएगा। आजीविका मिशन के तहत काम कर रहे महिला स्वसहायता समूहों की अोर से बनाए गए उत्पादों को अब शॉपिंग मॉल में बेचा जाएगा। प्रदेश सरकार महिला स्वसहायता समूहों में जुड़ने वाली गरीब महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए यह कदम उठा रही है।

प्रदेश में वर्तमान में 1.69 लाख स्व सहायता समूह काम कर रहे हैं। सभी गरीब महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़ने के लिए यह काम किया जा रहा है। इसके साथ ही स्व-सहायता समूहों की ओर से बनाए गए उत्पादों के वितरण व उनके प्रचार प्रचार की रणनीति बनाई जाएगी। बड़े शॉपिंग मॉल में स्व-सहायता समूहों के उत्पादों के लिए स्थान तय किया जाएगा। इन स्व-सहायता समूहों को स्कूल गणवेश निर्माण का कार्य देने पर विचार किया जा रहा है। सरकारी खरीदी में स्व-सहायता समूहों के उत्पादों को खरीदने की व्यवस्था की जाएगी। स्व-सहायता समूहों को माइक्रो फाइनेंस कम्पनियों और बैंकों से ऋण लेने में होने वाली दिक्कतों को दूर किया जाएगा। इसके अलावा सभी जिलों में महिला स्व-सहायता समूहों के सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।

हर ब्लाॅक पर खर्च होंगे 50 से 60 लाख रुपए

इस योजना के तहत शुरुआती तौर पर सरकार अगले एक साल में 200 ब्लाॅक का चयन करेगी। इन ब्लॉक में आजीविका भवन बनाकर तैयार किए जाएंगे। हर ब्लॉक में 50 से 60 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे। इस आजीविका मिशन पर करोड़ों खर्च कर सरकार राज्य की महिलाओं को इन स्वसहायता समूह के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना है।

बनगांय के हृदयेश का कृषि वैज्ञानिक पद पर हुआ चयन

छतरपुर। नौगांव रोड में बनगांय गांव के एक युवक ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल की एआरएस परीक्षा उत्तीर्ण कर अपने गांव, जिला और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। इस परीक्षा को उत्तीर्ण करने से उन्हें कृषि वैज्ञानिक बनाया जाएगा।

वैज्ञानिक बन जाने से गांव सहित पूरे जिले का नाम रौशन किया है। कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल द्वारा जारी चयन सूची में रामदयाल अनुरागी व लीला देवी के बेटे हृदयेश अनुरागी का चयन कृषि वैज्ञानिक पद पर किया गया है।