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अस्पताल में समय पर नहीं आते डॉक्टर, मरीज परेशान

3 वर्ष पहले
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जिला मुख्यालय से 17 किमी दूर स्थित गढ़ीमलहरा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ डॉक्टर समय से ड्यूटी पर नहीं आते है। जिससे वहां का स्टाफ इन दिनों बहुत परेशान है। ड्यूटी स्टाफ इलाज कराने आ रहे मरीजों तक से अभद्रता करने लगा है।

गुरुवार की दोपहर जब 108 वाहन के कर्मचारी ऊजरा गांव की एक नवजात बच्ची को लेकर दिखाने पहुंचे तो ड्यूटी पर मौजूद एएनएम उससे झल्ला उठी और बोलीं इस अस्पताल में कोई डॉक्टर नहीं रहता। यहां मरीज मत लाया करो। जब परिजनों ने एएनएम से कहा कि मरीज की भर्ती पर्चा बनाकर जिला अस्पताल रैफर कर दो। परंतु इस बात के लिए भी वह नहीं मानी।

गढ़ीमलहरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ड्यूटी डाॅक्टर द्वारा निर्धारित समय से ड्यूटी न करने से वहां के मरीज सहित स्वास्थ्य कर्मी परेशान हैं। गुरुवार की दोपहर ऊजरा गांव में दीपिका पति ब्रह्मप्रकाश द्विवेदी की 5 दिन की बच्ची को ज्वाइंडिस हो गया। नवजात की हालत गंभीर होने पर परिजनों ने महाराजपुर 108 वाहन से गढ़ीमलहरा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र इलाज कराने पहंुचे।

जहां मौजूद एएनएम प्रभा यादव से मरीज को भर्ती कराने के लिए कहा पर डॉक्टर मौजूद न होने के कारण एएनएम ने ईएमटी मूरत सिंह राजपूत से कहा अस्पताल में कोई डॉक्टर नहीं रहता। यहां मरीज मत लाया करो। इसके बाद नवजात ईएमटी ने एडमिट पर्चा बनाकर मरीज को रैफर करने के लिए कहा पर वह नहीं मानी। इसके बाद 108 वाहन के स्टाफ ने मरीज को लाकर जिला अस्पताल में भर्ती कराया।

छतरपुर। मरीज काे लेजाते हुए।

भास्कर संवाददाता। छतरपुर

जिला मुख्यालय से 17 किमी दूर स्थित गढ़ीमलहरा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ डॉक्टर समय से ड्यूटी पर नहीं आते है। जिससे वहां का स्टाफ इन दिनों बहुत परेशान है। ड्यूटी स्टाफ इलाज कराने आ रहे मरीजों तक से अभद्रता करने लगा है।

गुरुवार की दोपहर जब 108 वाहन के कर्मचारी ऊजरा गांव की एक नवजात बच्ची को लेकर दिखाने पहुंचे तो ड्यूटी पर मौजूद एएनएम उससे झल्ला उठी और बोलीं इस अस्पताल में कोई डॉक्टर नहीं रहता। यहां मरीज मत लाया करो। जब परिजनों ने एएनएम से कहा कि मरीज की भर्ती पर्चा बनाकर जिला अस्पताल रैफर कर दो। परंतु इस बात के लिए भी वह नहीं मानी।

गढ़ीमलहरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ड्यूटी डाॅक्टर द्वारा निर्धारित समय से ड्यूटी न करने से वहां के मरीज सहित स्वास्थ्य कर्मी परेशान हैं। गुरुवार की दोपहर ऊजरा गांव में दीपिका पति ब्रह्मप्रकाश द्विवेदी की 5 दिन की बच्ची को ज्वाइंडिस हो गया। नवजात की हालत गंभीर होने पर परिजनों ने महाराजपुर 108 वाहन से गढ़ीमलहरा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र इलाज कराने पहंुचे।

जहां मौजूद एएनएम प्रभा यादव से मरीज को भर्ती कराने के लिए कहा पर डॉक्टर मौजूद न होने के कारण एएनएम ने ईएमटी मूरत सिंह राजपूत से कहा अस्पताल में कोई डॉक्टर नहीं रहता। यहां मरीज मत लाया करो। इसके बाद नवजात ईएमटी ने एडमिट पर्चा बनाकर मरीज को रैफर करने के लिए कहा पर वह नहीं मानी। इसके बाद 108 वाहन के स्टाफ ने मरीज को लाकर जिला अस्पताल में भर्ती कराया।

मरीज रैफर न होने से डाटते हैं ड्यूटीरत डॉक्टर
महाराजपुर 108 वाहन के ईएमटी मूरत सिंह और अफजल शेख ने बताया कि जब भी गढ़ीमलहरा या महाराजपुर क्षेत्र में कोई एक्सीडेंट होता है या गंभीर रूप से बीमार है तो यहां के ड्यूटी डॉक्टर कभी नहीं मिलते। जो भी स्वास्थ्य कर्मी मिलता है वह किसी भी मरीज का पर्चा बनाने या देखने तक से इंकार कर देता है। यदि इन स्वास्थ्य केंद्रों के मरीजों को सीधे जिला अस्पताल लेकर पहुंचते हैं तो इमरजेंसी डॉक्टर मरीज का रैफर पर्चा मांगता है। न देने पर वह 108 वाहन के स्टाफ को डांटता है। इस तरह से 108 वाहन के सभी कर्मचारी बहुत परेशान है। इस बात की शिकायत कई बार उच्च अधिकारियों से भी की गई पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।



अन्य कामों के कारण नहीं रूक पाते डॉक्टर
इस मामले में सीएमएचओ डॉ. वीएस वाजपेयी का कहना है कि पीएसपी के डॉक्टरों को एमएलसी होने के कारण न्यायालय में पेशी करने जाना पड़ता है। साथ ही डॉक्टरों को विभाग की मीटिंगें भी करनी पड़ती है। इसके साथ ही विभाग के अन्य काम भी करने पड़ते हैं। इस कारण वहां के मरीजों और 108 वाहन के कर्मचारियों को कुछ परेशानी का सामना तो करना ही पड़ेगा।

20 मिनिट के लिए आए थे डॉक्टर:
गढ़ीमलहरा अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ ने बताया कि डॉ आनंद चौरिया गुरुवार की सुबह करीब साढ़े 9 बजे अाए थे। करीब 20 मिनिट रुकने के बाद चुनाव में ड्यूटी बताते हुए यहां से चले गए। गढ़ीमलहरा के लोगों ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ डॉक्टर रोजाना 10 बजे के बाद आते हैं। करीब 1 बजे तक रुकने के बाद वापस छतरपुर चले जाते हैं। उनका निवास छतरपुर में होने के कारण क्षेत्र के लोग बहुत परेशान हैं।

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