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2010-19 सबसे गर्म दशक; धरती का तापमान 1.10 बढ़ा, एक चौथाई समुद्र के अम्लीय होने से भोजन और नौकरियों का खतरा

Chhatarpur News - विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने मंगलवार को अपनी सालाना रिपोर्ट जारी की। इसमें कहा गया है कि साल 2010-19 का दशक...

Dec 04, 2019, 08:16 AM IST
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने मंगलवार को अपनी सालाना रिपोर्ट जारी की। इसमें कहा गया है कि साल 2010-19 का दशक इतिहास में सबसे गर्म होगा। बीते 40 वर्षों में इस दशक ने गर्मी के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इस साल वैश्विक तापमान औद्योगिकीकरण से पहले के दौर की तुलना में 1.1 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है। बढ़ते कार्बन उत्सर्जन को इसका मुख्य कारण मानते हुए चेतावनी दी गई है कि इससे तापमान में और इजाफा होगा और यह स्थिति पृथ्वी के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकती है। समुद्रों का तापमान और उसका जलस्तर भी रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ा है। दुनिया के समुद्र 150 साल पहले की तुलना में 26% अम्लीय हो गए हैं, जिसके कारण लोगों के भोजन और नौकरियों पर असर पड़ सकता है।

डब्ल्यूएमओ के महासचिव पेटरी तलास ने कहा, ‘एक और साल, एक और रिकॉर्ड। साल 2015 में जो हमने सबसे ऊंचा तापमान दर्ज किया था, वह 2020 में टूटने वाला है। लू, बाढ़, सूखा और चक्रवात की घटनाएं पहले सदियों तक नहीं हाेती थीं, लेकिन बढ़ते कार्बन उत्सर्जन और ग्रीन हाउस गैसाें के कारण तापमान बढ़ने से आए दिन इसके दुष्परिणाम देखने को मिल रहे हैं। यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और जापान में लू, द. अफ्रीका में महातूफान, ऑस्ट्रेलिया, कैलिफोर्निया के जंगलों में आग की घटना इसका ताजा उदाहरण है। पिछले 40 साल में हर साल पिछले से अधिक गर्म रहा है।



रिपोर्ट में कहा गया कि इस साल के अंत तक मौसम में बदलाव के चलते विस्थापित होने वालाें की संख्या 2.2 करोड़ पहुंच सकती है।



इधर, संयुक्त राष्ट्र ने पिछले हफ्ते जारी बयान में कहा कि दुनिया को कार्बन उत्सर्जन में हर साल 7.6% की कटौती की जरूरत है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो 2030 तक तापमान 1.5 डिग्री बढ़ सकता है। अगर ऐसा हुआ तो यह सबसे भयावह स्थिति होगी।

जलवायु परिवर्तन से 2.2 करोड़ लोग विस्थापित हो सकते हैं

असर: मानसून देरी से आया और गया; जून में बारिश कम, बाद में ज्यादा

डब्ल्यूएमओ ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का ही असर है कि भारत में मानसून का आना और जाना देरी से हुआ। जून के महीने में बारिश में भारी कमी रही, जबकि अगले महीनों में भारी बारिश हुई। इसके अलावा मध्य अमेरिका, उत्तरी कनाडा, उत्तरी रूस और दक्षिण पश्चिम एशिया में असामान्य भारी बारिश हुई है। इसके कारण इन इलाकों में लगातार बाढ़ आ रही है। इसके उलट इंडोनेशिया-ऑस्ट्रेलिया में भीषण सूखा रहा।

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