सूखने लगे बोर, 80 फीट नीचे उतरा भूजल स्तर, बंद हुई 80 नल जल योजनाएं बंद, 1 हजार हैंडपंप ने दम तोड़ा

Chhatarpur News - जिले में जल संकट अभी से मंडराने लगा है। गर्मी आने के पहले ही जल संकट ने दस्तक दे दी है। गावों में पेयजल समस्या बढ़ती...

Bhaskar News Network

Mar 17, 2019, 03:51 AM IST
LIDHORA News - mp news bore to dry ground water level dropped below 80 feet closed 80 tap water schemes 1 thousand handspumps broken
जिले में जल संकट अभी से मंडराने लगा है। गर्मी आने के पहले ही जल संकट ने दस्तक दे दी है। गावों में पेयजल समस्या बढ़ती जा रही है। लेकिन विभाग के अफसर सब ओके होने का राग अलाप रहे हैं। जबकि हकीकत कुछ और ही है। पंचायत और गांवों की नल-जल योजनाएं बंद होने से सर्दी के मौसम में ही जल संकट गहरा गया है।

सरकारी आंकड़ों के हिसाब से जिले में 664 नल-जल योजनाएं हैं। जिन में से विभाग 584 योजनाओं को चालू बता रहा है। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि इन योजनाओं में से 123 में स्पाट पर जल प्रदाय होता, केवल 80 नलजल योजनाएं ही बंद हैं।

यह है वास्तविकता : जिले की हर चौथी पंचायत की नलजल योजना से वहां के वाशिंदों को शिकायत है। यानी 584 में से 146 नल जल येाजनाएं बंद हैं। कहीं मोटर का अभाव तो कही पानी की समस्या से गांव के लोग जूझ रहे है। कई जगहों पर तो यह देखने में आया है माह में मात्र चार-पांच दिन ही नल-जल योजना का पानी लोगों को मिल पाता है और बाकी दिन सप्लाई बंद पड़ी रहती है। ऐसा है जिले की 355 पंचायतों को हाल। जबकि कुल पंचायतें 755 है। वहीं बंद पड़े हैंडपंप नहीं सुधारे गए, नल जल योजनाएं भी लापरवाही की भेंट चढ़ रहीं है। आलम यह है कि पेयजल आपूर्ति के लिए लगाए गए हैण्डपंप बंद पड़े हैं, कहीं फाउंडेशन टूटा पड़ा है तो कही नल का आधा हिस्सा ही गायब हो गया है। लोग परेशान है क्योंकि उन्हें कई किलोमीटर दूर से पीने का पानी लेकर आना पड़ रहा है। जिले में भूजल स्तर तेजी से नीचे गिरने के कारण इस बार फरवरी में ही कुएं, नदी, नाले व तालाब सूख गए हैं। जल स्तर 120 फीट नीचे चला गया है। जिले में 10822 हैंडपंप में 550 बंद है। जाे चालू हैं उनमें पर्याप्त पानी नहीं है। पीएचई अधिकारी मान रहे है कि जिले में इस बार भी सामान्य से 6 इंच औसत बारिश कम हुई। इससे गर्मी में जलसंकट प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बनेगा है। जलस्रोत रिचार्ज नहीं हो सके, कुओं में जो पानी था उससे किसानों ने सिंचाई कर ली है। इस बार औसत42 इंच से बारिश 6 इंच कम हुई। इसके कारण भी जल स्तर में गिरावट मुख्य कारण माना जा रहा है।

सुरेंद्र यादव | सागर

जिले में जल संकट अभी से मंडराने लगा है। गर्मी आने के पहले ही जल संकट ने दस्तक दे दी है। गावों में पेयजल समस्या बढ़ती जा रही है। लेकिन विभाग के अफसर सब ओके होने का राग अलाप रहे हैं। जबकि हकीकत कुछ और ही है। पंचायत और गांवों की नल-जल योजनाएं बंद होने से सर्दी के मौसम में ही जल संकट गहरा गया है।

सरकारी आंकड़ों के हिसाब से जिले में 664 नल-जल योजनाएं हैं। जिन में से विभाग 584 योजनाओं को चालू बता रहा है। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि इन योजनाओं में से 123 में स्पाट पर जल प्रदाय होता, केवल 80 नलजल योजनाएं ही बंद हैं।

यह है वास्तविकता : जिले की हर चौथी पंचायत की नलजल योजना से वहां के वाशिंदों को शिकायत है। यानी 584 में से 146 नल जल येाजनाएं बंद हैं। कहीं मोटर का अभाव तो कही पानी की समस्या से गांव के लोग जूझ रहे है। कई जगहों पर तो यह देखने में आया है माह में मात्र चार-पांच दिन ही नल-जल योजना का पानी लोगों को मिल पाता है और बाकी दिन सप्लाई बंद पड़ी रहती है। ऐसा है जिले की 355 पंचायतों को हाल। जबकि कुल पंचायतें 755 है। वहीं बंद पड़े हैंडपंप नहीं सुधारे गए, नल जल योजनाएं भी लापरवाही की भेंट चढ़ रहीं है। आलम यह है कि पेयजल आपूर्ति के लिए लगाए गए हैण्डपंप बंद पड़े हैं, कहीं फाउंडेशन टूटा पड़ा है तो कही नल का आधा हिस्सा ही गायब हो गया है। लोग परेशान है क्योंकि उन्हें कई किलोमीटर दूर से पीने का पानी लेकर आना पड़ रहा है। जिले में भूजल स्तर तेजी से नीचे गिरने के कारण इस बार फरवरी में ही कुएं, नदी, नाले व तालाब सूख गए हैं। जल स्तर 120 फीट नीचे चला गया है। जिले में 10822 हैंडपंप में 550 बंद है। जाे चालू हैं उनमें पर्याप्त पानी नहीं है। पीएचई अधिकारी मान रहे है कि जिले में इस बार भी सामान्य से 6 इंच औसत बारिश कम हुई। इससे गर्मी में जलसंकट प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बनेगा है। जलस्रोत रिचार्ज नहीं हो सके, कुओं में जो पानी था उससे किसानों ने सिंचाई कर ली है। इस बार औसत42 इंच से बारिश 6 इंच कम हुई। इसके कारण भी जल स्तर में गिरावट मुख्य कारण माना जा रहा है।

यह हैं वे 5 मुख्य कारण जिससे भूजल स्तर गिरा


जनता की सुनो,अफसर नहीं सुनते






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