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भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के जन्म पर बजी बधाइयां, जमकर थिरके श्रद्धालु

एक वर्ष पहले
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ग्राम कुसमा में श्रीराम हनुमान यज्ञ का आयोजन चल रहा है। इस मौके पर संगीतमय श्रीमद भागवत कथा भी चल रही है। कथा के चौथे दिन पं. धीरेंद्र कृष्ण महाराज ने बामन अवतार, श्रीराम जन्म एवं श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाई। भगवान श्री राम और श्रीकृष्ण के जन्म की कथा पर श्रद्धालुओं ने जमकर नृत्य किया। बधाइयां बजने लगीं, चहुंओर जयकारे गूंज उठे।

राजा बलि की कथा सुनाते हुए धीरेंद्र कृष्ण महाराज ने कहा कि राजा बलि ने अपने गुरु शुक्राचार्य की सहायता से तीनों लोकों को जीत लिया था। तीनों लोकों में राजा बलि का राज चलता था। देवताओं और देवराज इंद्र की विनय पर भगवान बामन रूप धारण कर राजा बलि की यज्ञशाला में पहुंचे। राजा बलि ने स्वागत किया और दक्षिणा मांगने को कहा। बामन भगवान ने साढ़े 3 पग जमीन मांगी, राजा बलि के आग्रह पर उन्होंने 3 पग में तीनों लोकों को नाप लिया। आधा पग बाकी रहने पर राजा बलि ने अपना शरीर ही नपवा दिया। बामन भगवान ने रानी से कुछ वरदान मांगने को कहा तो रानी ने उनसे नित्यप्रति दर्शन पाने का वर मांगा। इस प्रकार देवताओं को स्वर्ग वापस मिल गया।भगवान श्रीराम जन्म एवं श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाते हुए कथा व्यास धीरेंद्र कृष्ण ने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म अधिक मात्रा में बढ़ जाता है। तब भगवान धर्म की रक्षा के लिए विविध रूपों में जन्म लेकर धर्म की पुनः स्थापना करते हैं।

अपनी हत्या के भय से बहन को जेल में डाल दिया था

श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाते हुए महाराज धीरेंद्र कृष्ण ने बताया कंस का इतना अत्याचार बढ़ गया था कि अपनी मृत्यु के भय से अपनी बहन को भी कैद कर बंदी ग्रह में डाल दिया और अपनी बहन देवकी की सात संतानों को उसी के सामने मार डाला। तब श्रीविष्णु जी ने देवकी की आठवीं संतान के रूप में अवतार लिया और भादों की घुप अंधेरी रात में जेल से नंद के घर अदला बदली कर फिर जेल आए और पुनः जेल के ताले बंद हो गए।

माया रूपी कन्या बोली-तुझे मारने वाले ने जन्म ले लिया है

शिशु रूपी जब योग माया का रुदन सुना तो पहरे दारों ने महाराज कंस को खबर दी देवकी के आठवीं संतान का जन्म हुआ तो कंस कारागार पहुंचा और देवकी की संतान को छीन उसे पछाड़ कर मारना चाहा तो योग माया रूपी कन्या गायब हो गई और योग माया ने नंद के घर कंस को मारने वाले का जन्म हो गया बताते हुए अंतर्ध्यान हो गई।

से करो वह मुशीबत में किसी न किसी रूप में सहायता करने के लिए जरूर आते हैं।


राजा बलि की कथा सुनाते हुए धीरेंद्र कृष्ण महाराज ने कहा कि राजा बलि ने अपने गुरु शुक्राचार्य की सहायता से तीनों लोकों को जीत लिया था। तीनों लोकों में राजा बलि का राज चलता था। देवताओं और देवराज इंद्र की विनय पर भगवान बामन रूप धारण कर राजा बलि की यज्ञशाला में पहुंचे। राजा बलि ने स्वागत किया और दक्षिणा मांगने को कहा। बामन भगवान ने साढ़े 3 पग जमीन मांगी, राजा बलि के आग्रह पर उन्होंने 3 पग में तीनों लोकों को नाप लिया। आधा पग बाकी रहने पर राजा बलि ने अपना शरीर ही नपवा दिया। बामन भगवान ने रानी से कुछ वरदान मांगने को कहा तो रानी ने उनसे नित्यप्रति दर्शन पाने का वर मांगा। इस प्रकार देवताओं को स्वर्ग वापस मिल गया।भगवान श्रीराम जन्म एवं श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाते हुए कथा व्यास धीरेंद्र कृष्ण ने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म अधिक मात्रा में बढ़ जाता है। तब भगवान धर्म की रक्षा के लिए विविध रूपों में जन्म लेकर धर्म की पुनः स्थापना करते हैं।

जब रावण के भय से यज्ञ धर्म कर्म नहीं कर पा रहे थे। साधु संत, देवता, नर नारी परेशान हो गए, तब भगवान ने राजा दशरथ के यहां अपने अंशों सहित धर्म रक्षार्थ अवतार लिया और रावण का परिवार सहित वध किया। केवल शरणागत विभीषण को छोड़ कर और पुनः धर्म का प्रसार कर बैकुंठ धाम चले गए।

कथावाचक ने कहा कि ईश्वर को सच्चे मन से पुकारने पर वह सहायता करने के लिए जरूर आते हैं। इसलिए प्रभु की आराधना करना है तो सच्चे मन से करो वह मुशीबत में किसी न किसी रूप में सहायता करने के लिए जरूर आते हैं।

महाराजपुर। भागवत कथा का श्रवण करते श्रद्धालू।
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