रेज्ड बेड प्लांटर से फसलों की सीधी बुआई करें, जलभराव में भी मिलेगा बेहतर उत्पादन

Chhatarpur News - कृषि विशेषज्ञ बोले- यदि खेत तैयार हो तो शुरू कर दें बुआई एग्रो डेस्क | खंडवा मानसून की विदाई के भी आसमान से बरसे...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 07:41 AM IST
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कृषि विशेषज्ञ बोले- यदि खेत तैयार हो तो शुरू कर दें बुआई

एग्रो डेस्क | खंडवा

मानसून की विदाई के भी आसमान से बरसे पानी ने रबी सीजन की बुआई को एक महीने पीछे धकेल दिया है। हर साल अक्टूबर से रबी सीजन की शुरुआत हो जाती है, नवंबर तक सरसों व लहसुन की बोवनी पूरी हो जाती है। जबकि 30 फीसदी तक गेहूं की बुआई हो जाती है लेकिन इस साल खरीफ के पूरे सीजन बारिश हुई है, रबी सीजन की शुरुआती डेढ़ महीने तक जारी रही है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यहीं छुटपुट बारिश 15-20 नवंबर तक होने की संभावना है। ऐसे में किसान गेहूं सहित अन्य फसलों की बुआई को लेकर असमंजस में हैं क्योंकि खरीफ सीजन ने पहले मात दे दी है। इधर, कृषि विशेषज्ञों का मानना है यदि खेती बोवनी योग्य हो गए है तो बुआई कर सकते हैं। हलकी बारिश का उत्पादन पर असर नहीं पड़ेगा। उधर, कृषि विशेषज्ञों का मानना है खरीफ सीजन में मक्के की खेती के बाद दलहन एवं तिलहन फसल को फसल चक्र में शामिल करने पर आगामी फसल में उत्पादन अच्छा मिलेगा। उधर, मक्के की खेती रेज्ड बेड पद्धति व अन्य फसलों को जीरो टिलेज पद्धति से सीधी बुआई करने की सलाह दी है, ताकि जलभराव की स्थिति में भी फसलों का अच्छा उत्पादन ले सके।

ये हैं जीरो टिलेज मशीन

जीरो टिलेज मशीन से गेहूं की बुआई के लिए खेत की जुताई की जरूरत नहीं होती है। जीरो टिलेज से पंक्ति में गेहूं की बुआई की जाती है। बीज के साथ ही खाद भी एक साथ डाल दिया जाता है। इस विधि से समय की बचत होती है। धान कटने के तुरंत बाद गेहूं लगाने में आसानी होती है। पौधे से पौधे की दूरी सही रहने से उत्पादन बढ़ता है। जीरो टिलेज मशीन ट्रैक्टर से जोड़ कर चलाया जाता है।

ये हैं रेज्ड बेड प्लांटर मशीन

इस प्लांटर के माध्यम से बेड पर दो या तीन लाइन बीज एवं खाद की बुआई करते हैं। 25 फीसदी खाद व बीज की बचत होती है। 30 फीसदी सिंचाई जल की बचत होती है। कम खरपतवार उगते हैं। मृदा में नमी संरक्षण बनाए रखता है। इस प्लांटर से बुआई करने के बाद निंदाई-गुड़ाई आसानी से की जा सकती है। बुआई करने के लिए 35 एचपी से ज्यादा ट्रैक्टर की जरूरत होती है।

कृषि विभाग का अनुमान : औसत से गेहूं का उत्पादन ज्यादा हो सकती है

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि रबी सीजन में गेहूं और चने पर इस साली भी किसानों का ज्यादा फोकस है। इस साल अतिवृष्टि के कारण खेतों में अब तक नमी है। किसान पिछली फसल का सही ढंग से उत्पादन नहीं ले पाए है, वहीं, अगली फसल के लिए जुताई भी नहीं हो सकी है। जिन किसानों ने जुताई भी की हे तो बारिश के कारण फिर गीली हो गई है। गेहूं की फसल के लिए अधिकतम 20 अक्टूबर तक समय उपयुक्त है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो सका।

पूर्वानुमान : कंपकंपाने वाली सर्दी के लिए रहें तैयार, रबी फसलों को मिलेगा फायदा

देशभर में इस बार कंपकंपाने वाली सर्दी रहेगी। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) का दावा है कि अत्यधिक बारिश, देरी से मानसून की वापसी और कमजोर अलनीनो ने इस साल मौसम का मिजाज बदल दिया है। इस बार ठंड जल्दी आएगी और ज्यादा दिन तक शीतलहर चलेगी। इसके चलते समूचे उत्तरभारत, गुजरात, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल को जबरदस्त कड़ाके की ठंड से दो-चार होना होगा।

आईएमडी के अनुसार सदियों में हवा जमीन से समुद्र की ओर चलती है। लेकिन इस बार पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंसर) दिसंबर से जनवरी तक उत्तरी व पूर्वी भारत में चलने वाली शीतलहर का प्रभाव तय करेगा। अफगानिस्तान और पाकिस्तान से आने वाली उत्तरीय हवाओं के और ज्यादा ठंडे होने की संभावना बढ़ गई है। इससे पूरे उत्तर भारत को सर्दी के दौरान भारी बर्फबारी और बारिश की मार झेलनी होगी। हिमाचल प्रदेश में इस साल जल्दी बर्फबारी शुरू होने से मौसम विभाग अधिकांश राज्यों में कड़ाके की ठंड पड़ने का अनुमान लगाया है। मध्यप्रदेश के कई जिलों में अक्टूबर मध्य से ही तापमान 20 डिग्री के नीचे आ गया है, जो संभवत: नवंबर पहले सप्ताह से होता था। आंकड़ों को देखा जाए तो उत्तरप्रदेश, बिहार और राजस्थान में पहले से ही 1970 से 2018 तक सबसे ज्यादा ठंड पड़ने का लगातार ट्रेंड दिख रहा है। इस साल मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ भी कड़ाके की ठंड की चपेट में रहेंगे।

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