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बकस्वाहा हीरे खदान के लिए निवेशक तलाश रही सरकार

3 वर्ष पहले
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आस्ट्रेलिया की हीरा कंपनी रियो टिंटों द्वारा छतरपुर जिले के बकस्वाहा के बंदर प्रोजेक्ट से निकाले गए करीब 27 हजार कैरेट हीरों का एग्जीविशन पन्ना के महेंद्र भवन में रखा गया है। जिसमें देश की नामी गिरामी कंपनियां शामिल हो रही हैं। एक्जीविशन के लिए महेंद्र भवन को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। दरअसल मप्र सरकार बंदर प्रोजेक्ट को चालू करने के लिए निवेशक की तलाश कर रही है। इसमें कई कंपनियों ने रुचि भी दिखाई है। इन्हीं कंपनियों को एग्जीविशन में आमंत्रित किया गया है।

27 हजार कैरेट हीरों की अनुमानित कीमत अधिकारियों ने 7 हजार करोड़ रुपए बताई है। जिसके लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। पन्ना खनिज अधिकारी आरके पांडेय ने बताया कि छतरपुर जिले के बकस्वाहा क्षेत्र में स्थित बंदर डायमंड प्रोजेक्ट की प्रोसेसिंग के दौरान हीरे निकाले गए थे। बकस्वाहा से एकत्र किए गए हीरों को दिखाने के लिए 16 अगस्त तक आवेदन जमा कराने वाले निवेशकों को एकत्रित कच्चे हीरों का अवलोकन एवं अध्ययन महेंद्र भवन में 20 व 21 अगस्त को किया जाएगा।

प्रोजेक्ट में कई कंपनियों ने दिखाई है रुचि: बंदर हीरा प्रोजेक्ट में निवेश को लेकर कई कंपनियों ने रुचि दिखाई है। इनमें सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों के प्रतिनिधि हीरों का अवलोकन करने के लिए पहुंचेंगे। इनमें एनएमडीसी, अडानी ग्रुप, वेदांता समूह, शिव रूंगटा माईंस, अरविंद रूरल एंड इन्फ्रास्ट्रेक्चर प्राइवेट लिमिटेड जैसे कई बड़ी कंपनियां शामिल हैं। इस पूरे कार्य की माॅनीटरिंग करने के लिए 18 अगस्त को भोपाल सहित अन्य जिलों के अधिकारी जिनकी ड्यूटी लगाई गई है। उनकी टीम भी पन्ना पहुंच गई है। इस कार्य का संपूर्ण दायित्व सचिव खनिज साधन विभाग का होगा। इसके लिए सचिव खनिज साधन विभाग अन्य विभागों से समन्वय स्थापित कर कठिनाइयों का निराकरण करेंगे।

पर्यवारण स्वीकृति में देरी के कारण रियोटिंटो ने खींचे थे हाथ : दरअसल आस्ट्रेलियाई कंपनी ने बंदर प्रोजेक्ट को शुरू किया था। सर्वे के बाद उन्होंने प्रोस्पेक्टिंग लीज हासिल करके हीरों का भंडार पाया। 2003 से लेकर 2016 तक कंपनी लगातार अलग-अलग चरणों में काम करती रही। कंपनी खनन लीज हासिल करना चाह रही थी, लेकिन भारत सरकार से पर्यावरणीय स्वीकृत नहीं मिलने के कारण रियोटिंटो ने प्रोजेक्ट से हाथ खींच लिए थे। तब भी से प्रोजेक्ट बंद है। अब एक बार फिर कांग्रेस सरकार हीरा खनन परियोजना के लिए निवेशक की तलाश कर रही है ताकि प्रोजेक्ट को शुरू किया जा सके।

हीरों की गुणवत्ता का अवलोकन करेंगी कंपनियां
प्रदर्शनी में कंपनियां अपने विशेषज्ञ भेज रही हैं। यह विशेषज्ञ हीरों का अवलोकन करेंगे। वह बेहतर ढंग से सहज स्थिति में अवलोकन व अध्ययन कर सकेंगे। ताकि प्रोजेक्ट की लागत और उत्पादन की संभावनाओं का आकलन किया जा सके।

भास्कर संवाददाता| पन्ना

आस्ट्रेलिया की हीरा कंपनी रियो टिंटों द्वारा छतरपुर जिले के बकस्वाहा के बंदर प्रोजेक्ट से निकाले गए करीब 27 हजार कैरेट हीरों का एग्जीविशन पन्ना के महेंद्र भवन में रखा गया है। जिसमें देश की नामी गिरामी कंपनियां शामिल हो रही हैं। एक्जीविशन के लिए महेंद्र भवन को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। दरअसल मप्र सरकार बंदर प्रोजेक्ट को चालू करने के लिए निवेशक की तलाश कर रही है। इसमें कई कंपनियों ने रुचि भी दिखाई है। इन्हीं कंपनियों को एग्जीविशन में आमंत्रित किया गया है।

27 हजार कैरेट हीरों की अनुमानित कीमत अधिकारियों ने 7 हजार करोड़ रुपए बताई है। जिसके लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। पन्ना खनिज अधिकारी आरके पांडेय ने बताया कि छतरपुर जिले के बकस्वाहा क्षेत्र में स्थित बंदर डायमंड प्रोजेक्ट की प्रोसेसिंग के दौरान हीरे निकाले गए थे। बकस्वाहा से एकत्र किए गए हीरों को दिखाने के लिए 16 अगस्त तक आवेदन जमा कराने वाले निवेशकों को एकत्रित कच्चे हीरों का अवलोकन एवं अध्ययन महेंद्र भवन में 20 व 21 अगस्त को किया जाएगा।

प्रोजेक्ट में कई कंपनियों ने दिखाई है रुचि: बंदर हीरा प्रोजेक्ट में निवेश को लेकर कई कंपनियों ने रुचि दिखाई है। इनमें सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों के प्रतिनिधि हीरों का अवलोकन करने के लिए पहुंचेंगे। इनमें एनएमडीसी, अडानी ग्रुप, वेदांता समूह, शिव रूंगटा माईंस, अरविंद रूरल एंड इन्फ्रास्ट्रेक्चर प्राइवेट लिमिटेड जैसे कई बड़ी कंपनियां शामिल हैं। इस पूरे कार्य की माॅनीटरिंग करने के लिए 18 अगस्त को भोपाल सहित अन्य जिलों के अधिकारी जिनकी ड्यूटी लगाई गई है। उनकी टीम भी पन्ना पहुंच गई है। इस कार्य का संपूर्ण दायित्व सचिव खनिज साधन विभाग का होगा। इसके लिए सचिव खनिज साधन विभाग अन्य विभागों से समन्वय स्थापित कर कठिनाइयों का निराकरण करेंगे।

पर्यवारण स्वीकृति में देरी के कारण रियोटिंटो ने खींचे थे हाथ : दरअसल आस्ट्रेलियाई कंपनी ने बंदर प्रोजेक्ट को शुरू किया था। सर्वे के बाद उन्होंने प्रोस्पेक्टिंग लीज हासिल करके हीरों का भंडार पाया। 2003 से लेकर 2016 तक कंपनी लगातार अलग-अलग चरणों में काम करती रही। कंपनी खनन लीज हासिल करना चाह रही थी, लेकिन भारत सरकार से पर्यावरणीय स्वीकृत नहीं मिलने के कारण रियोटिंटो ने प्रोजेक्ट से हाथ खींच लिए थे। तब भी से प्रोजेक्ट बंद है। अब एक बार फिर कांग्रेस सरकार हीरा खनन परियोजना के लिए निवेशक की तलाश कर रही है ताकि प्रोजेक्ट को शुरू किया जा सके।

एक्जीविशन के लिए अलग अलग सौंपी जिम्मेदारियां
कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने बताया कि राज्य शासन खनिज विभाग द्वारा छतरपुर स्थित हीरा खनिज खंड बंदर डायमंड प्रोजेक्ट तहसील बक्स्वाहा के अंवेषण के दौरान एकत्र किए गए हीरे जो जिला कोषालय पन्ना में जमा हैं। इन जमा हीरों को अवलोकन एवं अंवेषण के लिए यह व्यवस्था की गयी है। इस कार्य के लिए आर के पांडेय खनिज अधिकारी पन्ना, र|ेश दीक्षित हीरा अधिकारी रीवा, अनुराज चौबे उप महाप्रबंधक एनएमडीसी मझगंवा, जयप्रकाश हीरा पारिखी एनएमडीसी मझगुवां, अनुपम सिंह हीरा पारिखी हीरा कार्यालय पन्ना को जिला कोषालय में जमा कराने की जिम्मेदारी सौंपी गयी है। सभाकक्ष मे हीरों का अध्ययन, अवलोकन तथा अतिथियों को स्वागत एवं समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी दिनेश कुमार बागडे अधीक्षक भौमिकी विद् भोपाल एवं संजीव मोहन पांडेय क्षेत्रीय प्रमुख हीरा को सौंपी गयी है।

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