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दोनों हाथ खाेए तो ढाई साल पहले श्रेया को पुरुष के हाथ लगाए; अब त्वचा का रंग बदलने, हाथों में कोमलता से डाॅक्टर भी अचंिभत
दुर्घटना में दाेनाें हाथ खाे चुकी पुणे की श्रेया सिद्दनागौड़ा काे डाॅक्टराें ने पुरुष के हाथ ट्रांसप्लांट करने की बात कही ताे एक पल काे वह चाैंकीं, लेकिन काेई िवकल्प नहीं था, इसलिए उन्हाेंने सहमति जता दी। श्रेया बताती हैं, ‘नए हाथ बड़े, सांवले अाैर भारी थे। कलाइयां चाैड़ी थीं, अंगुलियां पुरुषों की तरह थीं। बाल भी काफी थे।’ अब ढाई साल बाद श्रेया के शरीर ने इन हाथाें काे अपना लिया है। हाथाें का रंग श्रेया के शरीर से मेल खाता है। इन पर बाल नहीं हैं। ये अधिक कोमल हैं। श्रेया की मां सुमा बताती हैं, ‘काेई भांप नहीं सकता कि ये पुरुष के हाथ हैं। श्रेया अब चूड़ियां पहनने लगी है अाैर नेल पाॅलिश भी लगाती है।’ इस बदलाव से डाॅक्टर भी अचंिभत हैं।
श्रेया की जिंदगी में साल 2016 में उस समय भूचाल अाया था, जब पुणे से कर्नाटक स्थित मणिपाल इंस्टीट्यूट अाॅफ टेक्नाेलाॅजी जाते वक्त बस पलट गई थी। हादसे में उनके दाेनाें हाथों ने हरकत बंद कर दी थी। इलाज िमलने में देरी हुई ताे दाेनाें हाथ काेहनी के नीचे से काटने पड़े। उस समय उनकी उम्र 18 वर्ष थी। श्रेया ने प्रोस्थेटिक हाथ इस्तेमाल करने की कोशिश की, लेकिन रोजमर्रा की जरूरत पूरी नहीं हुईं। कुछ महीनाें बाद श्रेया ने केरल के एक अस्पताल में होने वाले ट्रांसप्लांट के बारे में पढ़ा। श्रेया कहती हैं, ‘जब हम काे-अाॅर्डिनेटर से मिले तो उन्होंने डाेनर न िमलने की समस्या बताई। शेष | पेज 4 पर
नए हाथाें से दी परीक्षा, डाॅक्टर बाेले- गहन स्टडी की जरूरत
श्रेया कहती हैं, ‘ट्रांसप्लांट के समय शरीर और हाथों का रंग अलग था, लेकिन इतना संतोष था कि मेरे हाथ हैं।’ डॉ. सुब्रमण्यम अय्यर कहते हैं कि श्रेया के केस में हम कलर कोडिंग की जांच कर रहे हैं। केस समझने के लिए गहन स्टडी की जरूरत है। बदलाव चौंकाने वाले हैं। इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ चुकी श्रेया फिलहाल इकोनॉमिक्स से बीए कर रही हैं। पिछली परीक्षा उन्होंने नए हाथों से दी है।