इस युग में व्यक्ति के पास धर्म, ध्यान, पूजा, आराधना के लिए समय नहीं : आचार्य विनिश्चय सागर महाराज

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 09:30 AM IST

Chhatarpur News - मानव जीवन व्यक्ति को बहुत भवों में भटकने के बाद मिलता है। हमें अपने मानव जीवन को सार्थक बनाना है। इस शिविर के...

Tikamgarh News - mp news in this age there is no time for religion meditation worship worship acharya decar sagar maharaj
मानव जीवन व्यक्ति को बहुत भवों में भटकने के बाद मिलता है। हमें अपने मानव जीवन को सार्थक बनाना है। इस शिविर के माध्यम से हमें अपनी संस्कृति सभ्यता नैतिकता एवं आदर्शों का पालन करना है। तभी हम सच्चे जैन धर्म के अनुयायी कहलाएंगे। यह बात नया जैन मंदिर में चल रहे शिविर के दौरान धर्म सभा में आचार्य विनिश्चय सागर महाराज ने कहीं।

मध्यप्रदेश एवं बुंदेलखंड के विभिन्न नगरों में श्रुत संवर्धन ज्ञान संस्कार शिविर का आयोजन 11 जून मंगलवार से शुरू हो गया है। यह संस्कार शिविर नगर की नंदीश्वर कॉलोनी एवं दिगंबर जैन नया मंदिर में भी शुरू हो गया है। संस्कार शिविर आचार्य ज्ञान सागर महाराज की पावन प्रेरणा एवं आशीर्वाद से शुरू हुए। शिविर के संचालक विद्वान कपिल शास्त्री, मनीष शास्त्री एवं सुनील शास्त्री सोजना ने बताया कि इस संवर्धन संस्कार शिविर का मुख्य उद्देश्य समाज को धर्म से जोड़ना है। संस्कार शिविर के माध्यम से बच्चों को संस्कारवान बनाना है। यही बच्चे हमारे समाज एवं राष्ट्र का भविष्य हैं। जो लोग पश्चिमी सभ्यता की ओर जा रहे हैं। उन लोगों को इस शिविर के माध्यम से अपने जैन धर्म एवं संस्कृति से जोड़ना है।

शिविर में भागों की दी जानकारी - शिविर के माध्यम से ज्ञान दर्पण भाग 1 एवं 2, छहढाला, र|करण्ड श्रावकाचार, तत्वार्थ सूत्र, भक्तांबर स्त्रोत, पूजन, प्रशिक्षण तथा रात्रि कालीन वेला में शास्त्र प्रवचन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रतिदिन आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर, स्यादवाद महाविद्यालय वाराणसी एवं श्रमण ज्ञान भारती मथुरा के प्रशिक्षित विद्वान एवं ब्रह्मचारी भैया, ब्रह्मचारिणी दीदी द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है। नया जैन मंदिर में भी संस्कार शिविर आचार्य विनिश्चय सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में चल रहा है।

शांतिधारा के बाद आचार्य विनिश्चय सागर महाराज ने दिए प्रवचन - शिविर में सुबह 6:30 बजे से अभिषेक शांतिधारा एवं सामूहिक पूजन का आयोजन किया जा रहा है। इसके बाद छहढाला एवं भक्तांबर स्त्रोत के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रहा है। आचार्य विनिश्चय सागर महाराज ने कहा कि आज के इस युग में व्यक्ति के पास धर्म, ध्यान, पूजा, आराधना के लिए समय नहीं है या व्यक्ति समय नहीं निकाल पाता। उन्होंने कहा कि हमें अपने बहुमूल्य समय में से कुछ समय भगवान की भक्ति पूजा आराधना के लिए अवश्य निकालना चाहिए। तभी हमारा मानव जीवन सफल होगा और हमारी आत्मा का कल्याण होगा।

आचार्य विनिश्चय सागर महाराज पिछले 1 सप्ताह से अपने संघ के साथ बाजार जैन मंदिर में विराजमान है। प्रतिदिन सुबह 9:00 बजे से आचार्य द्वारा प्रवचन दिए जा रहे हैं। और लोग धर्म लाभ ले रहे हैं।

टीकमगढ़। बच्चाें काे दी जा रही धर्म की शिक्षा।

टीकमगढ़। मंदिर में माताजी से ग्रहण करते शिक्षा।

धर्म से विमुख होते समाज को जोड़ने का प्रयास

प्रदीप जैन बम्होरी ने बताया कि नौ दिवसीय संस्कार शिविरों का एक साथ 19 जून बुधवार को प्रागैतिहासिक अतिशय क्षेत्र नवागढ़ में बृहद रूप से समापन का आयोजन रखा गया है। शिविरों के आयोजक श्रृत संवर्धन संस्थान मेरठ एवं संस्कृति संवर्धन संस्थान दिल्ली द्वारा आयोजन किया जा रहा है। आधुनिकता की अंधी दौड़ में आज नैतिकता संस्कृति एवं प्राचीन सभ्यता का ह्मस होता जा रहा है। आचार्य ज्ञानसागर मुनिराज ने धर्म से विमुख होते समाज को जोड़ने के लिए विलुप्त होते आदर्शों एवं संस्कारों को बचाने के लिए इस प्रकार के शिविरों का आयोजन बुंदेलखंड सहित देश के कई शहरों में किया जा रहा है। यह संस्कार शिविर विगत 20 वर्षों से देश के अनेक नगरों में आयोजित किए जा रहे हैं। संस्कार शिविर मध्य प्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश, राजस्थान दिल्ली ,हरियाणा, हिमाचल प्रदेश झारखंड, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, पंजाब ,उत्तराखंड सहित 1000 स्थानों पर इस प्रकार के शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इस श्रुत संवर्धन संस्कार शिविर में 5 वर्ष से लेकर 80 वर्ष तक के श्रावक एवं श्रविकाएं भाग ले रही हैं।

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