व्यसन के गिरफ्त में शरीर को कब्रिस्तान बनाने की बजाए हरिभजन कर देवालय बनाएं : शास्त्री

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 09:15 AM IST

Chhatarpur News - कस्बा के सरवई रोड पर स्थित उमरीखेरा के हनुमान जी मंदिर परिसर में राजेश्वरानंद ‘अवधूत’ सड़वां गुफा वाले महाराज के...

SARWAI News - mp news instead of making the body a cemetery in the form of addiction haribhajan should make the temple shastri
कस्बा के सरवई रोड पर स्थित उमरीखेरा के हनुमान जी मंदिर परिसर में राजेश्वरानंद ‘अवधूत’ सड़वां गुफा वाले महाराज के मार्गदर्शन में संगीतमय श्रीमद भागवत कथा का आयोजन चल रहा है। बीते 12 मई से चल रही श्रीमद् भागवत कथा को सुनने के लिए रोजाना भक्तजन बड़ी संख्या में पहुंच कर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। चित्रकूट धाम से पधारे कथा व्यास पं. अनुज कृष्ण शास्त्री महाराज ने कथा के पांचवें दिन श्रीकृष्ण की बाललीला और श्री गोवर्धन लीला की मनोहारी कथा का वर्णन किया।

कथा वाचक पं.अनुज कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं में शामिल पूतना वध, कालिया मर्दन आदि प्रसंगों का बड़े ही सुंदर ढंग से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि प्रभु ठाकुर जी की यह लीलाएं मानव समाज को बाल संरक्षण व जल संरक्षण का संदेश देती हैं। श्री कृष्ण की लीलाओं के वर्णन के दौरान श्रद्धालुजनों की भक्ति भावना देखते ही बन रही थी। शास्त्री ने राजा परीक्षित, कपिल भगवान, कदम मुनि व माता विभूति से जुड़े प्रसंगों का भी वर्णन किया।

शास्त्री ने जिव्ह्या को मां सरस्वती का रूप बताते हुए कहा कि हमारी जिव्ह्या में साक्षात मां सरस्वती विराजती हैं। इसलिए हमें जिव्ह्या का अभिषेक मदिरा, तंबाखू जैसी अपवित्र वस्तुओं से नहींं करना चाहिए। इसका तात्पर्य है कि मनुष्य को अपवित्र वस्तुओं का सेवन नही करना चाहिए। उन्होंने एक घटना का वर्णन करते हुए कहा कि किसानों द्वारा पैदा की जाने वाली फसल को पशुओं द्वारा नुकसान किया जाता है, जिसके लिए उनके द्वारा फसल की रखवाली के लिए बाड़ लगाई जाती है। लेकिन इसके विपरीत तंबाखू की खेती की सुरक्षा के लिए किसानों को सुरक्षा के इंतजाम नहीं करने पड़ते। क्योंकि तंबाखू की फसल को पालतू पशु तो क्या गधे तक नहीं खाते हैं, अर्थात मानव को तंबाखू आदि व्यसन वाली वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए।

अपनी इंद्रियों को वश में करने की जरूरत: उन्होंने आंख व कान इन दोनों इंद्रियों को काम (बुरी आदतों) की उत्पत्ति का मार्ग बताया। मानव आंखों के द्वारा बुरा देखकर व कानों के द्वारा बुरा सुनकर गंदा आचरण करने लगता है। इसलिए मानव को अपनी इंद्रियों को वश में करने की जरूरत होती है। कथा व्यास अनुज कृष्ण ने ‘हर सांस में हो सुमिरन तेरा, यूं बीत जाए जीवन मेरा’ भजन का गायन कर उपस्थित धर्म प्रेमियों को हरिभजन करने का उपदेश दिया।

कथा वाचक।

गौरिहार। भागवत कथा का श्रवण करते श्रद्धालु

ठाकुर जी की कृपा से 83,99,999 जन्मों के बाद मिलता है मानव शरीर

उन्होंने कहा कि ठाकुर जी की कृपा से 83 लाख 99 हजार 999 जन्मों के बाद मानव का शरीर प्राप्त होता है। हमे इस शरीर का सदुपयोग करना चाहिए। व्यसन की लत में गिरफ्त होकर शरीर को कब्रिस्तान बनाने की बजाए, जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता अर्जित करने के लिए हरिभजन करके शरीर को देवालय बनाने की जरूरत है। हरिभजन ही मुक्ति का सबसे सरल मार्ग है।

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