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राजा भागीरथ ने कठिन तपस्या कर अपने 60 हजार पुरखों को मोक्ष दिलाया: धीरेंद्र कृष्ण
महाराजपुर के वार्ड 14 कुसमा में श्रीराम हनुमान महायज्ञ चल रहा है। इस मौके पर संगीतमय श्रीमद भागवत कथा भी चल रही है। कार्यक्रम में बागेश्वर धाम गंज के पं. धीरेंद्र कृष्ण महाराज कथा का वाचन कर रहे हैं। कथा सुनने कुसमा, महाराजपुर सहित आसपास के गांवों से सैकड़ों लोग पहुंच रहे है। आज कथा के दूसरे दिन धीरेंद्र कृष्ण महाराज ने कपिलोपाख्यान, ध्रुव चरित्र एवं प्रह्लाद चरित्र की कथा का वर्णन किया।
पं. धीरेंद्र कृष्ण ने कपिलोपाख्यान का वर्णन करते हुए कहा कि राजा सगर द्वारा अश्वमेघ यज्ञ कराया गया। यज्ञ के लिए उन्होंने अश्व छोड़ा, इस यज्ञ से भयभीत होकर देवराज इंद्र ने अश्व को चुरा कर कपिल मुनि के आश्रम में बांध दिया। चोरी हुए अश्व को खोजते हुए राजा सगर के 60 हजार पुत्र कपिल मुनि आश्रम पहुंचे और क्रोधित होकर तपस्या में लीन मुनि से अभद्रता कर ध्यान भंग करा दिया। क्रोधित मुनि ने राजा सगर के पुत्रों को श्राप देकर भस्म कर दिया। अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए भागीरथ ने कपिल मुनि से निवेदन कर मोक्ष का उपाय जाना और स्वर्ग से गंगा लाने के लिए भगवान शिव की कठिन तपस्या में लग गए। अपने तप के कारण अपने अकाल मृत्यु को प्राप्त 60 हजार पुरखों का उद्धार किया।
ध्रुव चरित्र की कथा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि राजा उत्तानपाद के 2 रानिया सुनीति और सुरुचि थीं। दोनों रानियों के एक एक पुत्र थे। ध्रुव बड़ी रानी के पुत्र एक दिन सभा मे अपने पिता उत्तानपाद की गोद मे बैठ गए। राजा ने भी अपने पुत्र ध्रुव को बड़े प्यार से बैठाया, लेकिन छोटी रानी ने ईर्ष्या बस राजा की गोद से हटा दिया और डॉट फटकार लगा दी। साथ ही बड़ी रानी ध्रुव की माता का भी अपमान किया। ध्रुव ने अपनी छोटी माता से पूछा हम क्यों नही अपने पिता की गोद मे बैठ सकते तो छोटी रानी ने बड़े घमंड से कहा पहले भगवान की तपस्या करो फिर वर मांगना कि मैं सुरुचि के गर्भ से पैदा होऊं फिर पिता की गोद मे खेलने को मिलेगा।
जंगल पहुंच कर ध्रुव ने की तपस्या
अपनी छोटी माता की बात सुन ध्रुव जंगल चला गया और भगवान की कठोर भक्ति कर अपने माता पिता को दर्शन देने का बर मांग कर परिवार को दर्शन कराए और पूरे परिवार को मोक्ष प्रदान किया। यह केवल ध्रुव की दृढ़ संकल्प और बाल हट से ही संभव हुआ।