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खर्चीले कार्यक्रमों को धर्म का जामा पहनाकर प्रस्तुत करना गलत : मुनिश्री

2 वर्ष पहले
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जिनवाणी औषधि के समान हैं, इसका अमृत तत्व प्राणी की संसार की विष वेदना का विरेचन करके उसे विषमताओं से छुटकारा दिलाता है। इसके हमें आवश्यकता है सम्यक श्रद्धान की। वर्तमान में धर्म की प्रभावना के नाम पर अतिरिक्त में अपव्यय हो रहा है। खर्चीले कार्यक्रमों को धर्म का जामा पहनाकर प्रस्तुत किया जा रहा है। श्रावक उसे धर्म मानकर पोषण तो कर रहा है, पर आत्म कल्याण से विमुख होकर पुण्यानुबंधी पाप संचित कर रहा है। यह बात प्रवचन के दौरान आचार्यश्री संत शिरोमणि विद्यासागर महाराज के सुयोग्य शिष्य, अध्यात्म योगी, एकांत साधक मुनि सरलसागर महाराज ने कही।

प्रागैतिहासिक तीर्थ नवागढ़ में चतुर्मास सानंद किया जा रहा है। मुनिश्री सरल सागर द्वारा प्रवचन किए जा रहे है। इस अवसर पर बुधवार को निर्वाण महोत्सव मनाया गया। अनिल जैन ने बताया कि नवागढ़ क्षेत्र में विराजित सभी पार्श्वनाथ बिम्बों के सानिध्य में निर्वाण महोत्सव दोपहर 2 बजे मुनि सरल सागर महाराज के पावन सानिध्य में आयोजित किया गया। जिसमें स्थानीय समाज ढूंढा, बड़ागांव, सपोंन,पठा, अंतोरा, समर्रा, अजनोर, दरगुवा, उमरी ,घुवारा, टीकमगढ़ के श्रावकों को भगवान की पूजा एवं निर्वाण लाडू समर्पित करने का सौभाग्य मिला। क्षेत्र निदेशक ब्रह्मचारी जय कुमार निशांत ने सभी से चतुर्मास में संयम साधना एवं सदाचरण प्राप्त करके मुनिश्री के सानिध्य का लाभ लेने का निवेदन किया है। इस अवसर पर अध्यक्ष सनत कुमार जैन, महामंत्री योगेंद्र जैन बबलू, कोषाध्यक्ष नरेंद्र, राजकुमार, अजीत कुमार, वीरचंद, देवेंद्र, सुनील, राकेश मौजूद थे।

हम इसलिए मनाते हैं पार्श्वनाथ निर्वाण दिवस

मुनिश्री ने कहा कि श्रावण शुक्ला सप्तमी को सम्मेद शिखर के स्वर्णभद्र कूट से पार्श्वनाथ के जीव ने े दुःखों से छुटकारा पाकर शाश्वत तीर्थ सिद्ध क्षेत्र में स्थान प्राप्त किया। इसीलिए श्रावक भगवान की पूजा अर्चना करके लाडू समर्पित करके अपने जीवन को मंगलमय बनाते हैं।

टीकमगढ़ के नवागढ़ में मुिनश्री सरलसागर महाराज के प्रवचन सुनते लोग

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