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ओबीसी ने जातिगत जनगणना कराने और ओलावृष्टि से हुए नुकसान के मुआवजा के लिए मुख्यमंत्री से की मांग
ओबीसी महासभा ने शुक्रवार को जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजते हुए ओबीसी को जातिगत जनगणना के अाधार पर विधानसभा में प्रस्ताव पारित कराने को कहा है। इसके साथ ही शुक्रवार को हुई ओलावृष्टि से किसानों को राहत देने के लिए 50 हजार रुपए प्रति एकड़ सहायता की मांग की है।
ओबीसी महासभा जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में कहा गया कि महासभा की ग्वालियर इकाई द्वारा इसी साल 13 फरवरी को शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया गया। इसके बाद भी जबरन इकाई के सदस्यों पर केस दर्ज किए गए। इन केसों को जल्द वापस लिया जाए। प्रदेश सरकार द्वारा 54 प्रतिशत से अधिक संख्या वाले पिछड़ा वर्ग को दिए गए 27 प्रतिशत आरक्षण के विरुद्ध प्रस्तुत याचिकाओं में महाअधिवक्ता द्वारा गैर जिम्मेदारी पूर्ण रवैया अपनाकर जवाब दिया गया। इसलिए वरिष्ठ अधिवक्ता की नियुक्ति की जाए। इस ज्ञापन के दौरान महासभा के संभागीय अध्यक्ष प्रदीप चौरसिया, मनीष कुशवाहा, दुर्गेश यादव, नारायण पटेल, एमएस मरकाम, पीएल निराला, विजय बहादुर, कोमल सिंह, पुरुषोत्तम कुशवाहा, भागीरथ चौरसिया, मुकेश पटेल, महेश पटेल, अयोध्या प्रसाद पटेल, सुशील सोनी, चेतन सोनी, वृंदावन पटेल, बृजकिशोर कुशवाहा सहित महासभा के अन्य लोग मौजूद रहे।
खराब मौसम ने बढ़ाई किसानों की चिंता
पृथ्वीपुर | विधानसभा अंतर्गत आने वाले गांवों में रबी सीजन की फसल लगभग पक चुकी है और खराब मौसम होने से किसानों के चेहरे पर चिंता दिखाई दे रही है। निवाड़ी-टीकमगढ़ जिले के कुछ क्षेत्रों में हुई भारी बारिश से किसानों की फसलें चौपट हो चुकी है।
किसानों का कहना है कि अगर इसी तरह रुक-रुककर बारिश होती रही तो फसल पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगी। बारिश उड़द, मूंग, मूंगफली, सोयाबीन की फसलें पहले की सड़ चुकी हैं। जिससे किसानों को खरीफ फसल में खाद एवं बीज के रुपए भी निकालना मुश्किल हो गया था। बावजूद इसके मप्र शासन द्वारा किसानों को मिलने वाला मुआवजा भी नहीं दिया गया। वहीं रबी सीजन में जो गेहूं शासन को विक्रय किया था, उस समर्थन मूल्य की आज तक राशि प्राप्त नहीं हुई। किसानों ने जैसे तैसे साहूकारों से रुपए उधार लेकर इस साल रबी सीजन की फसल की बोवनी कर दी थी। किसान रामलाल यादव, कीरत, संतोष केवट, जगपाल यादव, मनीराम कुशवाहा, अमान कुशवाहा सहित कई किसानों ने बताया कि हम लोगों ने रबी सीजन की फसल अच्छी होने से अपने बच्चों के सपने और साहूकारों के कर्ज चुकाने को तैयार थे, लेकिन मौसम की मार एक बार फिर फसलों को बर्बाद करने पर आमदा है।