धार्मिक आयोजन:श्रीमद् भागवत कथा के पहले दिन सुकदेव और राजा जड़ भरत के जन्म की कथा सुनाई
कथा का आयोजन रोजाना शाम 5 से 8 बजे ते किया जा रहा है
महाराजपुर नगर से सटे ग्राम कुसमा के वार्ड नंबर 14 श्रीहनुमान जी मंदिर में संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन चल रहा है। कथा का वाचन वागेश्वर धाम के पं. धीरेंद्र गर्ग कर रहे हैं। कथा का आयोजन शाम 5 से 8 बजे तक चलता है।
कथा आयोजन से पहले कुसमा और महाराजपुर नगर में गाजेबाजे के साथ विशाल कलश यात्रा निकाली गई थी। गुरुवार को कथा के दौरान पं. धीरेंद्र गर्ग ने श्रद्धालुओं को सुकदेव जन्म और राजा जड़ भरत के जन्म की कथा सुनाई। श्री हनुमान मंदिर स्थित चित्रपार्क में चल रहे आयोजन में गुरुवार को कथा व्यास धीरेंद्र गर्ग ने सुकदेव जन्म और राजा जड़ भरत के जन्म की कथा सुनाई। पं. धीरेंद्र गर्ग ने कहा कि एक भगवान शिवशंकर माता पार्वती को कथा सुनाने के लिए निर्जन जंगल में लिवा गए। एक गुफा में ले जाकर भगवान शिवजी ने गुफा का मुख्य द्वार बंद कर दिया और माता पार्वती को कथा सुनाने लगे। कथा सुनते माता पार्वती को नींद आ गई, इसी दौरान ऊपर रखा तोता का घोसला टूट जाने से उसका अंडा फूट गया और उससे तोते का एक बच्चा माता पार्वती के ऊपर आकर गिरा।
तोते के बच्चे ने सोचा माता सो रही हैं, कथा में व्यवधान न हो। इसके लिए वह कथा के दौरान हामी भरने लगा। अचानक शिवजी ने देखा कि पार्वती जी सो रही हैं, यह तोते का बच्चा हामी भर रहा है। वह क्रोधित हुए और तोते के बच्चे को मारने को दौड़े। अपनी जान बचाकर तोता का बच्चा भागा और वेदव्यास के यहां पहुंचा। उसी दौरान वेदव्यास की प|ी को जम्हाई आई और तोता का बच्चा उदर के अंदर घुस गया। अगर हम दूसरों की मदद करेंगे तो ईश्वर किसी न किसी रूप में हमारी सहायता भी करते हैं। निर्धन और असहाय लोगों का सहयोग करना चाहिए।
महाराजपुर। कथा वाचन करते पं.धीरेंद्र गर्ग।
भगवान श्रीकृष्ण की समझाइश पर गर्भ से आए बाहर
गर्भ के अंदर 9 माह के बाद 12 साल होने के बावजूद तोते का बच्चा अर्थात सुकदेव जी बाहर नहीं निकले। वेद व्यास की प|ी बीमार होने लगीं। तभी भगवान श्रीकृष्ण आए और उन्होंने सुकदेव को समझाइश दी तो वह उदर के बाहर निकले। जन्म लेने के बाद उन्होंने राजा परीक्षत का कथा सुनाई।