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दो बीघा में उद्यानिकी व फूलों की खेती कर तीन लाख रुपए सालाना कमा रहे बिलहरी के युवा किसान चेतराम

Chhatarpur News - बुंदेलखंड जैसे पिछड़े क्षेत्र में खेती करना किसी अभिशाप से कम नहीं है। खेती लाभ का धंधा न रहकर नुकसान का धंधा बन कर...

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2019, 04:06 AM IST
Naugaon News - mp news the young farmer chetram of bilhari earning three lakh rupees annually by cultivating horticulture and flowers in two bighas
बुंदेलखंड जैसे पिछड़े क्षेत्र में खेती करना किसी अभिशाप से कम नहीं है। खेती लाभ का धंधा न रहकर नुकसान का धंधा बन कर रह गई है।

परंपरागत खेती करने में किसान को लागत मूल्य निकालना मुश्किल हो रही है, ऐसे में नौगांव नगर से सटे बिलहरी गांव के 27 वर्षीय युवा किसान ने परंपरागत खेती छोड़कर बीते 3 साल से सीमित संसाधन में फूलों व उद्यानिकी की खेती शुरू की। इस में वह रोजाना 800 से 1 हजार रुपए कमा रहे हैं।

परंपरागत खेती छोड़कर फूलों एवं उद्यानिकी की खेती करने वाले चेतराम कुशवाहा अब बेहद खुश व सुखी हैं। इससे पहले वह अपनी 8 बीघा जमीन में परंपरागत फसलें लगाकर सालभर में 80 हजार की पैदावार ही कर पाते थे, लेकिन उद्यानिकी व कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह पर अब 2 बीघा जमीन में ही सालभर में 3 लाख रुपए की कमाई कर रहे हैं।

ग्राम बिलहरी के 27 वर्षीय किसान चेतराम कुशवाहा ने जब से परंपरागत खेती छोड़ कर उद्यानिकी एवं कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह पर फूलों और सब्जी की खेती करना शुरू की है, तब से उनकी किस्मत ही बदल गई है। वह रोजाना 800 रुपए से 1 हजार रुपए के फूल छतरपुर और नौगांव के व्यापारियों को बेच रहे हैं। किसान चेतराम कुशवाहा बताते हैं कि 3 साल पहले तक जब उनके द्वारा अपनी 8 बीघा जमीन में गेहूं, चना, मटर, मूंग आदि की खेती करते थे तो उसमें हमेशा की तरह नुकसान हो जाता, फसल खराब हो जाती और लागत भी ज्यादा लगती थी। कुल मिलाकर फसल में फायदा न होकर उल्टा कर्ज हो जाता था। औसतन साल भर में बमुश्किल 80 हजार की फसल ही हो पाती थी, इस कारण खेती से उनका मन हट गया, एक वक्त तो ऐसा आया कि स्नातक तक पढ़ाई करने वाले चेतराम कुशवाहा ने खेती छोड़कर मजदूरी करने का मन बना लिया था। लेकिन फिर उद्यानिकी व कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह पर अपनी जमीन के कुछ हिस्से में में गेंदा के फूल लगाना शुरू किया। तब से लेकर आज तक चेतराम कुशवाहा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

पहले जो पैसा पिता भेजते थे उसी में घर खर्च चलता था, फिर परंपरागत खेती छोड़ फूल-उद्यानिकी की ओर मुड़े

युवा किसान चेतराम कुशवाहा ने बताया कि उसके पिता भगवानदास कुशवाहा एसएसबी फोर्स की नौकरी करते थे। नौकरी के दौरान जो पैसा पिता भेजते थे उसी में घर खर्च चलता था, खेती से तो नुकसान ही हो रहा था, लेकिन परंपरागत खेती छोड़ फूल व उद्यानिकी अपनाने के बाद अब उसका जीवन खुशहाल हो गया है।

गुलाब सहित अनेक प्रजातियों के फूल भी उगा रहे हैं

इसके बाद चेतराम कुशवाहा ने अपनी जमीन पर गुलाब, गिलाडिया सहित कई प्रकार के फूलों के साथ सब्जी भी लगाना शुरू कर दिया। इसके बाद चेतराम कुशवाहा हर साल अपनी 8 बीघा जमीन में से 2 बीघा जमीन पर गेंदा गुलाब व सब्जी की खेती करके पिछले 3 साल से रोजाना 800 से एक हजार के बेचकर सालाना 3 लाख से अधिक की कमाई कर रहे हैं।

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