ये है जनकपुर...यहां बरसती है दया, दान, क्षमा और अहिंसा; पंचायत ही सुलझाती है सारे विवाद

Chhatarpur News - राजीव रंजन श्रीवास्तव/रवि ताम्रकार | टीकमगढ़ ये है जनकपुर गांव। टीकमगढ़ से आठ किलोमीटर दूर, आबादी लगभग 600 है। इस...

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 09:21 AM IST
Tikamgarh News - mp news this is janakpur it sends rain mercy forgiveness and non violence panchayat resolves all disputes
राजीव रंजन श्रीवास्तव/रवि ताम्रकार | टीकमगढ़

ये है जनकपुर गांव। टीकमगढ़ से आठ किलोमीटर दूर, आबादी लगभग 600 है। इस गांव में भगवान महावीर स्वामी का जियो और जीने दो का सिद्धांत सौ फीसदी फिट बैठता है। यहां दया, दान, क्षमा और अहिंसा बरसती है। गांव की तासीर है कि विवाद बड़ा हो या छोटा। पंचायत में सुलझा लिया जाता है। पंचायत भी ऐसी कि फरमान नहीं देती है, बल्कि आपसी राजीनामा कराकर परिवारों में सुलह कराती है। यही वजह है कि पुलिस महकमे में इस गांव का नाम आदर्श गांव के रूप में लिया जाता है।

गांव के सबसे बुजुर्ग मौजी अहिरवार की उम्र 90 साल है। वे कहते हैं कि उम्र बीत चुकी है, लेकिन खुशी इस बात की है कि गांव के नौजवान भी अनुशासित जीवन शैली जी रहे हैं। वरना हमारी आज संस्कृति कहां से कहां जा रही है। गांव की खासियत यह है कि घर का मामला घर में ही निपटाया जाता है। बिगड़ते रिश्तों की डोर को एकसूत्र में पिरोना बड़ी टेड़ी खीर है, लेकिन हम पंचायत में बैठकर रिश्तों में मिठास घोलने का काम करते हैं। गांव का नौजवान राजू अहिरवार शराब का आदी था। इस बात को लेकर आए दिन घर में कलह होने लगी। मामला पंचायत तक पहुंचा। पंचायत ने राजू को न सिर्फ समझाइश दी, बल्कि शराब से होने दुष्परिणाम भी बताए। राजू ने पंचायत के सामने शराब से तौबा कर ली। एक साल होने को है राजू का परिवार अब खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहा है।

पूर्व जनपद अध्यक्ष दलू अहिरवार का कहना है कि हम लोगों का प्रयास रहता है कि गांव का कोई भी व्यक्ति दुखी न रहे। उसकी हर समस्या का समाधान किया जाता है। पहले गांव में मारपीट की घटनाएं होती थीं, लेकिन उनका भी आपस में निपटारा कर दिया जाता था। अब तो लोग समझदार हो गए हैं। इसलिए भाईचारा बना हुआ है। पंचायत का फैसला सभी को मान्य रहता है।

गृहिणी फूला को गर्व है कि उसका गांव एक आदर्श गांव है। अभी तक कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने की नौबत नहीं आई है। 27 वर्षीय नरेंद्र की मानें तो जनकपुर किसी जनकपुरी से कम नहीं है। गांव का हर युवा पढ़ा-लिखा होने के बाद भी अपने कर्तव्यों को अच्छी तरह से समझता है। मंगलवार को जब भास्कर टीम गांव पहुंची तो पंचायत चल रही थी। पंचायत में एक परिवार का विवाद निपटाया गया। देहात थाने के एएसआई कल्याण सिंह यादव ने बताया कि गांव वास्तव में आदर्श है। साल में शायद ही एकाध मामला आया हो।

टीकमगढ़। गांव वालों को समझाइश देने दलुराम अहिरवार।

सुनवाहा गांव भी अपराध के मामले में कोसों दूर

टीकमगढ़। शहर से पांच किलोमीटर दूर सुनवाहा गांव भी अपराध के मामले में कोसों दूर है। इस गांव में िववादित मामलों को गांव में ही बैठकर सुलझा दिया जाता है। जिससे ग्रामीण थाने रिपोर्ट के लिए नहीं जाते है और बुजुर्गो की समझाइश पर विवाद खत्म कर देते है। कुंवरपुरा पंचायत के सुनवाहा गांव की आबादी 1200 के लगभग दर्ज है। देहात थाना में इस गांव का रिकार्ड अपराध के मामले में न मात्र का है। पुलिस के अनुसार यह गांव अपराध के श्रेणी से बहुत दूर है। यहां की सरपंच श्रीमती कुसुम विदुआ है। इस गांव में महिलाआें की सुनवाई सबसे ज्यादा होती है। उनके अनुसार ही गांव के विकास कार्य की रूप रेखा भी रची जाती है। सरपंच कुसुम विदुआ ने बताया कि गांव में कभी भी विवाद की स्थिति बनती है तो उसे पंचायत जोड़कर गांव में ही निपटा दिया जाता है। थाने तक जाने की नौबत नहीं आती है। वहीं चौपाल के दौरान गांव में शंकर दयाल त्रिपाठी के बातों को सभी लोग मानते है। उनके द्वारा कही बात लोग असानी से मान लेते है।

टीकमगढ़। सुनवाहा गांव के मंदिर में बैठी महिलाएं।

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