इस बार नवतपा में तेज गर्मी और उमस के साथ वर्षा के योग भी

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 07:15 AM IST

Chhatarpur News - पंचांगीय गणना के अनुसार 25 मई को रात्रि 8.23 बजे सूर्य का रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश होगा। सूर्य का रोहिणी में प्रवेश...

Chhatarpur News - mp news this time in the nawapa with the warm summer and humidity the sum of the rainfall
पंचांगीय गणना के अनुसार 25 मई को रात्रि 8.23 बजे सूर्य का रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश होगा। सूर्य का रोहिणी में प्रवेश काल 15 दिवस का रहेगा।

इस दौरान चार ग्रहों का नक्षत्र परिवर्तन भी होगा। इससे नवतपा में तेज गर्मी व उमस के साथ वर्षा के योग बनेंगे। राहत की बूंदें बरसने से आम जनमानस को गर्मी से राहत मिलेगी। पं. सतानंद पांडे ने बताया कि रोहिणी का प्रभाव वर्षा ऋतु में सामान्य वृष्टि के रूप में नजर आएगा। धान्य व फलों का उत्पादन श्रेष्ठ रहेगा। सूर्य का वृषभ राशि में गोचर 15 मई से शुरू हो गया है। इस राशि में सूर्य 15 जून तक रहेंगे। इस बीच 25 मई को रात्रि 8.23 बजे सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इस दिन से नवतपा की शुरुआत होगी।

नक्षत्र मेखला की गणना से देखें तो नवतपा में 27 मई से चार ग्रह नक्षत्र परिवर्तन कर रहे हैं। इनका प्रभाव रोहिणी में मौसम परिवर्तन तथा वर्षा ऋतु में वृष्टि चक्र में अलग-अलग नजर आएगा।

इन ग्रहों का होगा नक्षत्र परिवर्तन: ज्योतिषाचार्य पं. सतानंद पांडे के अनुसार 27 मई को शाम 6 बजे शुक्र ग्रह का कृतिका नक्षत्र में प्रवेश होगा। कृतिका नक्षत्र के स्वामी अग्निदेव हैं। शुक्र का जब कृतिका नक्षत्र में प्रवेश होता है और सूर्य से तपिश के योग बनते हैं तो वर्षा ऋतु में बाढ़ की स्थिति निर्मित होती है। 31 मई को सुबह साढ़े 11 बजे वक्री गुरु का ज्येष्ठा नक्षत्र में प्रवेश होगा। वक्री गुरु ज्येष्ठा नक्षत्र के तीसरे चरण में प्रवेश करेंगे। इस नक्षत्र के स्वामी इंदा हैं। इन्हें वर्षा का कारक माना जाता है। गुरु का वक्रत्व काल होने से देश में खंड वृष्टि होगी। 7 जून को सुबह 7.40 बजे मंगल ग्रह का पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश होगा। यह स्थिति विशेष योग का निर्माण करेगी। पुनर्वसु नक्षत्र की स्वामिनी अदिति हैं। वर्षा ऋतु के लिए पर्जन्य आदि अनुष्ठान सफल होंगे।

रोहिणी का वास समुद्र तट पर: ज्योतिर्विद पं. सतानंद पांडे के अनुसार वर्षा के ऋतु चक्र निर्माण में रोहिणी व समय का वात व मेघों का विशेष महत्व होता है। इस बार रोहिणी का वास समुद्र तट पर तथा समय का निवास धोबी के घर होगा। इसका प्रभाव उपयोगी बारिश के रूप में नजर आएगा। पुष्कर मेघ अन्न, धान्य तथा फलों के उत्पादन में वृद्धि कराएगा। मेघेश शनि का फल देश के कुछ हिस्सों में वर्षा की कमी के रूप में नजर आएगा।

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