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लागत में कमी लाने के लिए जैविक खाद का उपयोग करें : डॉ. त्रिपाठी

एक वर्ष पहले
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सरकार द्वारा 2022 तक कृषि उत्पादन दोगुना करने के लिए किए जा रहे प्रयासों के तहत किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन देने और मौसम में हो रहे बदलाव से आ रही समस्याओं के संबंध में किसानों का मार्ग दर्शन किया। इस दौरान कृषि विज्ञान केंद्र की वरिष्ठ वैज्ञानिक व समन्वयक डॉ. वीणापाणी श्रीवास्तव और डाॅ. उत्तम त्रिपाठी ने दिलनिया व निवारी क्षेत्र के किसानों काे मार्ग दर्शन दिया।

इस अवसर पर प्रगतिशील किसान चितरंजन चौरसिया ने अपने प्रक्षेत्र पर केंचुआ खाद बनाने की विधि और उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह खाद गोबर, पत्थर, चारा, भूसा आदि से बनाई जाती है, जो किसान के पास आसानी से उपलब्ध होती है। इसे बनाने में किसी प्रकार का खर्च किसानों को नहीं करना पड़ता है। साथ ही इसके उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति में वृद्धि होती है और फसल का उत्पादन भी अच्छा आता है। कम पानी में भी बेहतर फसल प्राप्त होती है। इसलिए किसानों को इसका उपयोग करना चाहिए।

इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र की समन्वयक डाॅ. वीणापाणी श्रीवास्तव ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किसानों को निरंतर तकनीकी सलाह समय-समय पर दी जाती है। साथ ही किसानों की समस्याओं का निराकरण भी करने का प्रयास किया जाता है। इससे अनेक किसान लाभान्वित होकर के बेहतर उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने किसानों को रसायनिक उर्वरकों का उपयोग कम करने और जैविक खाद को बढ़ावा देने के लिए कहा। ताकि खेत की मिट्टी के साथ ही सभी की सेहत अच्छी बनी रहे। उन्होंने श्री चौरसिया द्वारा किए जा प्रयासों की सराहना करते हुए अन्य किसानों से भी जैविक खाद का उपयोग करने की बात कही।

डॉ उत्तम त्रिपाठी ने कहा कि आने वाले समय में जैविक खाद उत्पादों की मांग निरंतर बढ़ेगी। वर्तमान में भी अनेक किसान इस प्रकार के खाद का उपयोग करके बेहतर उत्पादन ले रहे हैं। जिससे न केवल लागत में कमी आ रही है, बल्कि अच्छा उत्पादन भी प्राप्त की हो रहा है। उन्होंने किसानों को जवाहर लाल नेहरू कृषि विवि जबलपुर द्वारा तैयार जैविक उर्वरक राइजोबियम, एजेटोबेकटर एसीटोबेक्टर, स्युडो मोनास, ट्राइकोडरमा आदि कृषि विज्ञान केंद्र नौगांव से क्रय करने की सलाह किसानों को देते हुए फसलों पर इनका छिड़काव करने को कहा। ताकि बेहतर परिणाम प्राप्त हो सके। इस दौरान उन्होंने गेहूं, धनिया व प्याज की फसलों का अवलोकन किया। इस दौरान प्रभंजन चौरसिया, प्यारे लाल प्रजापति, लत्तू प्रजापति, मुन्ना लाल रैकवार के साथ अनेक किसान मौजूद रहे।

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