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देश को बांटने वाली नीति नहीं चलने देंगे: चतुर्वेदी

नगर के स्वतंत्रता संग्राम सैनानी स्वर्गीय पं. कृष्णदत्त द्विवेदी की पुण्य तिथि पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का...

Danik Bhaskar | Sep 13, 2018, 02:26 AM IST
नगर के स्वतंत्रता संग्राम सैनानी स्वर्गीय पं. कृष्णदत्त द्विवेदी की पुण्य तिथि पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह आयोजन पं.कृष्णदत्त द्विवेदी के पुत्र एवं बुंदेली के कवि डॉ. देवदत्त द्विवेदी घुवारा तिराहा स्थित अपने निवास सामने किया। कार्यक्रम में देश के ख्यातिप्राप्त कवियों ने एक से बढ़ कर एक हास्य, व्यंग्य, श्रृंगार रचनाएं पेश कर देर रात तक सुधि श्रोताओं का मनोरंजन किया।

कवि सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष नरेंद्र दीक्षित, विशिष्ट अतिथि के रूप में भाजपा नेता डा. रमेश असाटी, समाजसेवी धनप्रसाद असाटी मौजूद रहे। अध्यक्षता कवि मायूस सागरी सागर ने की। अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर दीप प्रज्जवलन किया एवं स्वतंत्रता संग्राम सैनानी के चित्र पर माल्यार्पण किया। कवि मनोज तिवारी ने सरस्वती वंदना- हे सरस्वती, हे भगवती, वरदान दीजिए, से कार्यक्रम का आगाज किया। महोबा के कवि मनीष सोनी ने-चुनाव का मौसम सुहाना रहता है, नेताओं का आना जाना रहता है, रचना पेश कर आज के नेताओं पर कटाक्ष किया। चांद मुहम्मद आखिर टीकमगढ़ ने गौ सुरक्षा कौमी एकता पर कहा- ए फरमान तो कब का है,जो रब का है, वो सबका है। बालकवि रामकुमार शर्मा बमनी ने कहा - कवि गद्दारों से रिश्ता जोड़ नहीं सकतें। कवियित्री डॉ. दीप्ति दीक्षित राठ ने दिनों दिन बढ़ रहे महिला अत्याचार को लेकर- आखिर हम बेटियों को क्यूं बचाएं कि गर्भ से बाहर आते ही भेड़िए उन्हें नोच खाएं, पेश कर श्रोताओं की वाहवाही और तालियां बटोरीं। डॉ. सुरेंद्र शर्मा सुमन छतरपुर ने -कलम दिल के विचार लिखती है, जीत लिखती है हार लिखती है। मंच संचालन कर रहे महोबा के ओज कवि देवेंद्र चतुर्वेदी ने कहा-देश बांटने वाली कोई नीत नहीं चलने देंगे।

कार्यक्रम

स्वतंत्रता सैनानी स्वर्गीय कृष्णदत्त द्विवेदी की पुण्य तिथि पर कवि सम्मेलन हुआ

एेसे एक्ट पे हम का कविता करें, सुप्रीम कोर्ट को फैसला धर दओ तरेंं:

बुंदेली कवि राजेंद्र बिदुआ टीकमगढ़ ने आरक्षण तथा एससी एस टी एक्ट पर सरकार व नेताओं पर करारा व्यंग करते हुए कहा कि ऐसे एक्ट पे हम का कविता करें, सुप्रीम कोर्ट को फैसला भी धर दओ तरें, हम तुमाव करिया मों करें। डॉ. गजाधर सागर ने -देश धरम में इंसा की प्रीति समाई हो पढ़ी। मायूस सागरी ने अपनी रचना -फूल जैसी जवान कर मायूस तुझको करनी बात फूलों की, पढ़ी। कार्यक्रम के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सैनानी कृष्णदत्त द्विवेदी के पौत्र पवनदत्त द्विवेदी ने करकी के कवि हीरालाल मनहर का सम्मान किया।