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किसानों की तीन महीने की मेहनत पांच मिनट में बर्बाद, राज्य में आंधी-बिजली से 6 की मौत

पिछले साल अक्टूबर-नवंबर के बीच किसानों ने गेहूं-चने की फसल बोई थी। खेतों में फसल लगभग तैयार थी।

Dainik Bhaskar

Feb 12, 2018, 05:42 AM IST
Crops Damaged after Hail storm

भोपाल. पिछले साल अक्टूबर-नवंबर के बीच किसानों ने गेहूं-चने की फसल बोई थी। खेतों में फसल लगभग तैयार थी। 15 से 20 दिनों में कटाई शुरू हो जाती। लेकिन रविवार को अचानक तेज बारिश और ओलों ने किसान की तीन माह की मेहनत पर पानी फेर दिया। भोपाल, सीहोर, विदिशा होशंगाबाद सहित कई जिलों में गेहूं की फसल आड़ी पड़ गई तो चने पर ओलों की सफेद चादर बिछ गई।

भोपाल में आंधी की चपेट में आकर गिरे 40 वर्षीय सिक्योरिटी गार्ड मांगीलाल मालवीय की मौत हो गई। भिंड, मुरैना और छतरपुर में आकाशीय बिजली की चपेट में आकर 5 लोगों और छिंदवाड़ा में 12 गायों की जान चली गई।भोपाल में करीब पांच मिनट तक कहीं काबुली चने के बराबर और कहीं बेर के आकार के ओले गिरे। साकेत नगर, बावड़िया कलां, होशंगाबाद रोड, कोलार समेत कई इलाकों की कुछ काॅलोनियों के बगीचों और छतों पर ओले बिछ गए।


अंचल में नुकसान सीहोर : नसरुल्लागंज, बुदनी, आष्टा सहित 100 से ज्यादा गांव में गेहूं-चने को नुकसान
विदिशा: 40 से ज्यादा गांवों में खड़ी फसलें आड़ी हो गईं।
गुना : आरोन, राघौगढ़ और चांचौड़ा में चने और धनियां को ज्यादा नुकसान।
रायसेन: 50 से ज्यादा गांवों में बारिश के साथ गिरे ओले, तेज हवा से आड़ी हो गई फसलें।
अशोकनगर: 14 गांवों में दो से तीन मिनट तक ओले गिरे। आंशिक नुकसान।
इसके अलावा होशंगाबाद, हरदा, बैतूल, श्योपुर, शिवपुरी, उमरिया, राजगढ़ में ओले-बारिश के समाचार हैं।

भोपाल में सबसे ज्यादा 13.3 मिमी बारिश
खजुराहो- 6.6
उमरिया- 6.0
होशंगाबाद- 4.0
ग्वालियर- 1.9
टीकमगढ़- 2.0
मंडला- 1.0
(आंकड़े मिमी में)


शनिवार से 5.4 डिग्री कम हुआ शाम का तापमान: बारिश के बाद भोपाल में पारा तेजी से नीचे आया। शाम 5:30 बजे तापमान 5.4 डिग्री लुढ़क गया। रविवार को बारिश के बाद शाम 5:30 बजे पारा 19.0 डिग्री पर आ गया था, जबकि शनिवार शाम 5:30 बजे तापमान 25.4 डिग्री पर था।

भोपाल के आस-पास 40 गांवों में फसलों को नुकसान
राजधानी के आस-पास 40 से ज्यादा गांवों में फसलों को नुकसान पहुंचा है। कलेक्टर सुदाम पी खाडे ने एसडीएम हुजूर अतुल सिंह, एमपी नगर एसडीएम रवि सिंह, बैरसिया एसडीएम राजीव नंदन श्रीवास्तव सहित 50 पटवारियों की टीम को सर्वे के लिए लगाया है।
70 मिनट तक नहीं पिघले ओले:भोपाल में गिरे आेले 70 मिनट तक नहीं पिघले। मौसम वैज्ञानिक एसके नायक के मुताबिक ओले गिरते वक्त हवा की रफ्तार ज्यादा थी इसके बाद हवा की गति बिलकुल कम हो गई। इस वजह से वाष्पीकरण नहीं हो सका और ओले जल्दी नहीं पिघले। आेले लेटेंट हीट यानी गुप्त उष्मा छोड़ते हैं। इसके कारण इनके आसपास तापमान ज्यादा हो जाता है।

फरवरी में... चार साल बाद ऐसी बारिश, पहली बार गिरे इतने बड़े ओले
राजधानी में फरवरी में पहली बार इतने बड़े ओले गिरे। 4 साल पहले 26 फरवरी 2014 को 3.96 मिमी बारिश हुई थी। पिछले साल भी फरवरी में बारिश हुई थी। इससे पहले 1986 में फरवरी महीने में सबसे ज्यादा 5.48 मिमी पानी बरसा था।

कुछ जिलों से जो जानकारी मिली है, उसमें पता चला है कि ओले का आकार ज्यादा बड़ा नहीं था। इसलिए नुकसान की संभावनाएं कम हैं। फिर भी ओला प्रभावित गांवों में नियम के अनुसार राहत व मुआवजा राशि किसानों की दी जाएगी।
- डॉ. राजेश राजौरा, प्रमुख सचिव, कृषि

कहां-कितना नुकसान
जिला गांव
सीहोर 150
विदिशा 49
नरसिंहपुर 22
रायसेन 60
हरदा 12
होशंगाबाद 8
गुना 7
देवास 20


Crops Damaged after Hail storm
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