Hindi News »Madhya Pradesh News »Dabra News» 25 माह से नहीं दिया वेतन,अब किया रिटायर

25 माह से नहीं दिया वेतन,अब किया रिटायर

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 02:20 AM IST

ग्वालियर
ग्वालियर डीबी स्टार

जयविलास पैलेस परिसर में चलने वाली जिला सहकारी कृषि ग्रामीण विकास बैंक की ग्वालियर शाखा के कर्मचारी उस समय सकते में आ गए, जब बैंक में एक कॉमन आदेश पहुंचा, जिसमें उल्लेख था कि बैंक के सभी कर्मचारियों को सेवानिवृत्त किया जाता है। बैंक का चार्ज सहकारिता विभाग को दे दिया जाए।

अचानक आए इस आदेश को लेकर सभी कर्मचारी सकते में थे। आदेश में यह भी नहीं लिखा था कि उनके 25 महीने का रुका हुआ वेतन कौन देगा और कैसे मिलेगा। इसके लिए उन्होंने सहकारिता के अधिकारियों से भी संपर्क किया, लेकिन किसी ने इसका जवाब नहीं दिया। इस बैंक ने अपनी फिक्स डिपॉजिट स्कीम चलाई थी, जिसमें कई लोगों ने विश्वास कर पैसा जमा कराया। बैंक के पास सवा करोड़ रुपए से अधिक की एफडी जमा हैं। बैंक की हालत देख लोगों ने अपने पैसे वापस मांगे, लेकिन बैंक के पास पैसा नहीं होने के कारण किसी को रकम नहीं दी गई। सिर्फ यही कहा जाता रहा कि जल्द ही पैसा वापस मिल जाएगा। अब जब बैंक ही बंद हो गया और स्टाफ को हटा दिया गया, तो हितग्राहियों को लग रहा है कि उनका पैसा कैसे वापस आएगा।

11 करोड़ रुपए लेने हैं किसानों से

सरकार के लोन माफी की घोषणा के चलते बैंक पर कर्ज बढ़ता चला गया। वर्ष 2005 में जब प्रदेश सरकार ने गारंटी लेना बंद कर दिया, तब से नाबार्ड ने पैसा देना बंद कर दिया। इसके बाद जिला सहकारी कृषि ग्रामीण विकास बैंक द्वारा कोई लोन भी नहीं दिया गया, क्योंकि उसके पास पैसा भी नहीं था। अभी बैंक को किसानों से 11 करोड़ रुपए लेना है। फरवरी 2016 से सरकार ने एकमुश्त योजना चलाई, जिसमें यह कहा गया कि अगर किसान अपनी मूल रकम वापस करता है, तो उसका ब्याज माफ कर दिया जाएगा। इसके बाद कई किसानों से वसूली की गई। जून 2017 तक किसानों से लगभग सवा करोड़ रुपए वसूला गया। इसके बाद यह स्कीम बंद कर दी गई। स्कीम बंद होने के बाद किसानों ने फिर पैसा देना बंद कर दिया।

बैंक में धूल खा रहे हैं दस्तावेज।

12 कर्मचारियों का वेतन अटका

बैंक में पहले 25 कर्मचारी थे। 2014 में 11 कर्मचारियों का संविलियन हो गया। बाद में दो कर्मचारी रिटायर हो गए। वर्तमान में बैंक के 12 कर्मचारी हैं। इन सभी का 25 माह से वेतन नहीं मिला है। इन लोगों ने एकमुश्त योजना के दौरान अधिकारियों से कहा था कि पैसा जब आ रहा है, तो सभी कर्मचारियों का वेतन दे दे दो। लेकिन किसी ने नहीं सुनी और इनका वेतन अटक गया। अभी जो कर्मचारी यहां पर हैं उनमें एलपी पांडे (प्रभारी प्रबंधक), लायक राम प्रजापति (प्रभारी लेखापाल), प्रदीप सालुंके (कैशियर), पंचम सिंह कुशवाह (शाखा प्रबंधक डबरा), रमेश बाबू, हरि बाबू, अशोक बाथम, भूमि राव टकले, अयोध्या प्रसाद, मदन सिंह रावत, बीरबल जाटव और पवन पहेरिया (सभी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं)।

भोपाल के आदेश पर निर्णय

 इस संबंध में हमें भोपाल से आदेश प्राप्त हुआ था। इसी कारण कर्मचारियों को रिटायर किया गया है। जहां तक कर्मचारियों के वेतन और बैंक में मौजूद एफडी की बात है, तो हम उसका हिसाब लगाकर मुख्यालय भेजेंगे। वहां से इस संबंध में निर्णय किया जाएगा। अनुभा सूद, उपायुक्त सहकारिता विभाग ग्वालियर

किसानों को ऋण देना था बैंक का मुख्य काम

जिला सहकारी कृषि ग्रामीण विकास बैंक की स्थापना वर्ष 1963 में हुई थी। तब इसका नाम भूमि विकास बैंक था। इसका मुख्य काम किसानों को लोन देना था। उस समय नेशनल बैंक ऑफ एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) से अपेक्स बैंक के माध्यम से पैसा आता था, जिससे यह किसानों को लोन देते थे। शुरुआत में बैंकों का संचालन बोर्ड करता था। यह बोर्ड किसानों द्वारा ही चुना जाता था। जिस किसान को लोन मिलता था, वही इसमें वोट देने का अधिकार रखता था। ऐसे इसके लगभग 1100 किसान सदस्य थे। बाद में इसे सहकारिता विभाग के अंडर कर दिया गया।

महल का भी है किराया बकाया

बैंक को अभी अपनी बिल्डिंग का किराया भी देना है। यह बिल्डिंग देवस्थान ट्रस्ट से किराए पर ली हुई है। इसका किराया 12 हजार रुपए प्रतिमाह है। अभी बैंक को 19 महीने का किराया 2.28 लाख रुपए देना बकाया है।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Dabra News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: 25 माह से नहीं दिया वेतन,अब किया रिटायर
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

Stories You May be Interested in

      रिजल्ट शेयर करें:

      More From Dabra

        Trending

        Live Hindi News

        0
        ×