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वित्त मंत्री ने 10 बार लिया ग्वालियर का नाम योजनाएं और घोषणाएं सब पुरानी, बजट नया

Dabra News - बिजनेस रिपोर्टर. ग्वालियर | प्रदेश के वित्त मंत्री जयंत मलैया ने बुधवार को बजट भाषण में 10 बार ग्वालियर का नाम लिया,...

Dainik Bhaskar

Mar 01, 2018, 04:20 AM IST
वित्त मंत्री ने 10 बार लिया ग्वालियर का नाम योजनाएं और घोषणाएं सब पुरानी, बजट नया
बिजनेस रिपोर्टर. ग्वालियर | प्रदेश के वित्त मंत्री जयंत मलैया ने बुधवार को बजट भाषण में 10 बार ग्वालियर का नाम लिया, लेकिन शहर के लिए बजट में नया कुछ भी नहीं दिया। जबकि ग्वालियर के लोगों को बजट से काफी अपेक्षाएं थीं। लेकिन सरकार ने नई घोषणाएं करने की अपेक्षा पिछले सालों के बजट की घोषणाओं को ही अमलीजामा पहनाने का काम किया है। स्मार्ट सिटी, चिकित्सा शिक्षा, सड़क, अपशिष्ट प्रबंधन, सिंचाई, सामान्य शिक्षा इत्यादि क्षेत्राें में पूर्व से चली आ रही योजनाआें की शुरुआत व पूर्णता को बताया। दैनिक भास्कर ने बजट भाषण की बातें और गिनाए गए कामों की हकीकत जानी। पढ़िए विस्तृत रिपोर्ट..

जानिए, वित्त मंत्री ने किस प्रोजेक्ट के बारे में बजट भाषण में क्या कहा और उसकी हकीकत


हकीकत: वर्ष 2016 के दूसरे चरण में ग्वालियर को स्मार्ट सिटी में शामिल किया गया था। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार से कुल 2200 करोड़ रुपए मिलने हैं। अभी सिर्फ 400 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए हैं। राशि आई नहीं है। स्मार्ट सिटी के लिए कंट्रोल कमांड का ऑफिस भी बनकर तैयार नहीं हुआ है।


हकीकत: इस प्रोजेक्ट को 20 साल पहले कांग्रेस सरकार लेकर आई थी। सितंबर 2009 में भाजपा शासित सरकार के मुख्यमंत्री ने भूमिपूजन किया था। पहले चरण में 170 करोड़ और दूसरे चरण में 150 करोड़ रुपए लागत आएगी। फिलहाल इसकी डीपीआर बनाई जा रही है।


हकीकत: यह तत्कालीन यूपीए सरकार की 2012 की योजना है। कुल 45 करोड़ की लागत वाली इस योजना में छह माह पहले ही केंद्र सरकार ने 22 करोड़ रुपए भेज दिए हैं। बाकी पैसा प्रदेश सरकार को देना है जिसकी आज बजट में घोषणा की गई है। इस योजना में लीनियर एक्सीलरेटर मशीन की स्थापना की जानी है।


हकीकत: 227 किसानों को 65 लाख 58 हजार रुपए रकम का भुगतान हो चुका है। अभी 20 किसान रह गए हैं, उन्हें भुगतान नहीं हुआ है क्योंकि उनका पंजीयन देरी से हुआ था।


हकीकत: यह योजना अपने चरण में घोटाले के कारण थम गई थी। उसके बाद इसका दूसरा चरण वर्ष 2008 के करीब शुरू हुअा था। योजना 650 करोड़ रुपए की थी। अभी इसमें 10 फीसदी काम होना और रह गया है।


80 साल पहले शहर में दौड़ती थीं सिटी बस, अब जहर उगलते टैंपो

फोटो महाराज बाड़ा पर 1938 में संचालित सिटी बस का है। ग्वालियर एंड नाॅर्दन इंडिया ट्रांसपोर्ट कंपनी लि. बस चलाती थी। लेकिन 80 साल बाद आज शहर में जहरीला धुआं उगलते टेंपो ही सिटी ट्रांसपोर्ट का एकमात्र जरिया हैं। सिटी बस का संचालन अभी भी अधर में है।


हकीकत: रायरू निरावली से नयागांव तक 30 किमी के वेस्टर्न बायपास का प्रस्ताव साडा ने 2014 में केंद्र सरकार को भेजा था। इसमें वन विभाग का अड़ंगा है।


19 नई सड़कें बनेंगी

लोक निर्माण विभाग द्वारा बनाई जाने वाली सड़कों में ग्वालियर ग्रामीण में बैरसा से छैकुर सुपावली तक सड़क, छह नंबर चौराहा से जड़ेरुआ बांध, लाल टिपारा होता हुआ चितोरा टूलेन मार्ग, महेदपुरा से कोलूपुरा मार्ग, जिगनियां से बेनीपुरा व्हाया चक गुंधारा मार्ग, भितरवार में जखोदा से लाेदूपुरा मार्ग, बेहराना से सेकरा मार्ग, दोरार से भंवरपुरा मार्ग, अमरोल से निकाड़ी मार्ग, सिकरोदा नहर पुलिया से खुर्दपार मार्ग, एराया से पिपरीपुरा, राेरा पहुंच मार्ग, दुवाह पहुंच मार्ग, बनवार से अमरोल मार्ग, मसूदपुर से दौलतपुर ईटमा मार्ग, डांडा खिरक से तिघरा मार्ग, गोल पहाड़िया होता हुआ गुप्तेश्वर मंदिर से मोतीझील मार्ग, डबरा में समूदन से सैंकरा मार्ग, इकौना से मोहना मार्ग, पिछोर से बडेरा मार्ग।


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