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ग्वालियर जेल में पहले से फांसी के 3 सजायाफ्ता, इनमें 2 दुष्कर्मी

ग्वालियर | ग्वालियर केंद्रीय जेल में फांसी दिए जाने के लिए व्यवस्था नहीं है। यदि राष्ट्रपति के यहां से जितेंद्र को...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 28, 2018, 03:10 AM IST

ग्वालियर | ग्वालियर केंद्रीय जेल में फांसी दिए जाने के लिए व्यवस्था नहीं है। यदि राष्ट्रपति के यहां से जितेंद्र को सजा की पुष्टि कर फांसी दिए जाने के आदेश हुए तो उसे जबलपुर या इंदौर की जेल भेजा जाएगा। इन्हीं दोनों जेल में फांसी दिए जाने के इंतजाम हैं। बताया गया है कि ग्वालियर जेल में आजादी के बाद से किसी को फांसी नहीं दी गई। जेल में अभी फांसी के 3 सजायाफ्ता कैदी बंद हैं।

1. वीरेंद्र बाथम: डबरा के ढीमर मोहल्ले में रहने वाले 32 साल के वीरेंद्र पुत्र राजू बाथम ने नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। फिर उसकी हत्या कर दी थी, कोर्ट ने वीरेंद्र को धारा 376 व 302 व पॉस्को एक्ट के तहत दोषी पाते हुए 26 दिसंबर 2014 को फांसी की सजा सुनाई। 27 दिसंबर 2014 से केंद्रीय जेल, ग्वालियर में बंद वीरेंद्र की याचिका सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

2. परशुराम: भिंड जिले के रौन गांव में रहने वाले परशुराम पुत्र नाथूराम उम्र 28 साल ने एक महिला के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी। परशुराम को कोर्ट ने 376 व 302 के अपराध में दोषी पाते हुए 19 सितंबर 2012 को मृत्युदंड व जुर्माने से दंडित किया। परशुराम को 3 अक्टूबर 2012 को ग्वालियर जेल में शिफ्ट किया गया। उसकी याचिका सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

3. योगेंद्र तोमर: प|ी को जिंदा जलाकर मार देने के जघन्य अपराध में अंबाह के हाथी गड्ढा निवासी योगेंद्र पुत्र वंशी सिंह तोमर को कोर्ट ने 302 व 326 के तहत मृत्युदंड भुगताने के आदेश दिए थे। 24 जुलाई 2014 से योगेंद्र तोमर केंद्रीय जेल, ग्वालियर में है और उसकी अपील सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

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