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पाॅक्सो में ग्वालियर शहर का पहला मामला;

33 गवाहों के बयान पर 22 दिन में फैसला लीगल रिपोर्टर | ग्वालियर 37 दिन पहले 20-21 जून की दरमियानी रात ग्वालियर में...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 28, 2018, 04:10 AM IST

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    33 गवाहों के बयान पर 22 दिन में फैसला

    लीगल रिपोर्टर | ग्वालियर

    37 दिन पहले 20-21 जून की दरमियानी रात ग्वालियर में आमखो में आयोजित शादी समारोह से 6 साल की मासूम बच्ची का अपहरण कर दुष्कर्म व हत्या करने वाले दरिंदे जितेंद्र कुशवाह (24) को अपर सत्र न्यायाधीश अर्चना सिंह ने दोहरे मृत्युदंड की सजा सुनाई है। फैसला केस की ट्रायल शुरू होने के बाद 22 कार्यदिवस में दिया गया। जज ने आदेश देते हुए कहा-मृत्युदंड मप्र हाईकोर्ट द्वारा सजा की पुष्टि के बाद ही दिया जाए। 2012 में नई दिल्ली में हुए निर्भया कांड के बाद बने लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम-2012 पॉक्सो के बाद ग्वालियर का यह पहला मामला है। शेष|पेज 15 पर

    जितेंद्र कुशवाह

    छह साल की बच्ची से दुष्कर्म कर हत्या करने वाले दरिंदे को दोनों मामलों में फांसी की सजा

    आरोपी के कृत्य से संपूर्ण समाज की सामूहिक आत्मा कांप गई है.. ऐसे अपराधी को कठोर से कठोर दंड देना जरूरी है। अन्यथा एक दिन दहेज जैसी कुरीतियों के समान इस प्रकार के अपराध कन्याभ्रूण हत्याओं की नींव बनने लगेंगे।-फैसला सुनाने वाली जज अर्चना सिंह की टिप्पणी

    बजे आरोपी से सवाल

    जज: कुछ कहना है तुमको जितेंद्र , अभियोजन अपना केस साबित करने में सफल रहा।

    आरोपी: मुझ पर झूठा केस लगाया है। मैंने कुछ नहीं किया।

    जज: तुम 6 साल की बच्ची को ले गए। उसके साथ दुष्कर्म किया और बाद में हत्या कर दी।

    आरोपी : ये आरोप झूठा है, मैं तो डबरा में था।

    जज: लेकिन तुम्हारी ओर से इस संबंध में कोई साक्ष्य ही प्रस्तुत नहीं किया गया।

    आरोपी : मैं भाभी के साथ डबरा गया था।

    कोर्ट रूम लाइव

    आरोपी का वकील : अपराध को मारना चाहिए, अपराधी को नहीं। आरोपी को सुधरने का अवसर दें।

    अभियोजन पक्ष: ऐसे मामलों में आरोपी को फांसी की सजा देने के लिए ही विधेयक में संशोधन किया गया है। आरोपी को फांसी की ही सजा होना चाहिए।

    दोनों पक्षों को सुनने के बाद जज अर्चना सिंह ने एक बार फिर आरोपी जितेंद्र से पूछा- और कुछ कहना है जितेंद्र। लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद जज ने खुली अदालत में फैसला सुना दिया।

    बजे सजा पर बहस

    किस धारा में सजा

    भादंसं 376 (ए) (बी):

    12 साल से कम उम्र की बालिका से बलात्कार

    सजा: मृत्युदंड

    भादंसं 302 : हत्या

    सजा: मृत्युदंड

    भादंसं 363: सात साल का सश्रम कारावास

    भादंसं 366: 10 साल का सश्रम कारावास

    भादंसं 201- 7 साल का सश्रम कारावास

    नोट : सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।

    आगे क्या: फैसले के खिलाफ आरोपी एक माह में हाईकोर्ट में अपील कर सकता है।

    फूट-फूट कर रोया बच्ची का पिता

    फैसला सुनाने के बाद जब जज ने बच्ची के पिता से पूछा कि उन्हें कुछ कहना है तो वे फूट-फूट कर रोने लगे। इस पर जज ने वकीलों को उन्हें बाहर ले जाने के लिए कहा। बाद में उन्होंने फांसी के फैसले पर न्यायपालिका को धन्यवाद दिया लेकिन इस बात पर नाराजगी भी जताई कि घटना के बाद एक भी जनप्रतिनिधि दुख की घड़ी में उनके घर नहीं आया।

    सेल में जाते वक्त रोया दुष्कर्मी

    कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्रीय जेल में बंद आरोपी जितेंद्र सिंह कुशवाह को सेल से निकालकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम में लाया गया, जहां जज ने जब उसे सजा सुनाई तो वह चुप हाे गया। जब कॉन्फ्रेंसिंग पर उसकी पेशी बंद हुई तो जेल स्टाफ द्वारा उसे सेल में वापस ले जाया गया। इस दौरान वह फांसी की सजा के डर से रो पड़ा।

    दोहरी फांसी की सजा सुनाने वाली मूलत: जबलपुर निवासी जज अर्चना सिंह 2003 में न्यायिक सेवा में आईं।

    कटनी में... कोर्ट में चालान पेश होने के पांचवें दिन ही दुष्कर्मी को फांसी की सजा

    कटनी| विशेष अदालत ने 5 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म के मामले में शुक्रवार को आरोपी ऑटो चालक राजकुमार कोल को फांसी की सजा सुनाई है। विशेष जज माधुरी राजलाल ताम्रकार ने यह सजा कोर्ट में चालान पेश होने के 5वें दिन सुनाई। मामले में 7 जुलाई को बच्ची के परिजन ने एफआईआर दर्ज कराई थी। अगले ही दिन पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस के मुताबिक एक परिवार ने अपनी बच्ची का दाखिला बड़े स्कूल में कुछ दिन पहले कराया था। ऑटो चालक राजकुमार अन्य बच्चों के साथ उस बच्ची को भी स्कूल ले जाता था। शेष|पेज 15 पर

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