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ट्रेनिंग के नाम फोटो खींचे, निरीक्षण की खानापूिर्त

ग्वालियर

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 13, 2018, 06:30 AM IST

ग्वालियर डीबी स्टार

पुलिस मुख्यालय द्वारा प्रदेश में संचालित निजी सिक्योरिटी एजेंसी में कार्यरत गार्डों के प्रशिक्षण के लिए ट्रेनिंग सेंटर के लाइसेंस जारी किए जाते हैं। यह लाइसेंस मध्यप्रदेश निजी सुरक्षा अभिकरण नियम 2012 के तहत जारी किया गया था। इस नियम के मुताबिक गार्डों को फिजिकल ट्रेनिंग के साथ ही फायर फाइटिंग सहित उपकरणों के प्रशिक्षण, लैब, क्लास आदि की व्यवस्था होनी चाहिए। हर तीन माह में इन केंद्रों का निरीक्षण कर ओके सर्टिफिकेट जारी किया जाता है, लेकिन पुलिस अफसर सेटिंग के जरिए प्रशिक्षण की सुविधा न होने के बाद भी ट्रेनिंग सेंटर के लाइसेंस जारी करने के साथ ही निरीक्षण में ओके सर्टिफिकेट दे रहे हैं।

एक शिकायत के आधार पर डीबी स्टार टीम ने मामले की पड़ताल की, तो खुलासा हुआ कि ग्वालियर में अफसरों ने गत 13 दिसंबर 2017 को शर्मा सिक्योरिटी एजेंसी के संचालक संजीव कुमार शर्मा को कैप्टन हरिविलास सिक्योरिटी एंड ट्रेनिंग सेंटर संचालित करने का लाइसेंस जारी किया था। इसमें सेंटर का पता सिरोल रोड स्थित बोस्टन कॉलेज लिखा हुआ है। गत सोमवार को यहां भोपाल से डीएसपी पीएन पचौरी निरीक्षण के लिए पहुंचे, तो सेंटर संचालक ने एक गेट पर सेंटर का बैनर लगाकर गार्डों को इकट्ठा कर लिया। इसके बाद फोटो खिंचाने की रस्म के साथ निरीक्षण की खानापूर्ति पूरी कर ली गई।

कमाई का धंधा बना सेंटर संचालन

प्रशिक्षण केंद्र का संचालन करना कमाई का धंधा बना हुआ है। इसका कारण यह है कि अधिकतर संस्थानों में प्रशिक्षित गार्ड ही मांगे जाते हैं। इन गार्डों को नियुक्त करने से पहले ट्रेनिंग सर्टिफिकेट भी लिया जाता है। जिन एजेंसियों के पास प्रशिक्षण केंद्र की व्यवस्था नहीं है, वे इन सेंटरों में पैसे खर्च कर गार्डों की ट्रेनिंग कराते हैं। अब सेंटर में कोई सुविधा न होने की स्थिति में अंदाजा लगाया जा सकता है कि गार्डों को कैसे ट्रेनिंग दी जा रही है।

सिर्फ उपकरण व गार्ड देखते हैं

 मैंने गत सोमवार को बोस्टन कॉलेज में गार्ड्स ट्रेनिंग सेंटर का निरीक्षण किया था। इस दौरान हमने तो फायर फाइटिंग उपकरणों की ट्रेनिंग और गार्डों की उपस्थिति देखी थी। हम निरीक्षण में यही देखते हैं। वहां हमें व्यवस्थाएं अच्छी मिली थीं। अभी मैं वीआईपी ड्यूटी में हूं, ज्यादा विस्तार से बाद में बात करूंगा। आरएन पचौरी, तत्कालीन डीएसपी पीएचक्यू (अब एसडीओपी डबरा)

व्यवस्था कर रहे हैं

 अभी हम अपने ही गार्डों को ट्रेनिंग दे रहे हैं। वहां रिटायर्ड डीएसपी हुकुम सिंह यादव इन गार्डों की क्लास ले रहे हैं। जहां तक फिजिकल ट्रेनिंग की बात है, तो हम वहां व्यवस्था कर रहे हैं। कुछ सिक्योरिटी एजेंसी संचालक चाहते थे कि मैं बिना ट्रेनिंग ही उनके गार्डों को सर्टिफिकेट जारी कर दूं, लेकिन मैंने मना कर दिया। इसी कारण मेरी शिकायतें कर रहे हैं। संजीव शर्मा, संचालक कैप्टन हरिविलास सिक्योरिटी एंड ट्रेनिंग सेंटर

क्या हैं सेंटर संचालन व ट्रेनिंग के नियम

मध्यप्रदेश निजी सुरक्षा अभिकरण नियम 2012 के तहत प्रशिक्षण प्रोग्राम को इस तरह से निर्धारित किया गया है:-

गार्ड की उम्र जो सिविलियन हो, उसे 18 से 45 साल के बीच में प्रशिक्षण कराया जा सकता है। इससे ज्यादा उम्र के लोगों को प्रशिक्षण नहीं दिया जाता है। सर्टिफिकेट 65 साल की उम्र तक वैलिड रहता है।

गार्ड विकलांग एवं अपराधी नहीं होना चाहिए। वह मेडिकल फिट होना चाहिए। दूर व पास की नजर चेक की जाती है। पैरों के तलवे मिले नहीं होना चाहिए।

प्रशिक्षण 45 दिन का होता है, जिसमें 290 पीरियड होते हैं। एक पीरियड 40 मिनट का होता है। प्रतिदिन नौ पीरियड लगते हैं यानी कि छह घंटे रोज प्रशिक्षण होना अनिवार्य है।

भूतपूर्व सैनिकों का सात दिन का प्रशिक्षण होता है, लेकिन छह घंटे उनकी भी ट्रेनिंग होनी जरूरी है।

सिक्योरिटी संचालक जिनकी 21 दिन की ट्रेनिंग होती है, उनकी भी छह घंटा प्रतिदिन ट्रेनिंग होना जरूरी है।

सिक्योरिटी संचालक, भूतपूर्व सैनिकों, सुरक्षा गार्ड एवं सुपरवाइजरों को ट्रेनिंग अनिवार्य है। जो गार्ड प्रशिक्षण नहीं लेता है और सीधे सिक्योरिटी में लग जाता है, तो उस सिक्योरिटी का लाइसेंस ही कैंसिल हो जाता है।

प्रशिक्षण के दौरान इन गार्डों को पार्किंग के संचालन, मेटल डिटेक्टर के उपयोग, अग्निशामक यंत्रों जैसे उपकरणों के उपयोग की भी जानकारी दी जाती है।

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