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बजट में भी निराशा मिलने पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं सहायिकाओं ने शुरू की भूख हड़ताल, धरने पर बैठीं

प्रदर्शन | 15 दिन से अनिश्चित कालीन हड़ताल कर धरने पर बैठी कार्यकर्ताएं- सहायिकाएं बोली अब रात भी पंडाल में बिताएंगे...

Danik Bhaskar

Mar 02, 2018, 02:35 AM IST
प्रदर्शन | 15 दिन से अनिश्चित कालीन हड़ताल कर धरने पर बैठी कार्यकर्ताएं- सहायिकाएं बोली अब रात भी पंडाल में बिताएंगे

भास्कर संवाददाता | दमोह

पिछले पंद्रह दिनों ने काम बंद कर विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चित कालीन हड़ताल कर बैठीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं सहायिकाओं को बजट में भी निराशा मिलने पर गुरूवार से भूख हड़ताल शुरू कर दी। कलेक्टोरेट के सामने पंडाल लगाकर धरना प्रदर्शन कर रहीं आंगनबाडी़ कार्यकर्ताओं सहायिकाओं ने गुरूवार को माला पहनकर धरना दिया और भूख हड़ताल शुरू कर रात्रि में भी पंडाल में धरना देने की बात कही। इसके पहले सुबह से शाम तक धरना दिया जा रहा था। पिछले माह प्रदेश के वित्तमंत्री जयंत कुमार मलैया ने पंडाल में पहुंचकर कार्यकर्ताओं से मुलाकात की थी और 28 फरवरी तक इंतजार करने और धरना समाप्त करने की बात कही थी।

उन्होंने आश्वासन दिया था कि बजट में आप लोगों को कुछ अच्छा मिलेगा। इसके बाद भी धरना समाप्त नहीं किया गया था और 28 फरवरी तक शांति पूर्ण धरना दिया गया और 28 फरवरी के बजट का इंतजार कार्यकर्ताएं सहायिकाएं करतीं रहीं। लेकिन जब बजट में भी निराशा मिली तो भूख हड़ताल का निर्णय लिया। संगठन की जिलाध्यक्ष शोभा तिवारी ने बताया कि जब तक शासन उनकी मांगों को नहीं मानता है और प्रमुख मांग शासकीय कर्मचारी घोषित करने का आदेश जारी नहीं किया जाता तब तक हड़ताल जारी रहेगी।

कार्यकर्ताओं सहायिकाओं की मांगे: पदाधिकारियों ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं सहायिकाओं मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को शाासकीय कर्मचारी घोषित किया जाए। न्यूनतम वेतन तय कर कार्यकर्ताओं को 18 हजार रूपए सहायिकाओं को 9 हजार रूपए प्रतिमा दिए जाने का आदेश पारित किया जाए। रिटायरमेंट की उम्र 60 से 65 वर्ष की जाए। रिटायरमेंट पर एक मुश्त राशि का प्रावधान किया जाए। सुपरवाइजर पद पर आयु सीमा का बंधन हटाकर विभागीय पदोन्नति दी जाए। 1998 के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बिना परीक्षा के अनुभव व योग्यता के आधार पर पर्यवेक्षक पद पर पदोन्नत किया जाए एवं सहायिकाओं को कार्यकर्ता के पद पर नियुक्त किया जाए। ईपीएफ व ईएसआई सुरक्षा दी जाए। मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों को फुल केंद्र किया जाए। 3 से 6 वर्ष के बच्चों को निजी स्कूलों पर भर्ती पर आंगनबाड़ी के प्रमाण पत्र की अनिवार्यता की जाए। अतिरिक्त कार्य के अतिरिक्त पैसा दिया जाए। प्राकृतिक अापदा के समय राज्य सरकार एवं कलेक्टर द्वारा घोषित अवकाश का लाभ दिया जाए।

निजी सरकारी स्कूलों की तरह ग्रीष्मकालीन अवकाश लाभ 15 दिन का दिया जाए। विभागीय समस्याओं के निराकरण के लिए जिलेस्तर से लगातार प्रदेशस्तर तथा परामर्श दात्री समितियों का गठन किए जाने का प्रावधान किया जाए। आंगनबाड़ी के माध्यान्ह भोजन एवं मानदेय पत्रक पर सरपंच पार्षद के हस्ताक्षर पर रोक लगाई जाए।

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