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केंद्र में तैयार हो रहीं अमरूद की नई किस्में, 28 साल तक हो सकती है पेड़ की उम्र, मार्च और अप्रैल में होगी पेड़ों की काट-छांट

कृषि विज्ञान केंद्र में लगे नई प्रजाति के करीब 200 अमरूद के पेड़ों की कांट और छांट का काम किया जा रहा है। कृषि...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 02, 2018, 02:35 AM IST

केंद्र में तैयार हो रहीं अमरूद की नई किस्में, 28 साल तक हो सकती है पेड़ की उम्र, मार्च और अप्रैल में होगी पेड़ों की काट-छांट
कृषि विज्ञान केंद्र में लगे नई प्रजाति के करीब 200 अमरूद के पेड़ों की कांट और छांट का काम किया जा रहा है। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक दो से तीन साल में अमरूद पेड़ों में यह प्रक्रिया अपनाई जाती है, ऐसा होने से पेड़ में अच्छी पैदावार होती है। यह प्रक्रिया अपनाने से पेड़ लंबे समय तक फलते रहेंगे। इस खेती से किसानों के जीवन में भी आमूल-चूल परिवर्तन हो सकता है।

सागर-दमोह रोड पर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में अमरूद की खेती के तरीके किसानों को समझाने के लिए कई तरह की प्रयाेग किए जा रहे हैं। यहां पर लगे करीब 10 से 12 फिट लंबे पेड़ों को वैज्ञनिक बडिंग करके उनकी कांट-छांट कर रहे हैं। वैज्ञानिक मनोज अहिरवार ने बताया कि अमरूद की खेती में केवल एक ही बार लागत लगाकर सालों-साल मुनाफा कमाया जा सकता है। आम तौर पर देखें तो ज्यादातर फलों के पेड़ तीन-चार सालों में समाप्त हो जाते हैं और किसान को फिर से लागत लगाकर नए पौधे लगाने पड़ते हैं, लेकिन अमरूद की अति सघन बागवानी तकनीक में बार-बार पौधे लगाने की जरूरत नहीं है। उन्हांेने बताया कि अमरूद की अतिसघन बागवानी में एक एकड़ में 1600 पौधे लगाए जा सकते हैं। इसमें अमरूद की चार प्रजाति ललित, इलाहाबाद सफेदा, लखनऊ-49 और वीएनआरबी लगाई जा सकती है। अतिसघन बागवानी करते समय मुख्य पौधे को सबसे पहले 70 सेंटीमीटर की ऊंचाई से काट दें। उसके बाद दो-तीन माह में पौध से चार-छह सशक्त डालियां विकसित होती हैं।

इनमें से चारों दिशाओं में चार डालियों को सुरक्षित कर बाकी को काट देते हैं, ताकि पौधे का संतुलन बना रहे। इससे मात्र छह माह में ही अमरूद फल देने लगता है।

किसानों के लिए मॉडल बनेंगे यह अमरूद के पेड़, अमरूद की अतिसघन बागवानी में एक एकड़ में लगाए जा सकते हैं 1600 पौधे

वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. बीएल साहू के मुताबिक प्रारंभिक अवस्था में हर पेड़ में तीन-चार फल ही रखें, बाकी फलों को छोटी अवस्था में तोड़ दें। इससे नन्हें पौधों पर ज्यादा बोझ नहीं आएगा। हर साल मार्च और अप्रैल के बीच में पेड़ों की बडिंग करें, निरंतर प्रक्रिया अपनाने के बाद इन पेड़ों मंे अचानक पैदावर बढ़ जाएगी। कृषि विशेषज्ञ के मुताबिक अमरूद की फसल में कटाई-सधाई का बहुत महत्वपूर्ण योगदान है। किसानों को इस बात का विशेष ध्यान रखना होगा। मृग व हस्त बहार के फल तोड़ाई के बाद ही कटाई-सधाई करें। ऐसा होने से अच्छी पैदावार की संभावना रहती है।

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Web Title: केंद्र में तैयार हो रहीं अमरूद की नई किस्में, 28 साल तक हो सकती है पेड़ की उम्र, मार्च और अप्रैल में होगी पेड़ों की काट-छांट
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