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स्वच्छता के नाम पर लाखों रुपए से खरीदी गई मशीनें हुईं कबाड़

जनता के पैसों का नगर पालिका किस तरह दुरुपयोग कर रही है इसका प्रमाण फिल्टर प्लांट के पास बेकार पड़ी लाखों रुपए की...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 04:25 AM IST

जनता के पैसों का नगर पालिका किस तरह दुरुपयोग कर रही है इसका प्रमाण फिल्टर प्लांट के पास बेकार पड़ी लाखों रुपए की मशीनों को देखकर मिल जाएगा। अधिकांश मशीनें उपयोग नहीं होने से धूल खा रही हैं और रखरखाव के अभाव टूट-फूट गई हैं। इन्हें ठीक कराकर उपयोग करना तो दूर की बात हैं, बल्कि कई नई मशीनें खरीदने की तैयारी चल रही है।

दरअसल शहर की सफाई व्यवस्था को दुरूस्त करने के नाम पर नगर पालिका द्वारा बीते दो-तीन साल से करीब एक करोड़ रूप से अधिक की मशीनें व वाहन खरीदे गए हैं। जिसमें टिपर वाहन, नालियों से कचरा निकालने के लिए ट्रालीनुमा लिफ्ट मशीन, धूल साफ करने वाली मशीन, जेसीबी सहित अन्य मशीनें शामिल हैं। यह सभी सामान महीनों से फिल्टर प्लांट पर पड़ी-पड़ी कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं, लेकिन इनका उपयोग नहीं हो पा रहा है।

3 साल से बंद पड़ी ट्राली लिफ्ट मशीन: पूर्व नपाध्यक्ष मनु मिश्रा के कार्यकाल में 7 लाख की लागत से खरीदी गई ट्राली लिफ्ट मशीन बीते तीन साल से पुराने फिल्टर प्लांट के पास कबाड़ में पड़ी है। हैरानी की बात तो यह है कि इस मशीन को केवल एक-दो बार ही उपयोग हो पाया, इसके बाद मशीन में खराबी आने के कारण तीन साल से बंद पड़ी कबाड़ में तब्दील हो चुकी है, साथ ही कई जगह जंग भी लग गई है। इस मशीन की खासियत यह है यह चोक पड़ी नाले, नालियों को तत्काल लिफ्ट की साफ कर देती है। जबकि यह सफाई कर्मचारियों से यह काम कराने में दो दिन का समय लग जाता है। लेकिन यह मशीन तीन साल से खराब पड़ी है। इसके सुधार कार्य की ओर किसी का ध्यान नहीं है।

धूल खा रही 7 लाख की धूल साफ करने वाली मशीन: (73) नगर पालिका ने 5 साल पहले शहर की सड़कों से धूल साफ करने 7 लाख की लागत से मशीन खरीदी थी। लेकिन पालिका द्वारा इसका उपयोग नहीं किया जा रहा है। स्थिति यह है कि यह मशीन खुद ही धूल खा रही है। हालांकि सर्वे टीम के दौरे के समय इसका उपयोग किया जाता था और दिखावे के लिए दोनों टाइम मशीन चलती नजर आती थी, लेकिन उसके बाद यह मशीन कभी भी नजर नहीं आई। वहीं दूसरी ओर सड़कों पर उड़ने वाली धूल से लोग श्वांस संबंधी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।

एक साल से कबाड़ में तब्दील हो गई जेसीबी: नगर पालिका द्वारा पुरानी जेसीबी मशीन भी बीते एक साल से कबाड़ में पड़ी जंग खा रही है। बताया गया है कि करीब एक लाख रुपए खर्च कर पुरानी मशीन की मरम्मत होने के बाद चालू हो सकती थी, लेकिन नई जेसीबी आने के बाद इस पुरानी मशीन की ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया गया। वहीं दूसरी ओर 9 लाख रुपए की लागत से खरीदी गई जैविक कचरा बनाने वाली मशीन का भी है। इस मशीन को भी दो माह पहले दीनदयाल पार्क में लगाया जाना था, लेकिन भी दो माह से महिला बसती गृह में रखी-रखी धूल खा रही है।

जल्द चालू हो जाएंगे वाहन

जो मशीनों बंद पड़ी हैं, उसमें मरम्मत के लिए बहुत अधिक राशि खर्च होगी। वाहन चालक न होने के कारण टिपर वाहन बंद पड़े हैं। चालकों की भर्ती प्रक्रिया पूर्ण हो गई है। एक-दो दिन में फाइनल लिस्ट जारी हो जाएगी। जिससे टिपर वाहन भी चालू हो जाएंगे।- पीके चावला, एसओ नपा

60 लाख के टिपर वाहन महीनों से धूल खा रहे

शहर की संकरी गलियों में डोर टू डोर कचरा उठाने के लिए नगर पालिका द्वारा करीब 60 लाख की लागत से 13 टिपर वाहन खरीदे थे। जिसका शुभारंभ अक्टूबर-नवंबर माह में वित्त मंत्री जयंत मलैया ने किया था, लेकिन यह वाहन बीते छह माह से ही फिल्टर प्लांट पर खड़े धूल खा रहे हैं। जनवरी माह में जब दिल्ली की सर्वे टीम आई थी, उस समय दिखावे के लिए इन वाहनों को शहर में चलाया गया था, लेकिन दस दिन बाद ही इन्हें वहीं पर रख दिया गया है। हालांकि पुराने 13 वाहन चल रहे हैं।

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