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न हैंडपंप, न पाइप लाइन, बस एक तलैया के सहारे हैं 400 परिवार

शहर में पहाड़ियों के बीच में स्थित किशुन तलैया 400 से ज्यादा परिवारों के लिए जीवनदायिनी बनी हुई है। इस तलैया से पूरी...

Danik Bhaskar

Apr 02, 2018, 05:10 AM IST
शहर में पहाड़ियों के बीच में स्थित किशुन तलैया 400 से ज्यादा परिवारों के लिए जीवनदायिनी बनी हुई है। इस तलैया से पूरी बस्ती पानीदार है। यहां पर न तो कोई हैंडपंप खुदा है और न ही कोई पाइप लाइन है। दूर-दूर तक पानी का कोई स्राेत नहीं है। बस इस तलैया से 400 परिवारों की प्यास बुझ रही है। तलैया में पानी रहने का श्रेय भी यहां के रहवासियों को जाता है। जो कभी इसका पानी व्यर्थ नहीं बहने देते हैं। हर साल पहाड़ियों से आने वाले बारिश के पानी की धार सीधे तलैया जाकर समा जाती है। यहीं कारण है कि अप्रैल में भी इस तलैया में भरपूर पानी है।

यहां पर बता दें कि सर्किट हाउस पहाड़ी से सटी हुई किशुन तलैया आसपास के लोगों की जागरूकता और देखरेख के कारण लबालब पानी से भरी हुई है। हालांकि तलैया वन विभाग के अधिकार में है, लेकिन देखरेख विभाग नहीं करता। आसपास के लोगों की देखरेख से गर्मी के दिनों में पानी कम नहीं होता। इसका सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि यहां पर मंदिर में स्थित कुआं रिचार्ज हो गया। ग्रामीण इस कुएं का पानी पीने में उपयोग करते हैं।

पहले परेशान थे, लेकिन अब नहीं

यहां के गोविंद रैकवार ने बताया कि पानी की कमी से बीते कुछ सालों से हम लोग बहुत परेशान थे, क्योंकि बारिश का पानी यहां-वहां नालियों में चला जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होता है, कुछ लोगों ने नालियों से पानी जाने का रास्ता बंद कर दिया। इससे सीधे पहाड़ियों से आने वाला पानी तलैया में जमा होने लगा और वह अब हर साल लबालब भर जाता है। इस संबंध में वन विभाग के डीएफओ एचएस मिश्रा का कहना है कि ताल तलैया के मेंनटेंस के लिए कोई राशि नहीं मिलती है। तलैया वन विभाग की है। कुछ लोग वहां पर अतिक्रमण किए हुए हैं, जो इसी तलैया के पानी का इस्तेमाल करते हैं।

रहवासियों के लिए

जीवन दायिनी

शहर के पास इस तलैया में पानी भरने के लिए सुबह से लेकर शाम तक बच्चे साइकिलों पर डिब्बे टांगकर चक्कर लगाते रहते हैं। दिन भर पूरी बस्ती पानी भरती है और आसपास के लोग अपने वाहन धोने के लिए इसमें उतार देते हैं, कई बार रहवासियों का इन वाहन मालिकों से झगड़ा भी हो चुका है, लेकिन कोई सहयोग नहीं मिलने से समस्या का हल नहीं हुआ। स्थानीय बुजुर्ग गोरेलाल ने बताया कि यहां के रहवासी बारिश के पानी को व्यर्थ नहीं जाने देते हैं, सीधे सारा पानी तलैया में जाकर जमा होता है। यहीं कारण है कि अप्रेल का महीना है और तलैया में पानी हिलोरें ले रहा है। किशुन तलैया के पास रहने वाले छात्र नमन, तमन्ना,गीता, सीता और आरती ने बताया कि उनके सामने तलैया ही एक पानी का साधन है। इसका यदि पानी कम हो जाता है तो किल्लत खड़ी हो जाती है। उन्होंने बताया कि तलैया के पास एक कुंआ है, जहां पर सूखने पर पानी सिमट जाता है, इस बीच कुएं की सफाई भी लोग मिलकर करते हैं। ऐसा करने से पानी का भराव उसमें हो जाता है।

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