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जिला अस्पताल की इमरजेंसी में 24 घंटे तैनात रहेंगे बंदूक धारी तीन गार्ड

जिला अस्पताल की इमरजेंसी में तीन बंदूक धारी गार्ड तैनात किए गए हैं। यह दोपहर एक से शाम 5 बजे तक और शाम 6 से दूसरे दिन...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 05:10 AM IST

जिला अस्पताल की इमरजेंसी में तीन बंदूक धारी गार्ड तैनात किए गए हैं। यह दोपहर एक से शाम 5 बजे तक और शाम 6 से दूसरे दिन सुबह 8 बजे तक रहेंगे। दरअसल इसी समय मरीजों के परिजन उनसे अभद्रता करते हैं। कई बार तो लोग मारपीट पर भी उतारू हो जाते हैं।बंदूकधारी गार्ड तैनात करने से काफी हद तक विवादों से राहत मिल जाएगी। रविवार से तीनों शिफ्टों के लिए एक-एक गार्ड की तैनाती कर दी गई।

मरीजों और डाक्टरों की सुरक्षा के लिए एक दर्जन से ज्यादा गार्ड जिला अस्पताल में तैनात किए गए हैं। यह सुरक्षा कर्मी तीन शिफ्ट में ड्यूटी करते हैं, लेकिन कई बार उनके साथ हाथापाई तक हो जाती है। इस बीच लोगों से जूझने के लिए न तो उनके पास कोई डंडा होता है और न ही कोईं बंदूक। एेसे में असामाजिक तत्व गार्डों के साथ मारपीट भी कर देते हैं। इन पर वारदातों पर अंकुश लगाने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने तीन बंदूक धारी गार्ड तैनात किए हैं। इससे पहले मेटरनिटी वार्ड में एक गार्ड के साथ मारपीट कर दी गई थी। इससे पहले सुल्तान सिंह नामक गार्ड के गले में ब्लैड मार दी थी। कई बार डाक्टरों से भी गाली गलौच हो चुकी है।

स्वयं सुरक्षित नहीं थे गार्ड

जिला अस्पताल परिसर की सुरक्षा ऐसे सुरक्षा कर्मियों के जिम्मे हैं जो खुद सुरक्षित नहीं है, क्योंकि इन गार्डों के पास सुरक्षा के नाम पर हाथ में केवल डंडा है। यहीं बजह है जब डॉक्टरों के साथ जब जब मारपीट की घटनाएं हुईं तो सुरक्षाकर्मी तमाशबीन बने रहे। उन्हें अपनी सुरक्षा की ही चिंता रही। हालांकि अस्पताल परिसर में पुलिस चौकी बनी है, लेकिन वहां स्थाई बल की व्यवस्था नहीं है। एक आरक्षक ही तैनात रहता है। जिला अस्पताल की सुरक्षा के लिए अस्पताल प्रबंधन ने प्राइवेट ठेके पर सुरक्षाकर्मी तो रख लिए हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसी ने एक भी ऐसा गार्ड नहीं रखा है जिनके पास बंदूक हो, जबकि अस्पताल परिसर में आए दिन वाद-विवाद की घटनाएं होती रहती हैं। जिसका सामना अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों व स्टाफ को करना पड़ता है। पुलिस केवल तभी पहुंचती है जब विवाद ज्यादा बढ़ जाता है।

अटेंडर नहीं देते तबज्जो

अस्पताल की सुरक्षा करने वाले सुरक्षाकर्मी खुद सुरक्षित नहीं है, क्योंकि हाथ में सिर्फ डंडा होने के कारण परिसर में आने वाला कोई भी मरीज या अटेंडर उनकी नहीं सुनता है और उन्हें धमकी देकर निकल जाता है। सबसे ज्यादा परेशानी रात के समय ड्यूटी करने वाले गार्डों को रहती हैं क्योंकि उस समय परिसर में ज्यादा भीड़-भाड़ भी नहीं रहती है। ऐसे में अगर कोई वारदात हो जाती है, तो गार्डों को अपने बचाव के लिए पुलिस को बुलाना पड़ता है। इस संबंध में जिला अस्पताल की सिविल सर्जन डॉ. ममता तिमोरी ने बताया बंदूक धारी तीन गार्ड तैनात किए गए हैं। िदन भी दिन भर ड्यूटी होती है। एक बंदूक धारी 24 घंटे ड्यूटी अस्पताल में देगा।

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