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जबलपुर-दमोह रोड पर हथनी नर्सरी को टूरिज्म पार्क में तब्दील करने की तैयारी

जबलपुर-दमोह रोड पर स्थित हथनी नर्सरी को अब वन विभाग में ईको टूरिज्म पार्क से जोड़ने जा रहा है। दमोह के डीएफओ एचएस...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 07:35 AM IST
जबलपुर-दमोह रोड पर स्थित हथनी नर्सरी को अब वन विभाग में ईको टूरिज्म पार्क से जोड़ने जा रहा है। दमोह के डीएफओ एचएस मिश्रा ने इसकी कार्ययोजना बनाकर मंत्रालय के पास भेजी है। इस नर्सरी में करीब 60 साल पुराने सागौन के पेड़ लगे हैं इसके अलावा यहां पर बड़े स्तर पर घूमने के लिए जगह है। एक बार ईको टूरिज्म पार्क तैयार हो जाएगा तो चहल-पहल होने लगेगी। इससे पहले भी इस पार्क को ईको टूरिज्म बनाने को लेकर प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन उसमें खामी होने के चलते उसे लौटा दिया गया। एक बार फिर से पार्क को नए सिरे से बनाने के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है।

दरअसल हथनी नर्सरी बीट करीब 260 हेक्टेयर में फैली और इसमें सागौन के बड़े-बड़े पेड़ लगे हैं। इन पेड़ों की उम्र करीब 70 साल है। इन पर तस्करों की नजर है। काफी मात्रा में पेड़ कांटे जा चुके हैं। जबकि इन पेड़ों की लंबे समय से निगरानी चल रही है। यहां की सुंदरता देखने हुए वन विभाग ने इस बीट को ईको टूरिज्म में तब्दील करने का निर्णय लिया है। करीब पांच करोड़ ऱपए की राशि का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। जिसमें सबसे पहले बीट की तार फेसिंग और उसके बाद पर्यटकों के मनोरंजन की सामग्री उपलब्ध कराना है। शासन से मंजूरी आने के बाद इस बीट को ईको टूरिज्म में तब्दील करने में समय नहीं लगेगा। क्योंकि यहां पर पहले से ही पार्क बना हुआ है और यहां पर लोगों का आना-जाना भी लगा रहता है।

विश्रम गृह, मनोरंजन सामग्री सहित

अत्याधुनिक सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी

डीएफओ एचएस मिश्रा ने बताया कि प्रदेश सरकार को ईको टूरिज्म हब बनाने के लिए प्रस्ताव भेजा जा चुका है। पांच करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर इस केंद्र में विश्रम गृह, मनोरंजन सामग्री सहित अत्याधुनिक सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। इस केंद्र में उच्च स्तरीय संसाधन उपलब्ध कराने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजे गए हैं। उन्होंने बताया कि बीट में लगा सागौन करीब 60 से 70 साल पुराना है। नर्सरी में भी पर्याप्त जगह है। यहां पर लोगों का आना जाना भी होता है। एक बार पार्क में तब्दील हो जाने पर यहां लोगों की चहल पहल हो जाएगी और पेड़ों की कटाई भी रूक जाएगी। उन्होंने बताया कि अलग-अलग कामों में एक-एक करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। अभी इस केंद्र में वाच टावर का निर्माण, एप्रोच रोड निर्माण, पंप हाउस, सोलर पंप, वाटर होल का निर्माण, नलकूप निर्माण आदि कार्य हो चुके हैं। वन विभाग ने शासन को नए सिरे से जो प्रस्ताव भेजा है उसमें पांच करोड़ से अधिक का कार्य होना है।