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मध्य युग के सत्य से साक्षात्कार कराता आवरण: तिवारी

आवरण उपन्यास के लेखक भैरप्पा ने अपने उपन्यास आवरण में आठवीं शताब्दी के उस सत्य को निरावृत्त करने का प्रयास किया है...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 07:35 AM IST
आवरण उपन्यास के लेखक भैरप्पा ने अपने उपन्यास आवरण में आठवीं शताब्दी के उस सत्य को निरावृत्त करने का प्रयास किया है जिसे उस युग के मुस्लिम साहित्यकारों ने प्रलोभन एवं आतंक के वशीभूत होकर सत्य को आवृत्त कर लिखा था।

काफी शोध एवं मेहनत के बाद लिखा गया उपन्यास आवरण हमें उस युग के सच से अवगत कराता है जिसे हमने उस युग में भोगा और सहा है। उस युग के साहित्य पर आवरण पड़ा होने से हम आज तक उस युग के सत्य को सही ढंग से जान और समझ नहीं सके। ये उद्गार डॉ. छविनाथ तिवारी ने लघुकथाकार ओजेंद्र तिवारी के निवास पर आयोजित पाठक मंच की मासिक समीक्षा गोष्ठी में उपन्यास आवरण की समीक्षा पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि की आसंदी से व्यक्त किए। पाठक मंच के सह संयोजक ओमप्रकाश खरे ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ मंचासीन अतिथियों में मुख्य अतिथि डॉ. छविनाथ तिवारी, कार्यक्रम अध्यक्ष अमर सिंह राजपूत, कार्यक्रम के विशिष्ठ अतिथि श्याम सुंदर शुक्ल द्वारा मां वीणापाणि के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण से हुआ। वरिष्ठ कवयित्री चंदा नेमा ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। मंचासीन अतिथियों का परिचय पाठक मंच के संयोजक डॉ. नाथूराम तिवारी ने प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि का स्वागत पूर्व डीईओ साहित्यकार डॉ. पीएल शर्मा ने किया। लघुकथाकार श्री तिवारी ने कन्नड़ लेखक भैरप्पा द्वारा लिखित एवं प्रधान गुरूदत्त द्वारा अनुवादित उपन्यास आवरण पर अपनी समीक्षा प्रस्तुत की। श्री तिवारी ने अपनी समीक्षा में बतलाया कि आवरण उपन्यास के लेखन में लेखक ने 136 ऐतिहासिक पुस्तकों का सहारा लिया है। उपन्यास के मुख्य पात्र अमीर और रजिया हैं। जिसमें रजिया हिंदू है जिसका वास्तविक नाम लक्ष्मी है। उपन्यास में मध्ययुग के शासकों द्वारा हिंदुओं पर किए गए क्रूरतम अत्याचारों एवं काशी एवं मथुरा के हिंदु मंदिरों सहित अन्यान्य धर्म स्थलों को तोड़े जाने की विस्तृत गाथा है। तथाकथित सेक्यूलरबाजों एवं मार्क्सवादी विचारधारा के इतिहासकारों की मनः स्थिति का भी इसमें सजीव चित्रण है। द्वितीय समीक्षाकार वरिष्ठ साहित्यकार पं. रामकुमार तिवारी ने भी उपन्यास आवरण पर विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत की। कार्यक्रम के अंत में अमर सिंह का अध्यक्षीय उद्बोधन हुुआ। जिसमें उन्होंने कहा कि आवरण जैसे उपन्यास पाठकों को चिंतन की एक नई दिशा प्रदान करते हैं। इस मौके पर श्याम सुंदर शुक्ल ने बसंत पर सुंदर काव्य रचना की प्रस्तुति दी। डॉ. रमेश चंद्र खरे, डॉ. पीएलशर्मा, महेंद्र श्रीवास्तव, चंदा नेमा, कालूराम नेमा, मानव बजाज, पीएस परिहार पिम्मी, ओमप्रकाश खरे, मनोरमा रतले, बीएम दुबे सहित अन्य साहित्यकारों की उपस्थिति रही।

पाठक मंच की मासिक समीक्षा गोष्ठी में उपन्यास आवरण की समीक्षा की गई

दमोह। विमोचन कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकार।