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1356 हितग्राहियों को देना होगा लोन, तब निर्माण फिर से प्रारंभ करेगी एजेंसी

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 01:25 PM IST


भास्कर संवाददाता|दमोह

प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत मंजूर किए गए 1356 भवनों का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच गया है, लेकिन हितग्राहियों को बैंकों ने लोन देने में गंभीरता नहीं दिखाई है। यही कारण है कि हितग्राही को बैंक से लोन के रूप में मिलने वाली राशि अब तक उन्हें नहीं मिली है और यह राशि एजेंसी तक नहीं पहुंच पाई है।

यहां पर बता दें कि मंगलवार को निर्माण एजेंसी ने भुगतान न मिलने की वजह से काम रोक दिया था। करीब डेढ़ हजार मजदूर मजदूरी न मिलने से सड़क पर उतर आए थे। इस मामले में नगरपालिका की ओर से बैंकों द्वारा लोन न मिलने के कारण भुगतान में देरी होना कारण बताया गया था। नगरपालिका की ओर से चयनित किए गए 1356 हितग्राहियों को कम दरों पर भवन उपलब्ध कराने के लिए बैंक से लोन दिलाने की प्रक्रिया तय की गई थी। दमोह में तीन बैंकों से इसके केस मंजूर कराए जा रहे हैं। जिसमें यूनियन बैंक, एसबीआई सहित सहित एक अन्य बैंक शामिल हैं।

इन बैंकों को हितग्राहियों को लोन देना है और लोन की राशि ही सीधे तौर पर नगरपालिका निर्माण एजेंसी को भुगतान करेगी, दीपावली तक सभी केस मंजूर होने के बाद उनका लोन जारी किया जाना था, लेकिन बैंकों ने केस मंजूर करने के बाद राशि खातों में नहीं डाली। जिससे भुगतान अटक गया। तीन माह में करीब 70 करोड़ रुपए का भुगतान निर्माण एजेंसी को नहीं किया गया। ऐसी स्थिति में एजेंसी ने काम रोक दिया। मंगलवार को पेटी कांट्रेक्टरों ने काम नहीं किया और विरोध करने के लिए कलेक्टोरेट पहुंच गए थे। जिसके बाद सीएमओ कपिल खरे, तहसीलदार मनोज श्रीवास्तव और निर्माण एजेंसी के अधिकारी मौके पर पहुंचे थे।

जिसके बाद आश्वासन दिलाया गया था कि 10 फरवरी तक भुगतान किया जाएगा। जिसके बाद से कलेक्टर और सीएमओ ने बैंक के अधिकारियों से संपर्क किया था। ताकि लोन के केस जल्द मंजूर हो सकें।

दमोह। पीएम आवास योजना का भुगतान बैंकों से जमा नहीं होने पर मजदूरों ने काम बंद कर दिया था।

हर दिर 50 केस मंजूर करने होंगे

सीएमओ कपिल खरे ने बताया कि अभी बैंक केवल एक से दो केस ही मंजूर कर रहे हैं, जबकि केसों की संख्या डेढ़ हजार से ज्यादा है। ऐसी स्थिति में बैंक से एक दिन में 50 से ज्यादा केस मंजूर करने का लक्ष्य दिया गया है। बैंकों ने भी आश्वासन दिया है कि वे केसों की संख्या बढ़ाएंगे। दरअसल मार्च नजदीक होने के चलते बैंक भी इतनी बड़े स्तर पर राशि मंजूर नहीं कर पा रहे हैं, जिससे निर्माण एजेंसी को भुगतान नहीं हो रहा है। फिलहाल एजेंसी का काम बंद चल रहा है।

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