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खरीदी से लेकर गोदामों तक पहुंचने के बीच 12 करोड़ 63 लाख का चना-मसूर और सरसों गायब

Á चना : 9 लाख 31 हजार 128 क्विं. 53 किलो Á मसूर : 99 हजार 889 क्विंटल Á सरसों : 5 हजार 185 क्विंटल 24 किलो परिवहन का आंकड़ा Á...

Dainik Bhaskar

Sep 12, 2018, 02:42 AM IST
Damoh - खरीदी से लेकर गोदामों तक पहुंचने के बीच 12 करोड़ 63 लाख का चना-मसूर और सरसों गायब
Á चना : 9 लाख 31 हजार 128 क्विं. 53 किलो

Á मसूर : 99 हजार 889 क्विंटल

Á सरसों : 5 हजार 185 क्विंटल 24 किलो

परिवहन का आंकड़ा

Á चना : 9 लाख 25 हजार 738 क्विं. 10 किलो

Á मैसूर : 99 हजार 412 क्विंटल 79 किलो

Á सरसों : 5 हजार 55 क्विंटल 2 किलो

गायब हुए स्टॉक के आंकड़े

चना : 25 हजार 292 क्विंटल 85 किलो

कीमत : 11 करोड़ 12 लाख 84 हजार 800 रुपए

मैसूर : 3 हजार 314 क्विंटल 30 किलो

कीमत : 1 करोड़ 28 लाख 81 हजार 750 रुपए

सरसों : 138 क्विंटल 61 किलो

कीमत : 5 लाख 52 हजार रुपए

कुल : 12.63 लाख 18 हजार 550 रु

समितियों पर रिकवरी निकाली जाएगी

25 हजार 292 क्विंटल चना, 3 हजार 314 क्विंटल मसूर और 138 क्विंटल सरसों गायब

भास्कर संवाददाता | दमोह

समर्थन मूल्य पर जिले की 6 मंडियों में हुई चना-सरसों और मसूर की खरीदी के बाद समिति से गोदामों तक पहुंचे स्टॉक में 25 हजार क्विंटल चना, 3 हजार क्विंटल मसूर और 138 क्विंटल सरसों गायब है। इस अनाज की कीमत करीब 12 करोड़, 63 लाख 18 हजार 550 रुपए आंकी गई है। अधिकारी जवाब में सिर्फ इतना कह रहे हैं- कुछ चना सूख गया है और कुछ चोरी चला गया है।

दरअसल, इस साल जिले की बटियागढ़, पथरिया, तेंदूखेड़ा, जबेरा, दमोह और हटा मंडी में 10 अप्रैल से समर्थन मूल्य पर खरीदी हुई थी। 34 हजार 671 किसानों से 9 लाख 31 हजार 128 क्विंटल 53 किलो चना खरीदा गया था जिसमें 8 लाख 74 हजार 686 क्विंटल 67 किलो ही गोदामों तक पहुंचा है यानी बाकी करीब 25 हजार 292 क्विंटल 85 किलो चना गायब हो गया। जिले में इतने बड़े पैमाने पर गड़बड़ी उजागर होने के बाद अधिकारियों में हड़कंप मचा है।

जानकारी के अनुसार इस साल मंडियों में समर्थन मूल्य पर चना 44 सौ रुपए, मसूर 4250 रुपए और सरसों 4 हजार प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदी की गई है। इसमें कई किसानों का भुगतान करा दिया गया है, जबकि कई किसानाें काे अब तक भुगतान नहीं मिला है। स्थिति यह है कि मंडी ने खरीदी तो की है, लेकिन गोदाम तक स्टाक पूरा नहीं पहुंचा। सूत्र बताते हैं कि इस गड़बड़झाले में कई लोगों की भूमिका संदिग्ध है। उनके संरक्षण में ही या तो कागजों पर खरीदी की गई है या फिर मंडियों से ही चना, सरसों-मसूर गायब कर दिया गया है।

वेयर हाउस की स्वीकृति के बाद आंकड़े सामने आए

चना-मसूर और सरसों की खरीदी में किए गए घपले का खुलासा वेयर हाउस रिसीव (डब्ल्यूएचआर) से हुआ है। इसमें पाया गया कि जो कुल खरीदी हुई है उसमें से 25 हजार क्विंटल चना, 3 हजार क्विंटल मैसूर और 138 क्विंटल सरसों वेयर हाउस को रिसीव नहीं हुई है। कई बार वेयर हाउस में घटिया क्वालिटी का अनाज पहुंचने पर उसे स्वीकार नहीं किया जाता है तो उसकी डब्ल्यूएचआर जारी नहीं होती तो कई बार मंडी कागजों में खरीदी कर लेती है लेकिन भौतिक रूप से खरीदी न होने पर वह गोदाम नहीं पहुंचती जिससे इसका भी डब्ल्यूएचआर जारी नहीं होता है।

कलेक्टर डॉ. विजय कुमार जे का कहना है कि इस मामले को लेकर जांच के आदेश दिए हैं। समितियों की गड़बड़ी सामने आ रही है। जिन समितियों की गड़बड़ी है, उनके खिलाफ रिकवरी निकाली जाएगी। उन्होंने बताया कि जिन किसानों की राशि अटकी है, उनका भुगतान किया जाएगा।

परिवहन पूरा होने के बाद सच सामने आया :

सवाल है कि अब जब परिवहन पूरा हो चुका है तो ऐसे में यह अनाज कहा गया ? ऐसे में किसान भी हंगामा कर रहे हैं। रबी विपणन वर्ष 2018-19 में समर्थन मूल्य पर की गई चना, मसूर एवं सरसों की खरीदी और उसके गोदामों में भंडारीकरण का कार्य पूरा हो चुका है। लेकिन मामले में जब डब्ल्यूएचआर से जांच की गई तो पाया गया कि खरीदी गई मात्रा और गोदाम में भंडारित मात्रा में काफी अंतर है।

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