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1161 में से 202 ग्राम ही ओडीएफ हो पाए, 2 अक्टूबर को कैसे होगा शौचमुक्त दमोह

स्वच्छ भारत मिशन के तहत 2 अक्टूबर को ओडीएफ घोषित होने वाले प्रदेश के सभी जिलों में से 14 जिले अपने लक्ष्य से पिछड़ गए...

Dainik Bhaskar

May 18, 2018, 03:50 AM IST
1161 में से 202 ग्राम ही ओडीएफ हो पाए, 2 अक्टूबर को कैसे होगा शौचमुक्त दमोह
स्वच्छ भारत मिशन के तहत 2 अक्टूबर को ओडीएफ घोषित होने वाले प्रदेश के सभी जिलों में से 14 जिले अपने लक्ष्य से पिछड़ गए हैं। इन पिछड़े जिलों में सागर संभाग का दमोह और छतरपुर भी शामिल हो गया है। दोनों जिलों की प्रगति में तेजी से गिरावट आई है। ग्रामीण विकास विभाग के एसीएस ने लक्ष्य में गिरावट होने की रिपोर्ट शासन के पास भेज दी है। ऐसे में दमोह का खुले में शौच मुक्त हाेना अब मुश्किल जान पड़ रहा है। इस काम में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।

दरअसल 2 अक्टूबर 2018 तक लक्ष्य के अनुरूप दमोह जिले को ओडीएफ घोषित करने के लिए स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के अंतर्गत 1161 गांवों को खुले में शौच मुक्त करना है, लेकिन अभी तक केवल 202 गांव ही ओडीएफ घोषित हो पाए हैं। जबकि दो अक्टूबर के लिए अब केवल 5 माह का समय शेष बचा है। अब सवाल यह है कि 5 माह में 959 गांव के कैसे ओडीएफ घोषित होंगे, यह बात भोपाल में बैठे अधिकारियों के गले नहीं उतर रही है।

शौचालय निर्माण का जनपद वार लक्ष्य और प्रगति

ब्लाक लक्ष्य प्रगति

बटियागढ़ 28,272 21,118

दमोह 45,718 28,725

हटा 24,803 15,830

जबेरा 41,100 30,487

पटेरा 25,182 20,745

पथरिया 32,880 25,856

तेंदूखेड़ा 24,369 21,815

कुल शौचालय निर्माण -2,22,324

अब तक बने 1,64,576

संजय मौर्य | दमोह

स्वच्छ भारत मिशन के तहत 2 अक्टूबर को ओडीएफ घोषित होने वाले प्रदेश के सभी जिलों में से 14 जिले अपने लक्ष्य से पिछड़ गए हैं। इन पिछड़े जिलों में सागर संभाग का दमोह और छतरपुर भी शामिल हो गया है। दोनों जिलों की प्रगति में तेजी से गिरावट आई है। ग्रामीण विकास विभाग के एसीएस ने लक्ष्य में गिरावट होने की रिपोर्ट शासन के पास भेज दी है। ऐसे में दमोह का खुले में शौच मुक्त हाेना अब मुश्किल जान पड़ रहा है। इस काम में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।

दरअसल 2 अक्टूबर 2018 तक लक्ष्य के अनुरूप दमोह जिले को ओडीएफ घोषित करने के लिए स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के अंतर्गत 1161 गांवों को खुले में शौच मुक्त करना है, लेकिन अभी तक केवल 202 गांव ही ओडीएफ घोषित हो पाए हैं। जबकि दो अक्टूबर के लिए अब केवल 5 माह का समय शेष बचा है। अब सवाल यह है कि 5 माह में 959 गांव के कैसे ओडीएफ घोषित होंगे, यह बात भोपाल में बैठे अधिकारियों के गले नहीं उतर रही है।

पटेरा के सलैया ग्राम में जलसंकट के चलते ग्रामीण शौचालय का उपयोग ही नहीं कर रहे हैं।

माहवार टारगेट पूरा करने की रिपोर्ट भेजी

इधर जमीनी अमले ने शौचालयों का लक्ष्य पूरा करने के लिए माहवार टारगेट तय कर लिया है, जिसमें मई में 393, जून में 189, जुलाई में 188,अगस्त में 189 ग्रामों को ओडीएफ घोषित करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों ने इसे नकार दिया है और ओडीएफ घोषित कराने वाली श्रेणी से दमोह काफी दूर है। खास बात यह है कि दमोह, छतरपुर, सिंगरौली जिलों में ओडीएफ घोषित करने को लेकर काम चल रहा है। इन जिलों को नीति आयोग में भी शामिल किया गया है। मगर इसके बाद भी अधिकारियों ने इसमें गंभीरता नहीं दिखाई। दमोह में मई में 7194 एफटीओ जारी करने का लक्ष्य था मगर 938 ही जारी हो पाए। जो कि लक्ष्य का मात्र 13.4 प्रतिशत ही है।

भ्रष्टाचार भी बड़ा कारण

शौचालय निर्माण में भ्रष्टाचार भी एक बड़ा कारण बनकर सामने आया है। पथरिया जनपद ग्राम पंचायत के नरसिंहगढ़ में 160 से ज्यादा शौचालयों के निर्माण का भ्रष्टाचार है। सरपंच पर आरोप भी लगे हैं। जिला पंचायत सीईओ एचएस मीणा ने इस मामले की जांच का आश्वासन दिया था। पिछले तीन माह से जांच की फाइल दबी हुई है। जिसका अभी तक प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया है और न ही जांच अब तक सामने आई है। खास बात यह है कि इस मामले में भ्रष्टाचार करने वाले सरपंच और सचिव ने सीमेंट फैक्ट्री के डायरेक्टर के नाम पर शौचालय की राशि का बंदरबांट कर दिया, लेकिन अधिकारियों ने इस जांच को अब तक दबा कर रखा है। श्री मीणा का कहना है कि अभी टारगेट को लेकर हम काम कर रहे हैं, समय पर इसे पूरा कर लेंगे।

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