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जीवन में संयम के बिना नहीं मिलेगा मोक्ष का रास्ता

श्री पारसनाथ दिगंबर जैन नन्हे मंदिर धर्मशाला में आचार्य श्री उदार सागर जी महाराज के सानिध्य में बीसवीं सदी के...

Dainik Bhaskar

Sep 12, 2018, 02:41 AM IST
Damoh - जीवन में संयम के बिना नहीं मिलेगा मोक्ष का रास्ता
श्री पारसनाथ दिगंबर जैन नन्हे मंदिर धर्मशाला में आचार्य श्री उदार सागर जी महाराज के सानिध्य में बीसवीं सदी के प्रथम दिगंबर मुनि चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर जी का 63वां पुण्य स्मरण किया गया। इस मौके पर अष्ट द्रव्य से सामूहिक पूजन करके विनयांजलि अर्पित की गई। सामूहिक पूजन कार्यक्रम में दीप प्रज्वलन आनंद जैन, राजकुमार जैन ने किया।

शास्त्र भेंट महिला मंडल नन्हे मंदिर जी ने किया। पाद प्रक्षालन का सौभाग्य प्रेमचंद मुडेरी परिवार को प्राप्त हुआ। आचार्य श्री का पूजन सौधर्म इंद्र करने का सौभाग्य प्राप्त करने वाले महेंद्र मुंशी ने आचार्य श्री के जीवन वृत्त पर प्रकाश डाला। सिद्ध क्षेत्र कुंथलगिरी में 36 दिन की उत्कृष्ट सल्लेखना के बाद भाद्रपद शुक्ल द्वितीय रविवार के दिन प्रातः बेला में हस्त नक्षत्र अमृत सिद्धि योग में आचार्य श्री ने 84 वर्ष की आयु में नश्वर काया का त्याग किया था। समाधि की यह तारीख 18 सितंबर 1955 तारीख थी।

कार्यक्रम में चरित्र चक्रवर्ती 108 आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज का अष्ट द्रव्य से पूजन किया गया। संयोजन मंदिर कमेटी अध्यक्ष गिरीश नायक ने किया। पाठशाला एवं महिला मंडल का योगदान रहा। पं. सुरेश शास्त्री ने आचार्य श्री शांतिसागर जी से जुड़े संस्मरण सुनाते हुए बताया कि 1928 में सम्मेद शिखर जी की वंदना करने जाते समय कटनी में आचार्य श्री का चातुर्मास हुआ था।

आचार्य श्री उदारसागर महाराज ने चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज के जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला। 20वीं सदी में दिगंबर परंपरा को पुनः प्रारंभ करने तथा 36 दिन की उत्कृष्ट सल्लेखना धारण करने के वृतांत को सुनाया। आचार्य श्री ने कहा- संयम के बिना मोक्ष मार्ग असंभव है। जितने भी तीर्थंकर हुए हैं उन्होंने संयम धारण करके श्री तक ज्ञान और मोक्ष मार्ग पर कदम बढ़ाए हैं। आचार्य श्री उदारसगर जी ने कहा कि उनकी त्याग, साधना, तपश्चरण और श्रुष्टि पर उनके उपकार को शब्दों में नहीं कहा जा सकता।

श्री मुनि श्री उप शांत सागर महाराज ने आचार्य श्री शांतिसागर महाराज के जीवन से जुड़े संस्मरण सुनाएं। उन्होंने सभी से अपने घरों में आचार्य शांतिसागर जी की के चित्र को जरूर लगाने का आवाहन करते हुए कहा कि शांतिसागरजी महाराज का स्मरण मात्र ही जीवन में शांति का संचार करता है।

दमोह जिले के लिए यह सौभाग्य की बात रही है कि 1928 शिखर जी से वापसी के दौरान कटनी से सागर जाते समय दमोह से आचार्य श्री का संघ निकला था।

चरित्र चक्रवर्ती आचार्य शांतिसागर महाराज के समाधि दिवस पर आचार्य उदारसागरजी के सानिध्य में कार्यक्रम

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